प्रशासनिक सजगता व लोगों का स्वानुशासन आ रहा है काम

- राजसमंद जिला इसलिए है कोरोना वायसर से अब तक अछूता
- जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल से बातचीत

By: Rakesh Gandhi

Published: 18 Apr 2020, 07:46 PM IST

राजसमंद. कोरोना वायरस से देश में हर कोई आतंकित है, लेकिन राजसमंद एक ऐसा जिला है, जो अब तक सबसे सुरक्षित है। यहां न केवल प्रशासनिक सजगता काम आई, बल्कि यहां के लोगों का स्वानुशासन भी बहुत कारगर साबति हुआ। लोगों ने देश के लोगों से भी बहुत पहले खुद को घरों में कैद कर लिया। मार्च 19 को जिले में लागू अनौपचारिक लॉकडाउन से अब तक की परिस्थितियों को लेकर जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल से राजस्थान पत्रिका समूह के समाचार सम्पादक राकेश गांधी की विस्तृत बातचीत हुई। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल- राजसमंद आज प्रदेश ही नहीं, देश के सबसे सुरक्षित जिलों में से एक है। एक जिले के सबसे बड़े अधिकारी के तौर पर ये जानकार आप कैसा महसूस करते हैं और इसमें यहां के लोगों का क्या योगदान मानते हैं?
जवाब- ये बहुत ही सुखद खबर है। अच्छा लगता है कि राजसमंद गिने-चुने जिलों में से एक है, जहां कोरोना का एक भी पॉजीटिव मरीज नहीं है। अब तक 250 से अधिक सैम्पल लिए जा चुके हैं, और सभी नेगेटिव हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ये भी थी कि यहां के लोगों ने अच्छा सहयोग दिया है। लोगों ने मुझे चलाकर कहा है कि आप लॉकडाउन का सख्ती से पालना करवाएं। दूसरा, हमारी टीमों ने पूरी सजगता से काम किया है। जो भी बाहर से यहां आता है, उसे तत्काल क्वारेंटाइन सेन्टर पहुंचाया जा रहा है और इसमें भी लोगों का सहयोग मिल रहा है।

सवाल- ये जिला भीलवाड़ा, चित्तौडग़ढ़, पाली, अजमेर व उदयपुर की सीमा से सटा है, इसके बावजूद कोरोना से बचाव के मामले में आप अब तक की सफलता का क्या राज मानते हैं?
जवाब- जैसे ही राजस्थान में कोरोना के मरीज होने की जानकारी मिलना शुरू हुई, हमने तत्काल फैसला करते हुए जिले की विभिन्न सीमाओं को सील कर दिया। देश में जहां 21 मार्च को लॉकडाउन हुआ था, जबकि राजसमंद में 19 मार्च को अनौपचारिक व 20 मार्च को आधिकारिक तौर पर लॉकडाउन लागू कर दिया गया। जैसे-जैसे जरूरी लगा सभी नेशनल हाई-वे सील कर दिए गए। किसी को भी जिले में आने की अनुमति नहीं दी गई। उस दौरान हालांकि कई सारे सवाल उठे, लेकिन उस दौरान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा की थी। इसके साथ ही हमने जिले के लोगों की स्क्रीनिंग भी शुरू कर दी। आज आपको इसीलिए ग्रीन राजसमंद दिखाई दे रहा है, क्योंकि यहां भीतर कोई मरीज नहीं है।


सवाल- जब ये पता चला कि 90 किलोमीटर दूर जिले की सीमा से सटा भीलवाड़ा कोरोना की चपेट में आ चुका है, उस दौरान के हालात ने आपको किस तरह के सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया?
जवाब- बिल्कुल, जैसे ही भीलवाड़ा की स्थिति सामने आई तो राजसमंद जिले के अधिकारियों के मन में भी चिंता घर करने लगी। हमें लोगों की सुरक्षा के अलावा कुछ भी नहीं सूझ रहा था। अत: हमनेे तत्काल सख्त कदम उठाते हुए भीलवाड़ा के साथ सभी लिंक खत्म किए। हमने व्यापार मंडल व अन्य लोगों से बात भी की। सभी से बात करने के बाद हमने ये सख्ती लागू की। मात्र आधे घंटे में ये निर्णय कर लिया कि हमें भीलवाड़ा से बिल्कुल लिंक खत्म कर देना होगा, ताकि वहां से न कोई आ सके व न यहां से जा सके। जनप्रतिनिधियों ने भी इस दौरान प्रशासन का पूरा सहयोग किया। आप देखिए कि इस दौरान 42 हजार लोग महाराष्ट्र व गुजरात से यहां आए। इन सभी की स्क्रीनिंग करवाई गई। उन्हें घरों में क्वारेंटाइन किया गया। आज सभी स्वस्थ हैं।

सवाल- आपने सबसे पहले 19 मार्च को जिले में लॉकडाउन कर दिया। क्या आपको ऐसा करने में किसी तरह व्यावहारिक दिक्कतें नहीं आई? हालांकि बाद में प्रशासन के इस फैसले की सभी ने सराहना की।
जवाब- दिक्कतों के बारे में सोचने का अवसर नहीं था। हमारा मुख्य उद्देश्य यहां की लोगों की सुरक्षा था, अत: हमने भीलवाड़ा में मरीज के सामने आते ही तत्काल उस सीमा को बंद करना उचित लगा। यहां के बाजार 19 मार्च को अनौपचारिक तौर पर बंद करवा दिए। अगले दिन औपचारिक तौर पर लॉकडाउन लागू किया गया। जबकि राजस्थान में 21 मार्च को लॉकडाउन लागू हुआ था। राजसमंद के मामले में हमारे पास ज्यादा सोचने का अवसर ही नहीं था।


सवाल- बाहर से आने वाले लोगों को रोकना क्या बड़ी चुनौती नहीं है? इस समस्या से कैसे निपट पा रहे हैं?
जवाब- बाहर से आने वालों लोगों से निपटना वाकई कठिन है। फिर भी हम लोगों को ये समझाने की कोशिश करते रहे कि वे फिलहाल जहां हैं, वहीं रहे। ये ही उनके लिए हित में रहेगा। फिर भी यदि कोई बाहर से आए हैं, उन्हें 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में रखा जा रहा है। ऐसे में अब बाहर से आने वालों ने भी फोन करना बंद कर दिया है, क्योंकि यहां आने के बाद भी वे 14 दिन तो घर जा ही नहीं पाएंगे।


सवाल- ये सुखद है कि अभी तक खतरे की कोई गुंजाइश नजर नहीं आती, फिर भी यदि किसी तरह की कोई आशंका उत्पन्न होती है तो क्या प्रशासन के पास इससे निपटने की पुख्ता व्यवस्था है?
जवाब- देखिए, हम पूरी तरह चौकस हैं। आपको पता होगा कि दक्षिण कोरिया में तो मात्र एक महिला के कारण ही वहां सबकुछ बिगड़ गया था। मतलब हमें संक्रमण की किसी भी कड़ी को रोकना ही होगा। हमारी एक भी भूल अब तक की मशक्कत पर भारी पड़ सकती है। इसके लिए यहां के लोगों को भी सजग व सतर्क रहना होगा। खुद की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना होगा। घर में रहना होगा। लॉकडाउन कानून की सख्ती से पालना करनी होगी। हां, कुछ छूट मिलने की संभावना व्यवसाय के लिहाज से बनी है, लेकिन कोशिश रहेगी कि कम से कम छूट दी जाए, ताकि किसी भी तरह की असावधानी से बचा जाए। जहां तक चिकित्सा संसाधनों की बात है, हमने 50 लाख का बजट जिला अस्पताल के लिए दे रखा है। हमारे पास 27 वेंटिलेटर हैं, जो राजसमंद जिले को देखते हुए पर्याप्त हैं। हमारे पास 1000 बेड की सुविधा सुलभ है। मतलब हम पूरी तरह चाक-चौबंद हैं, सजग हैं, सतर्क हैं, इसलिए यहां के लोगों को भी पहले की तरह सहयोग देते रहना है और घरों में सुरक्षित रहना है। कोरोना की जंग तभी जीतना संभव होगा, जब यहां का एक-एक नागरिक साथ देगा।

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
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