आखिर नहीं बच पाया बगदीदास

- पति का इलाज कराने सरकारी अस्पतालों में भटकती रही महिला
- खमनोर थाना क्षेत्र के कराई गांव का मामला

By: Rakesh Gandhi

Published: 05 Sep 2020, 10:54 PM IST

खमनोर. कराई गांव में मारपीट से मरणासन्न हालत में पहुंचे एक व्यक्ति का इलाज कराने उसकी पत्नी पांच दिन तक राजसमंद-उदयपुर के सरकारी अस्पतालों में भटकती रही, लेकिन इलाज की बजाय उपेक्षा झेलती रही। पीडि़त की पत्नी सरकारी अस्पतालों में भटकने के बाद दु:खी होकर आखिरकार अपने पति को इलाज कराने उदयपुर के एक निजी अस्पताल में ले गई। लेकिन, इलाज में इतनी देर हो चुकी थी कि उसने शनिवार को दम तोड़ दिया।
खमनोर थाना क्षेत्र के कराई गांव के 40 वर्षीय बगदीदास के उपचार को उसकी पत्नी भंवरी सरकारी अस्पतालों में भटक-भटक कर हार गई। आखिर शुक्रवार शाम को वह उसे उदयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले गई, जहां शनिवार को उसने दम तोड़ दिया। बगदीदास की एक सप्ताह पहले हालत ज्यादा बिगड़ी तो पत्नी भंवरी उसे लेकर खमनोर सीएचसी, नाथद्वारा, राजसमंद और उदयपुर के बड़े सरकारी अस्पतालों में भटकती रही, लेकिन कहीं किसी डॉक्टर ने उसकी जान बचाने के लिए इलाज करना मुनासिब नहीं समझा। राजसमंद सीएमएचओ ने भी तीन दिन पहले इलाज नहीं करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही, लेकिन मौत से जूझ रहे पीडि़त के इलाज की व्यवस्था नहीं हो पाई। उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त 2020 को कराई में बगदीदास ऊर्फ बग्गादास (40) पुत्र बंशीदास के साथ राकेश पुत्र थावरदास ने मारपीट की, जिससे उसे जननांगों में गंभीर चोटें आई। रिपोर्ट पर पुलिस ने एक सितंबर 2020 को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस का कहना है कि मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल रिपोर्ट व इलाज दोनों से इनकार
पुलिस और परिजन पीडि़त को खमनोर सीएचसी ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट बनाने से इनकार कर दिया। उसका इलाज भी नहीं किया। पीडि़त की पत्नी इलाज के लिए उसे लेकर राजसमंद, नाथद्वारा और उदयपुर के सरकारी अस्पतालों में कई बार गई, लेकिन वहां भी किसी ने मदद नहीं की। महिला अपने पति को अस्पताल से घर और घर से अस्पताल लेकर भटकती रही। डॉक्टरों ने न तो इलाज के लिए भर्ती किया और ना ही मेडिकल रिपोर्ट बनाई। हर जगह से टरका कर रवाना कर दिया। डॉक्टरों ने इलाज करने से पहले यहां तक कह दिया कि इसे घर ले जाकर सेवा करो। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के अमानवीय व्यवहार पर लोगों ने भी असंतोष जताया है। सीएमएचओ से बात करने पर उन्होंने खमनोर से मेडिकल बनाने की बात कही है, लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह के मेडिकल होने से इनकार किया है।

एक रात में लगे 20 हजार, पर नहीं बची जान
भंवरी अपने परिवार की आर्थिक हैसियत नहीं होने से पीडि़त पति को निजी अस्पताल में इलाज कराने ले जाने से डरती रही। सरकारी अस्पतालों से मिली निराशा के बाद उसने पति की जिंदगी बचाने के लिए निजी अस्पताल की शरण ली। बगदीदास के इलाज में निजी अस्पताल में एक ही रात में 20 हजार रुपए खर्चा आया। फिर भी जान नहीं बची। शनिवार दोपहर तीन बजे बगदीदास की मौत हो गई। एएसआई रामसिंह यादव ने बताया कि खमनोर सीएचसी में शव का पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया।

जांच के लिए रैफर किया था...
खमनोर में मैंने बात की थी, वहां बताया कि उसकी एमएलसी (मेडिकल) बना दिया था, और उदयपुर रैफर किया था, अब वहां से नहीं बनी है।
- जेपी बुनकर, सीएमएचओ, राजसमंद

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
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