शिशोदा के श्री क्षेत्रपाल भैरूजी मंदिर में नारियल बंद करने पर श्रद्धालु-पुजारियों में तनातनी

शिशोदा के श्री क्षेत्रपाल भैरूजी मंदिर में नारियल बंद करने पर श्रद्धालु-पुजारियों में तनातनी

Laxman Singh Rathore | Publish: Jun, 17 2019 10:47:25 AM (IST) Rajsamand, Rajsamand, Rajasthan, India

पहले हटाई घंटी, अब नारियल बंद, बढ़ा गतिरोध और एसडीएम को शिकायत

राजसमंद. शिशोदा के श्री क्षेत्रपाल भैरूजी मंदिर में श्रद्धालुओं को नारियल नहीं चढ़ाने देने को लेकर रविवार को दिनभर पुजारियों से तनातनी होती रही। कतिपय पुजारी द्वारा पहले मंदिर से घंटियां हटा दी, जबकि अब नारियल बंद करने पर ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया। लोगों ने नाथद्वारा उपखंड अधिकारी निशा व तहसीलदार को शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की है।

भैरूजी मंदिर जीर्णोद्धार के तहत पुजारियों द्वारा पहले घंटियां हटा दी। इलेक्ट्रीक सेवा के संसाधन व ढोल भी हटवा दिया। इसके बाद रविवार सुबह से ही नारियल लेने से पुजारियों ने इनकार कर दिया और बिना चढ़ाए वापस लौटा दिया। इस पर श्रद्धालुओं ने एतराज जताया, तो पुजारी लड़ाई झगड़े पर उतारू हो गए। सुबह से शाम तक नारियल बंद करने पर श्रद्धालु व पुजारियों के बीच तनातनी व तकरार होती रही, मगर मंदिर में नारियल नहीं चढ़ाने दिए। घंटी, पूजा अर्चना के संसाधन, श्रीफल के रूप में चढऩे वाला नारियल, अगरबत्ती व प्रसाद चढ़ाने पर रोक लगाने को श्रद्धालुओं ने धर्म के खिलाफ बताते हुए उपखंड अधिकारी निशा को शिकायत की। इस दौरान महिपालसिंह चारण, सोहन कुंवर, हरिसिंह, हिमांशुसिंह, मोहनसिंह, हीरसिंह, कमली, पुष्पा कुंवर, रणजीतसिंह आदि ने नाथद्वारा तहसीलदार को ज्ञापन देकर पुजारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

घंटी, नारियल का धार्मिक महत्त्व
मंदिर के द्वार पर घंटी व्यक्ति की एकाग्रता, श्रद्धा का प्रतीक है। ईश्वर के द्वार हाजरी देने का ***** है और व्यक्ति की चेतना जागृत होती है। हिन्दू धर्म व धार्मिक ग्रंथों में घंटी का खास महत्त्व बताया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण में घंटी की आवाज से आस पास के क्षेत्र में जीवाणु, विषाणु व सूक्ष्म जीव दूर चले जाते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है। घंटी से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बताते हैं कि जब सृष्टि का प्रारंभ हुई, तब जो नाद गूंजी थी, वही आवाज घंटी बजाने में आती है। हिन्दू धर्म में नारियल को श्रीफल माना गया है। मंदिर में नारियल फोडऩा या चढ़ाने का रिवाज पुरातन है। धार्मिक महत्ता के साथ औषधीय फल भी है, जिसमें विटामिन, पोटेशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

जांच करवा कर करेंगे कार्रवाई
शिशोदा मंदिर में नारियल बंद करवा दिया है, तो इसकी जांच करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मंदिर मेंं भेंटपेटी लगाने व प्रशासन के अधीन लेने की कार्रवाई भी जल्द पूर्ण करवाई जाएगी।
निशा अग्रवाल, उपखंड अधिकारी नाथद्वारा

एकाग्रता, सकारात्मक भाव
घंटी की आवाज व्यक्ति को शांत व एकाग्र बनाती है और व्यक्ति का सीधे देवी-देवता के प्रति अध्यात्म भाव से सकारात्मक ऊर्जा आती है। इसी तरह नारियल को पवित्र फल माना गया है, जिसे हिन्दू धर्म में श्रीफल भी कहते हैं। यह हर पूजा में लिया जाता है। हर मंदिर में घंटी (नाद) व नारियल का खास महत्त्व है, जो युगों से है।
बाल योगी संतोषनाथ, आयता की धुणी

ईश्वर का प्रिय फल है नारियल
हिन्दू धर्म में नारियल को ईश्वर का प्रिय फल माना है। इसलिए इसे हर पूजा में लिया जाता है। मंदिर में घंटी देवो के आह्वान का प्रतीक है। धर्मग्रंथों के मुताबिक घंटी बजने से नकारात्मकता का हृास होता है, जिससे मंदिर में देव वास करते हैं। मंदिर से घंटी हटाना, नारियल बंद करना हिन्दू धर्म के विरुद्ध है।
संत मंगलमुखी, कांकरोली

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