कागजों में रह गई कृषि कार्य में सुगमता की बजट घोषणा - माहेश्वरी

- अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाया मुद्दा

राजसमंद. राजस्थान सरकार ने वर्ष 2019-20 के बजट में व्यापार में सुगमता की तरह कृषि कार्य में सुगमता एवं कृषक कल्याण कोष की घोषणा की थी। इस पर विधायक किरण माहेश्वरी ने अतारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार द्वारा इस घोषणा की क्रियान्विति में किए गए प्रयासों के बारे में सूचनाएं मांगी थी। प्रश्न पूछने को एक माह बाद भी सरकार द्वारा इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई।
विधायक ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण बजट घोषणा पर सरकार की शून्य उपलब्धि किसानों के प्रति संवेदनहीनता, बजट घोषणाओं के प्रति उदासीनता और थोथे वादों की कहानी दर्शा रही है। किसानों को फसली ऋण लेने में एवं कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए वित्त व्यवस्था करने में भारी दिक्कतें आती है। फसल बीमा में कृषि उपज में हुई क्षति के लिए दावे करने और दावों की राशि प्राप्त करना किसानों के लिए मैराथन दौड़ के समान है। कृषि उपज का सही मूल्य प्राप्त करना और बाजार के उतार-चढ़ाव से रक्षा करना भी एक दुष्कर कार्य है। कृषि भूमि का राजस्व अभिलेखों में सही संधारण करने, प्राकृतिक आपदा के समय कृषि उपज में हुई क्षति का सही आकलन करवाने और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसान कई समस्याओं का सामना करते हैं।
किरण ने कहा कि किसान कल्याण कोष द्वारा किसानों के बच्चों को शिक्षण प्रशिक्षण में सहायता, उन्नत कृषि विधियों को अपनाने में सहायता और आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार को वित्तीय सम्बल देने जैसे कार्यों की अपेक्षाएं थी, लेकिन कांग्रेस का लंबा इतिहास रहा है कि लोक लुभावन घोषणाएं करो और फिर उन्हें भुला दो। कृषि कार्य में सुगमता और किसान कल्याण कोष कांग्रेस की इसी संस्कृति में उलझ कर रह गए हैं।
विधायक ने कृषि मंत्री मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे कृषि कार्य में सुगमता की नीति की शीघ्र घोषणा करें। कृषक कल्याण कोष को परिचालन की स्थिति में लाएं। राजस्थान में सूखा, अतिवृष्टि और भूजल की कमी के कारण वैसे भी कृषि किसानों के लिए घाटे का व्यवहार बन गई है। उन्नत कृषि के व्यापक प्रचार-प्रसार और किसानों के जीवन स्तर में सुधार से ही राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रगति कर सकती हैं।
किरण ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने बजट में शून्य आधारित प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन देने की घोषणा भी की थी। यह घोषणा भी केवल घोषणा बनकर रह गई है। सरकार ने नैसर्गिक कृषि के लिए वर्ष भर में कोई भी प्रयास नहीं किए। बाजार में नैसर्गिक कृषि उत्पादों की भारी मांग है। नैसर्गिक उत्पादों का मूल्य भी अत्यंत आकर्षक है। गुजरात एवं महाराष्ट्र में नैसर्गिक कृषि अत्यंत लोकप्रिय हो रही है। इससे किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि होती है। किरण ने सरकार से नैसर्गिक कृषि के लिए भी एक समग्र नीति की बनाने की मांग की।

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
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