'पिपलांत्री से देश-दुनिया के गांवों के मुखियाओं को मिली नई दिशा'

राजसमंद जिले के तीसरे पद्मश्री श्यामसुन्दर पालीवाल से बातचीत

 

By: jitendra paliwal

Published: 26 Jan 2021, 10:32 AM IST

राजसमंद. बंजर पड़ी जमीन, मार्बल खनन से बर्बाद होते इलाके को 16 साल की अनथक मेहनत से सरसब्ज बनाने की मुहिम को आखिर एक और पहचान मिली। पिपलांत्री के पूर्व सरपंच श्यामसुन्दर पालीवाल को केन्द्र सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है। कैसे पिपलांत्री एक गुमनाम गांव से देश-दुनिया के नक्शे पर पहचाना जाने लगा और पर्यावरण संरक्षण के लिए अद्भुत उपलब्धियों के लिए छा गया, इसकी कहानी जानते हैं उन्हीं की जुबानी।

सवाल : कब शुरू हुआ यह सफर?
मैं जब 2005 में सरपंच बना तो अकाल पड़ा हुआ था। हर तरफ पानी की समस्या थी। सूखे पहाड़, बंजर जमीनें और हैरान-परेशान जनता थी। हमने अकाल राहत में काम के बदले अनाज योजना के तहत लोगों को लाभ देकर उन्हें प्रेरित किया। धीरे-धीरे सरकारी योजनाओं से उन्हें जोड़ा और तस्वीर बदलती गई।

सवाल : किसको श्रेय देंगे इस सफलता के लिए?
केन्द्र व सरकार की योजनाएं, मसलन अकाल राहत कार्य, वॉटरशेड, मुख्यमंत्री जलस्वावलम्बन अभियान और ऐसी ही कई विभिन्न प्रकार की योजनाओं, सरकार के सहयोग व मेरे गांव के लोगों की सहभागिता को इसका पूरा श्रेय जाता है।

सवाल : क्या बदला इस डेढ़ दशक में, जो पिपलांत्री मशहूर हुआ?
आज 2400 हैक्टेयर में हरियाली बिछी हुई है। चरागाह, बरसाती नाले, आंगनबाड़ी केन्द्र, रोड साइड, माइनिंग के डम्पिंग यार्ड, जब जगह पौधे लगाकर संरक्षण किया। आमतौर पर विरोध करके खदानें बंद करवा दी जाती है। हमने यह नहीं किया। खान विभाग को साथ और विश्वास में लेकर बड़े स्तर पर काम करवाए।

सवाल : रोजगार से कैसे जोड़ा लोगों को?
आज साढ़े तीन से चार लाख पौधे पेड़ बनकर खड़े हैं। इनमें नीम, शीशम, बरगद, आम, आंवला, बांस, अर्जुन, जामुन और अन्य कई किस्म के पेड़ हैं। हमने एलोविरा उगाए। जीवनदायिनी प्राकृतिक वातावरण से लोगों को जोड़ा कि वह रोजगार का भी जरिया बन गया। हमने बेटियों, चरागाह, पेड़, पानी, वन्यजीवों को बचाया।

सवाल : 111 पेड़ लगाने की शुरुआत कैसे हुई?
2006 में मेरी बेटी किरण का निधन हो गया। उस दिन से हमने एक प्रथा शुरू की। गांव में हर एक बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाएंगे। वह संकल्प आज लाखों पेड़ों के रूप में फलित हो रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत हमने उनकी शिक्षा के लिए भी आर्थिक मदद जुटाई।

सवाल : पिपलांत्री अब कितना बदल रहा है?
पिछले कुछ समय से यह पर्यटन, शिक्षा और अनुसंधान का भी केन्द्र बन गया है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी आते हैं, देश व विदेशी कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी दो-तीन माह रुककर अनुसंधान करते हैं। अन्ना हजारे, वॉटरमैन राजेन्द्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, महाराष्ट्र के 32 एमएलए-एमपी, कई राज्यों के मंत्री, नामीबिया सरकार के प्रतिनिधि भी यहां आए।

सवाल : किताबों में पिपलांत्री पढ़ाया जा रहा, कैसा लगता है?
राजस्थान, असम, बंगाल व अर्जेंटीना के स्कूली पाठ्यक्रम में मेरी पंचायत की सफल कहानी का शामिल होना खुशी देता है। अमरीका में अभी एक पुस्तक छपी है, जिसका नाम है 111 ट्री। यह जापानी भाषा में भी प्रकाशित होगी। मलयालम भाषा फिल्म व अन्य भाषाओं में कई डॉक्यूमेंट्री बनी।

सवाल : पिपलांत्री मॉडल कैसे काम कर रहा है?
खुशी है कि नई पीढ़ी मेरी पंचायत से सीख रही है। सरपंच सबसे ज्यादा प्रेरित हैं। उन्हें नई दिशा मिली है कि सड़क, नाली के अलावा भी कुछ अलग काम करेंगे। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पंचायत में सरकार ने वॉटरशेड ट्रेनिंग सेंटर खोला। पिपलांत्री में एक्सईएन, एईएन, जेईएन के पद अलग से स्वीकृत हैं। यहां जलग्रहण कार्यों की ट्रेनिंग दी जाती है।

jitendra paliwal
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned