'सलोदा' गांव से खौफ खाता है कोरोना

- ग्रामीणों की सजगता व वॉरियर्स की मेहनत ने रखा महफूज

By: Rakesh Gandhi

Published: 22 Jun 2020, 03:23 PM IST

गिरीश पालीवाल

खमनोर. जिले में पहला कोरोना पॉजिटिव खमनोर ब्लॉक के करौली गांव का एक युवक पाया गया था और मुंबई से साथ लौटा ***** भी अगले ही दिन संक्रमित मिला। इस खबर से सलोदा गांव में खौफ का माहौल बन गया था, क्योंकि करौली के युवक की सास यानि थामला के युवक की मां अपने बेटे से मिलने सलोदा पीहर से ससुराल थामला जा पहुंची थी। इसके बाद वह सलोदा लौटी तब तक उसे संक्रमण का बिल्कुल अंदाजा नहीं था। पहले करोली, फिर थामला के युवक की भी पॉजिटिव रिपॉर्ट आने पर प्रशासन अलर्ट हो गया। चिंतित सलोदा गांव के ग्रामीणों ने यहीं से जंग की शुरुआत करते हुए कोरोना को गांव में न घुसने देने के लिए कमर कस ली। इसके बाद ग्रामीण चौकस रहे, वॉरियर्स ने 24 घंटे सेवाएं दी। आज ये ही वजह है कि ये गांव महफूज रहा। पास के गांव में दो पॉजिटिव केस आए, लेकिन कोरोना सलोदा गांव की दहलीज नहीं छू पाया। ग्रामीण आज भी इस संकट को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरतते।

ऐसे की तैयारी
साढ़े तीन हजार की आबादी व तीन राजस्व गांवों से मिलकर बनी सलोदा ग्राम पंचायत अपने लोगों की जागरुकता व केंद्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन की अक्षरश: पालना के चलते कोरोना महामारी से बचे हुए हैं। गांव के सरपंच वरदा गमेती, ग्राम विकास अधिकारी अनिता डामोर ने पंचायत के सभी सदस्यों, कार्मिकों व स्वयंसेवकों की टीम बनाकर गांव को सेनेटाइज करना, मास्क वितरण करना, जरुरतमंदों को राशन पहुंचाना जैसे कामों को अंजाम देना शुरू कर दिया। ये भी ख्याल रखा कि किसी भी बस्ती में कोई गरीब भूखा ना सोए। साथ ही वास्तविक जरुरतमंदों तक सरकारी सहायता पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

क्वारंटीन में कोई समझौता नहीं
पीईओ प्रेमशंकर माली ने शिक्षकों की टीम की मॉनिटरिंग करते हुए मुंबई, गुजरात व अन्य प्रदेशों से आने वाले प्रवासियों को संस्थागत व होम क्वारंटीन कराने में समझौता नहीं किया। कहीं समझाइश तो कहीं सख्ती भी दिखाई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी संदीप थौरी व स्वास्थ्यकर्मियों ने टीम ने घर-घर जाकर सर्वे किया। सर्दी, खांसी, जुकाम जैसे समान लक्षणों वाले मरीजों को जांच के लिए भी भेजा। पुलिसकर्मियों ने दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाई व ग्रामीणों से समझाइश का काम किया। ऐसे में ग्रामीणों ने भी पूरे समय घर में रहना ठीक समझा। परिवार का एक सदस्य गाय, भैंस, बकरी व अन्य पालतु मवेशियों के चारा-पानी का बंदोबस्त करने जाता, तो महिलाओं ने परिवार की देखभाल और खेती-बाड़ी जैसे कामों को पूरा किया।

युवाओं ने संभाली कमान
थामला के कोरोना पॉजिटिव युवक के संपर्क में आई मां के सलोदा आने पर गांव में संक्रमण की आशंका बनने पर युवाओं ने अपने स्तर पर गांव की सीमाओं को सील कर दिया। युवाओं की टीम 24 घंटे गांव की सीमा पर निगरानी करती रही। गांव की सीमा में होकर गुजरने वाले हर व्यक्ति का रिकार्ड रखा गया। संदिग्ध व अनजान लोगों को प्रवेश नहीं दिया। युवाओं ने स्थानीय व प्रवासी समाजसेवियों की मदद से राशन खरीदकर जरूरतमंदों तक पहुंचाया व स्कूल में बने क्वारंटीन सेंटर में ठहरे प्रवासियों के भोजन की भी व्यवस्था संभाली।

बस एक-दूजे के लिए काम आते गए
गांव में आमतौर पर परस्पर सहयोग और एक दूसरे के काम आने की जो संस्कृति रही है, लॉकडाउन में उसका भी महत्व उभरकर सामने आया। महामारी के संकटकाल में छोटे से छोटे काम और बड़ी से बड़ी जरूरतों को लेकर एक-दूजे के काम आए। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क के उपयोग व सतर्कता लगातार बनाए रखने की अभी भी उतनी ही जरूरत है।
- शंकरलाल गायरी, वार्ड पंच सलोदा

लोगों को संकट से लडऩे की शक्ति मिली
समाजसेवा की भावना से लोगों ने जरूरतमंदों की जो मदद की है, उससे आम लोगों को कोरोना संकट से लडऩे की शक्ति मिली। इस लड़ाई में अत्यधिक ऊर्जा, समर्पण की जरूरत थी, जिसमें गांव के युवाओं ने अग्रणी होकर कंधे से कंधा मिलाया और गांव को कोरोना मुक्त रखने में सहयोग किया।
- लक्ष्मीलाल जैन, ग्रामीण

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