कहीं नेगेटिव होने के बाद तो अस्पताल नहीं पहुंच रहे मरीज!

जिले में पांच दिनों में नेगेटिव हो रहे थे मरीज अब पांच से छह दिन बाद आ रही रिपोर्ट
-कोरोना वायरस से निपटने के लिए पोची है व्यवस्था
2500 से ज्यादा रिपोटर्स पेंडिंग, औसत 600 की हो रही सैम्पलिंग, 400 की आ रही रिपोर्ट

By: Aswani

Published: 26 Aug 2020, 01:21 PM IST

अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. जिले में कोरोना वायरस का कहर दिनों-दिन बढ़ रहा है। रोजाना 20 से 25 मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है अब व्यवस्थाओं की खामियां खुलकर सामने आ रही है। जिले में वर्तमान में आम आदमी की कोरोना जांच रिपोट्र्स 5 से 6 दिन के बाद आ रही है। जबकि राजसमंद जिले में पूर्व में पांच से छह दिनों में मरीज पॉजिटिव से निगेटिव हो रहे थे, ऐसे में बड़ा सवाल यह है की कहीं रिपाट्र्स के चक्कर में मरीज घरों में ही पॉजिटिव से नेगेटिव होकर अस्पताल तो नहीं जा रहे हैं? ऐसे में जिले में एकबार पुन: जांच रिपोटर्स और सैम्पलिंग की समीक्षा की जरूरत है।

केस- एक
17 अगस्त को युवक का सैम्पल लिया गया। २५ अगस्त तक उसकी जांच रिपोट्र्स नहीं आई। इस पर 25 को दिन में उसने दोबारा सैम्पल दिया। तभी २५ की शाम को ही युवक रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। यानि करीब 9 दिन बाद उसकी रिपोर्ट आई। अगर यह रिपोर्ट पॉजिटिव होती तो शायद वह तो पूरी तरह ठीक हो चुका होता। तब उसे अस्पताल में भर्ती करवाया जाता। जिले में ऐसे रोजाना दर्जनों मामले आ रहे हैं। जिनकी जांच रिपोटर्स पांच दिन बाद आती है। ऐसे में वे जब पॉजिटिव होते हैं तब घर में रहते हैं और जब उनके नेगेटिव होने का समय आता है तब उन्हें अस्पताल या कोविड केयर सेंटर्स में भर्ती किया जा रहा है।


केस-२
माटा मोहल्ला क्षेत्र के निवासी ने १४ अगस्त को सैम्पल दिया। उसके साथ उसके परिजनों ने भी जांच करवाई। जांच रिपोर्ट तीन दिन बाद १७ तारीख को आई। जिसमें युवक पॉजिटिव और घर के सभी सदस्य नेगेटिव आए। सैम्पल देने के बाद तीन दिनों तक वह परिवार के साथ रहा। ऐसे में संभव है कि परिजनों को भी संक्रमण फैला हो, लेकिन चूंकि उनका सैम्पल पहले ले लिया गया था इसलिए दोबारा सैम्पलिंग नहीं हुई। बाद में युवक को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। दो दिन बाद उसका दूसरा सैम्पल लिया गया। करीब पांच दिन बाद उसकी दूसरी रिपोर्ट नेगेटिव आई तब जाकर उसे अस्पताल से छुट्टी मिली। ऐसे में संभव है कि जब वह अस्पताल गया था तब ही वह नेगेटिव हो चुका हो, और अस्पताल में उसे बिना वजह ही सात दिन भर्ती रहना पड़ा।

गाइड लाइन में भी तीन दिन
अभीतक कोरोना की जो गाइड लाइन हैं उसमें पहली रिपोर्ट पॉजिटिव आने के तीन दिन बाद दूसरी रिपोर्ट लेने का नियम है। इसका यही कारण है कि तीन दिन कई मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हो जाते हैं। लेकिन जब पहली जांच रिपोट्र्स ही समय पर नहीं आएगी तो, सही मरीजों की पहचान कैसे होगी?

जांच पर भी उठ रहे सवाल!
अब लोग जांच रिपोट्र्स पर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कुछ लोगों की जांच रिपोट्र्स जल्दी आ जाती है, कुछ की लम्बे समय तक नहीं आती और जो रिपोट्र्स जल्दी आ रही हैं उनमें पॉजिटिव मरीजों की संख्या ज्यादा होती है। जिसकी रिपोर्ट अटक जाती है, यानि देर से आती है उनकी नेगेटिव आती है। ऐसे में लोग रिपोट्र्स की गुणवत्ता में भी सवाल खड़े कर रहे है। हकीकत भले कुछ हो लेकिन सवाल गम्भीर है। और हों भी क्यों न क्योंकि जिले के आंकड़े बताते हैं कि यहां रोजाना औसत 600 सैम्पल लिए जा रहे हैं, रिपोर्ट औसत 400 सैम्पलों की ही आ रही हैं। यानि रोजाना 200 रिपोट्र्स पेंडिंग हो रही हैं। पेंडिंग का आंकड़ा 2500 को पार कर गया है। ऐसे में अगर एक तरफ से जांच हो तो रिपोर्ट छह दिन बाद आनी चाहिए, फिर कुछ लोगों की तीन दिन में और कुछ की ७ दिन बाद भी नहीं आ रही। ऐसे में सवाल उठने लाजमी तो हैं।


जिले में पांच दिन में नेगेटिव हुए मरीज
२५ अप्रेल को जिले में कोरोना का पहला मामला सामने आया था। युवक करोली गांव का था। पांच दिन बाद ही युवक दूसरी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। इसीतरह देलवाड़ा की नेगडिय़ा पंचायत के रठुंजणा के 20 वर्षीय युवक ने भी सिर्फ पांच दिनों में कोरोना को मात दे दी थी। हालांकि इन्हें तबके नियमों के तहत बाद में छुट्टी दी गई थी।


पता करवाएं...
हां ये सही है कि कुछ लोगों की रिपोट्र्स फंसी है। अब उदयपुर में भी जांच करने की लिमिट है। अब किसी की तीन दिन में और किसी की सात दिन में रिपोर्ट आ रही हैं तो इसबात का पता करवाया जाएगा।
-डॉ. राजकुमार खोलिया, डिप्टी सीएमएचओ राजसमंद

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