ARBITRARY : लालच के आगे कायदे दरकिनार, छोटी मछलियां भी नहीं छोड़ रहे ठेकेदार

ARBITRARY : लालच के आगे कायदे दरकिनार, छोटी मछलियां भी नहीं छोड़ रहे ठेकेदार

laxman singh | Publish: Feb, 15 2018 10:56:34 AM (IST) Rajsamand, Rajasthan, India

सोपरी बांध में मत्स्याखेट में नियमों की पालना नहीं

देवगढ़. नगर के मुख्य पेयजल स्त्रोत सोपरी बांध में विभाग ने मछलियां पकडऩे का ठेका दे रखा है, लेकिन ठेकेदार नियम को ताक में रखकर तय मापदण्ड से काफी छोटी मछलियों को भी भारी मात्रा में पकड़ रहे हैं। इससे तालाब के जलवायु पर विपरीत प्रभाव पडऩे के साथ ही मछलियों का जीवन चक्र भी प्रभावित होने की आशंका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ठेकेदार एक तय मापदण्ड के अकार या करीब आधा किलो से कम वजन की छोटी मछली नहीं पकड़ सकते, वहीं मछलियां पकडऩे में चक्की जाल पर रोक होने से उसका उपयोग नहीं कर सकते और मछलियों को खुले में डालकर सुखाने पर भी पाबंदी है। इसके बावजूद देवगढ़ में ठेकेदार न सिर्फ तय मापदण्ड से छोटी मछलियां पकड़ रहे हैं, बल्कि अन्य सभी नियमों की भी अवहेलना कर रहे हैं। इसके तहत ठेकेदार द्वारा यहां सोपरी बांध से काफी छोटे आकार की मछलियां पकड़ी जा रही है और उन्हें खुलेआम बांध की पाल और पेटे में ही सुखाया भी जा रहा है। वहीं, ठेकेदार द्वारा नीले रंग के प्रतिबंधित चक्की जालों का का उपयोग भी किया जा रहा है। इसको लेकर सूचना मिलने पर राजस्थान पत्रिका ने मौके पर पहुंचकर इस अवैध कार्यवाही को कैमरे में भी कैद किया। इस दौरान ठेकेदार द्वारा मात्र 5 से 50 ग्राम वजन की मछलियों को भी पकडक़र सुखाया जा रहा था।

सोपरी बांध में इन प्रजातियों की है मछलियां
सोपरी बांध में चाल पु_ी, राउ, कतला, टाइगर, सिंगाड़ा, मुराकी एवं गोल्डन का बच्चा आदि मछलियां है।

छोटी मछलियों की मांग से काट रहे चांदी
मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि आधा किलो से कम वजन की छोटी मछलियों की बड़े शहरों एवं विदेशों में काफी मांग के चलते इन्हें पकड़ कर एवं सुखाकर बाहर भेजा जाता है, जिससे उन्हें खासा मुनाफा मिलता है। बताया गया कि यहां से ठेकेदार इन छोटी मछलियों को बोरों में भरवाकर गोरखपुर, दिल्ली तक भेजते हैं, जहां से आगे विदेशों तक जाती है।

इस मामले की जानकारी लेकर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
अनिल जोशी, मत्स्य विकास अधिकारी, राजसमंद

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