BREAKING : बिजली के झटके ने दिया जिन्दगीभर का दर्द : अब आहत ने मांग ली इच्छामृत्यु की अनुमति

करंट से युवक के शरीर का आधा हिस्सा हो चुका है बेकार

By: laxman singh

Published: 22 Aug 2017, 01:19 PM IST

राजसमंद/आईडाणा. यूं तो जिले में बिजली जनित हादसों में कई लोग झुलसे और उनके किसी न किसी अंग को नुकसान पहुंचा, लेकिन लगभग तीन वर्ष पुराने एक मामले में तो युवक का आधा शरीर इस तरह बेकार हो गया है कि वह पूरी तरह से दूसरों का मोहताज हो गया है। उसके इलाज को लेकर काफी प्रयास किए गए, लेकिन कहीं से सफलता नहीं मिल पाई। ऐसे में वह जिन्दगी से पूरी तरह से निराश हो चुका है और अब इच्छा मृत्यु चाहता है, जिसको लेकर उसने स्वीकृति के लिए गुहार लगाई है।


यह मामला है आमेट निवासी दिनेश सोनी (24) का, जिसे 13 मई 2014 को करंट लगा और उसके बाद से जिन्दगी पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो गई। हादसे में आमेट के वाली रोड स्थित जमनालाल सुथार के मकान की पहली मंजिल पर सोनी का परिवार किराये पर रहता था। वहीं दिनेश नीचे ही स्थित दुकान पर कार्य करता था। 13 मई 2014 को किसी कारणवस मकान के पास में लगा होर्डिंग गिरा, जो मकान के पास से गुजर रही 11 हजार वोल्टेज की विद्युत लाइन एवं मकान की बालकनी में लगी लोहे की रेलिंग को छू गया। इससे करंट रेलिंग में प्रवाहित होने से दिनेश की मां अयोध्या देवी (43) व दादी मोहनी देवी (75) एवं दिनेश उसकी चपेट में आ गए।हादसे में मोहनी देवी की मौके पर ही मौत हो गई और अयोध्या देवी बुरी तरह से झुलस गई, जिसने थोड़ी देर बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं, दिनेश करंट के झटके से मकान की पहली मंजिल से करीब बीस फीट ऊंचाई से जमीन पर गिर गया, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और पांव झुलस गए। इससे उसके शरीर के नाभि के नीचे का हिस्सा बेकार हो गया। ऐसे में वह अब दूसरों के सहारे जिन्दगी गुजार रहा है।
संवेदनहीन जन प्रतिनिधि एवं अधिकारी
इस भीषण हादसे के बाद एक बार भी न जनप्रतिनिधियों ने उसकी सुध ली और ही कोई सरकारी नुमाइंदा ही उसके पास पहुंचा।


न सहायता और न ही मिली इच्छा मृत्यु की अनुमति
दिनेश ने अपनी रीढ़ की हड्डी के इलाज को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसी वर्ष 21 अप्रेल को पत्र लिखा, जिस पर उसकी फाइल अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली को भेजी। एम्स में जांच के बाद वहां से भी उसके इलाज में असर्मथता जताई गई। इसके बाद पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होने के कारण पीडि़त दिनेश जीवन से पूरी तरह से हताश हो गया। इसके चलते 4 जुलाई 2017 को उसने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिख आजीवन गुजारा भत्ता, इलाज खर्च की राशि एवं सरकारी नौकरी उपलब्ध करवाने एवं नगर पालिका आमेट को भी पत्र लिखा। इसमें यह भी लिखा गया कि अगर उसे कोई सहायता देने में सरकार असमर्थ हो तो कम से कम उसे इच्छा मृत्यु की अनुमति तो अवश्य प्रदान कर दी जाए। लेकिन, इसके बाद भी सरकार की ओर से अब तक किसी ने पीडि़त की सुध नहीं ली है।


इलाज में खर्च हो गई परिवार की बचत राशि
पीडि़त के उदयपुर एवं अहमदाबाद में इलाज करने सहित इवाइयों में करीब 15 लाख रुपए से अधिक राशि खर्च हो चुकी है। वहीं, प्रतिमाह करीब दस हजार से अधिक की दवाई लगती है, जो बाजार से खरीदनी पड़ती है। इससे परिवार गम्भीर आर्थिक संकट में फंस गया है। दिनेश के पिता का पूर्व में ही निधन हो चुका है। ऐसे में स्थिति यह है कि उसे घर का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा है।

laxman singh Reporting
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