Video : हर कोई चाह रहा था, बेटियों को गोद में लेकर कुछ देर खिलाएं

- बेटियों के नाम पर पिपलांत्री में अनूठा आयोजन
- इस वर्ष जन्म लेनी वाली बेटियों के नाम पर लगाए पौधे

By: Rakesh Gandhi

Published: 01 Aug 2020, 08:20 AM IST

राजसमंद. कुछ माह पूर्व जन्मी बेटियों की अपनी मां के साथ उनके अनूठे अंदाज में होती बातचीत से वहां मौजद हर कोई भावविभोर था। वहां मौजूद लोगों की एक पल वहां से नजर नहीं हट रही थी। वातावरण बहुत ही ममतामयी बन हुआ था। हर किसी का मन कर रहा था कि इन मासूम बेटियों को गोदी में लेकर कुछ देर खिलाए। पर कोरोना महामारी को देखते हुए ये दुलार मन में ही समेटना पड़ा। टोकरियों में कृष्ण की भांति लेटी बेटियां आयोजन को विशिष्ट बना रही थी। ये अवसर था पिपलांत्री ग्राम पंचायत मुख्यालय का, जहां इस वर्ष जन्मी 30 बेटियों के नाम पर शुक्रवार को पहाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए।

पिपलांत्री ग्राम पंचायत के तत्वावधान में चौदह साल पहले शुरू हुए बेटियों के नाम पौधे लगाने के काम को अब देश की कई पंचायतें अपना चुकी है। लोग अब बेटियों के जन्म के बाद उनके नाम पर बड़ी संख्या में पौधे लगाने लगे हैं। यहां कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए नियम कायदे की पालना करते हुए सादगीपूर्ण तरीके से एक अनौपचारिक कार्यक्रम रखा गया, जिसमें महिलाएं इस साल जन्मी अपनी बेटियों के साथ मौजूद थी। पिपलांत्री ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कोई बड़ा हुजूम नहीं था, बल्कि बेटियों के साथ उनकी मां व पिता तथा इसके अलावा उनकी सहायता के लिए कार्यकर्ता मौजूद थे। सरपंच अनिता पालीवाल ने कहा कि ऐसे आयोजन से बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। हर पंचायत मुख्यालय पर ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए।

अलग हटकर था आयोजन
कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि माताएं अपनी कुछ माह की बेटियों के साथ एक निश्चित दूरी बनाकर बैठी थी। वहां से गुजर रहा हर कोई इस तस्वीर को अपने मोबाइल से कैमरे में कैद कर रहा था। कुछ देर बाद वहां उदयपुर से आए मुकेश भाट व उनके परिजनों ने बच्चों व बड़ों के लिए कठपुतली का खेल दिखाकर बेटी बचाने की प्रेरणा दी। उन्होंने पेड़-पौधों के लिए भी अच्छा संदेश वहां उपस्थित लोगों को दिया। इस दौरान उज्जैन व जयपुर के उन कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया, जिन्होंने बेटियों व अन्य समाजोपयोगी काम में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

'बेटियों को देखकर सुकून मिलता है'
जलग्रहण समिति पिपलांत्री के अध्यक्ष व पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल ने पत्रिका को बताया, 'वर्ष 2006 में बिटिया किरण के आकस्मिक निधन के बाद मैं बैचेन हो गया था। उसकी याद में कुछ न कुछ नया करने की सोच रहा था कि ये सब रूपरेखा बनती गई। आज देखते-देखते चौदह साल हो गए। हर साल हम गांव में जन्मी हर बेटी के नाम पर 101 पौधे लगाते हैं। हमने बेटी, पानी, पेड़, वन्य जीवों व गोचर को बचाने के काम को मिशन बना लिया। आज अच्छा लगता है जब देशभर के लोग यहां आकर देखते हैं और इसे अपनाने का संकल्प लेते हैं। राखी के उपलक्ष्य में पेड़ों को राखी बांधने की परम्परा भी है। हमने किरण निधि योजना भी बनाई। हर बेटी के नाम पर जनसहयोग से 21 हजार रुपए जमा कराए जाते हैं। इसके अलावा बेटी के परिजन अपनी क्षमता अनुसार इसमें राशि जोड़ देते हैं। इस तरह एक निधि उस बिटिया के नाम बन जाती है, जो उसके भविष्य में काम आएगी। मैं सरपंचों को प्रकृति आधारित रोजगार की तरफ ले जाने के लिए प्रेरित करने का कार्य भी करता हूं। हर गांव में हजारों बीघा सरकारी चरागाह जमीनें हैं, हम वहां फलदार व इमारती पौधे लगाकर पंचायतों की आय बढ़ा सकते हैं।'

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
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