नियमों में खामी, बीमा के नाम पर ठगे जा रहे किसान

कम्पनी प्रीमियम लेती है एक-एक खेत का और क्लेम देती क्षेत्र के अनुसार हुए खराबे का

By: Aswani

Updated: 03 Jan 2020, 08:33 PM IST

राजसमंद. फसल बीमा योजना के नियम किसानों के साथ ठगी कर रहे हैं। बीमा की प्रीमियम राशि तो किसान से प्रत्येक खेत में बोई गई अलग-अलग फसल के अनुसार एक-एक किसान से ली जाती है, लेकिन जब खराबा होता है और क्लेम देने का नम्बर आता है, तो कम्पनी पूरे उपखंड मुख्यालय के खराबे का आकलन करती है और उस हिसाब से हुए खराबे का क्लेम महीनों बाद किसान को चुकाती है। ऐसे में कई बार पाला पडऩे और खंड बारिश व अन्य कारणों से पूरे ब्लॉक में नुकसान नहीं होता और खेत का बीमा होने के बाद भी किसान को कम्पनी कोई क्लेम नहीं देती। ऐसे में खराबा होने के बाद भी किसान पुनर्भरण के दायरे में नहीं आ पाते जिससे किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ती है।


नहीं मिल पाता पुनर्भरण
बीमा कम्पनी अलग-अलग फसलों पर बीमे का क्लेम पास करती हैं, जिसमें रबी की अधिकतर फसलों में 80 फीसदी तथा खरीफ में अलग-अलग जैसे मक्का की फसल में 90 फीसदी खराब होने पर उस वर्ष की तय फसल राशि के अनुसार प्रति हैक्टेयर की दर से, ज्वार में 80 फीसदी पर, ग्वार में 90 फीसदी पर, कपास में 80 फीसदी पर पूरा क्लेम दिया जाता है। खराबे का आकलन ब्लॉक स्तर पर होने से ज्यादातर खराबे का प्रतिशत 50 से 60 फीसदी पर ही सिमट कर रह जाता है, जिससे बीमा धारक किसान की पूरी फसल खराब होने पर भी उसे मामूली क्लेम राशि ही मिलती है।


ऐसे देती है कम्पनी क्लेम
उदाहरण के तौर पर एक ब्लॉक में ६ हजार हैक्टेयर भूमि पर खेती हुई, पाले या खंड बारिश से ३ हजार हैक्टेयर की सतप्रतिशत फसल खराब हो गई और ३ हजार हैक्टेयर पर कोई खराबा नहीं हुआ। अब कम्पनी औसत खराबा ५० फीसदी मानती है और खराबे वाले किसानों को महज ५० प्रतिशत खराबे का क्लेम ही दिया जाता है।


जिले में औसत 35 हजार किसान करवाते हैं फसलों का बीमा
राजसमंद जिले में रबी और खरीफ की दोनों प्रमुख फसलों में औसत ३५ हजार बीमा होते हैं। यहां खरीफ 201९ में २०६५२ किसानों ने बीमा करवाया जबकि वर्ष २०१८-१९ में रबी की फसल में १३९५४ किसानों ने बीमा करवाया। अभी रबी की फसल के किसानों की संख्या आनी बाकी है।


महीनों बाद मिलता है क्लेम
फसलों में खराबा होने पर पहले पूरे क्षेत्र की गिरदावरी होती है, उसके बाद प्रशासन रिपोर्ट तैयार करवाता है। कई महीनों बाद बीमा कम्पनी किसान को क्लेम की राशि देती है।
सरकार तय करती है नियम...
बीमा कम्पनी ब्लॉक स्तर पर ही खराबे का क्लेम औसत निकाल कर तय करती है। अब उनके नियम में यही है, बीमा की शर्तें सरकार स्तर पर तय होती है।
-भूपेंद्रसिंह राठौड़, उपनिदेशक कृषि, राजसमंद

Aswani Reporting
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