श्रीनाथजी पीठ-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शिलान्यास अगले माह

मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के परिसर का हो रहा है विस्तार, राज्यपाल, श्रीनाथजी मंदिर के तिलकायत, विधानसभा अध्यक्ष और उच्च शिक्षा मंत्री होंगे अतिथि

By: jitendra paliwal

Published: 11 Sep 2021, 10:09 PM IST

राजसमंद. जिले के देलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र के डाबियों का गुड़ा में मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, उदयपुर की ओर से स्थापित की जा रही श्रीनाथजी पीठ व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शिलान्यास अगले माह होगा। पीठ के लिए जमीन का आवंटन पिछले दिनों हो चुका है। भू-रूपांतरण व सुविवि को जमीन के कब्जा सुपुर्दगी की कार्यवाही भी पूरी हो चुकी है।

कुलपति डॉ. अमेरिका सिंह ने बताया कि शिलान्यास समारोह में कुलाधिपति व राज्यपाल कलराज मिश्र, श्रीनाथजी मंदिर के तिलकायत राकेश महाराज, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी और उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने न्योता स्वीकार कर लिया है।
कुलपति ने बताया कि विवि को सरकार की ओर से जो जमीन दी गई है, उसके पट्टे का नामान्तरण विवि की खातेदारी में हो चुका है। इसकी प्रतिलिपि विवि प्रशासन को मिल चुकी है। डाबियों का गुड़ा में कुल 5.8929 हैक्टेयर भूमि आवंटित की गई है, जहां श्रीनाथजी पीठ और एक्सीलेंसी सेंटर बनकर तैयार होगा।

यह है योजना
श्रीनाथजी पीठ, नाथद्वारा में वैष्णव तीर्थ के साथ ज्ञान तीर्थ के रूप में भी विकसित किया जाएगा। श्रीनाथजी मंदिर से जुड़ी धार्मिक, प्राचीन परम्पराओं, कला-संस्कृति और वैदिक ज्ञान को अकादमिक तौर पर प्रसारित करने की यह योजना है। नाथद्वारा आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं, जिज्ञासुओं और विद्यार्थियों को वैष्णव धर्म-दर्शन के अकादमिक पहलुओं को जानने-समझने और सीखने के साथ सर्टिफिकेट, डिग्री, डिप्लोमा अर्जित करने का मौका मिलेगा। पुष्टिमार्गीय कला, साहित्य, शिल्प, संगीत और संस्कृति से संबंधित अकादमिक गतिविधियों के लिए श्रीनाथजी पीठ का समर्पित प्रभाग होगा। यहां की वाचिक-परंपरा, लिखित-परंपरा, चित्रकला, नृत्य-अभिनय आदि कलागत प्रतिरूपों का संरक्षण भी हो सकेगा। श्रीमद्भागवत, श्रीमद्भगवद गीता, श्रीवैष्णव परंपरा, वैदिक ज्योतिष, कर्मकांड, पौरोहित्य, देवस्थान और देवालय प्रबंधन, तीर्थ पर्यटन और प्रबंधन, मंदिर पूजापद्धति एवं अर्चनविधान आदि से जुड़े रोजगारमूलक पाठ्यक्रम से स्वरोजगार और स्वावलंबन को प्रोत्साहन मिलेगा।

ये भी होंगी खास आकर्षण
नाथद्वारा की सांझी और चित्रकला शैली के साथ मोलेला की मृणशिल्प कला अपने आप में विश्व विख्यात है, जिसका अकादमिक पाठ्यक्रम बनाकर अध्यापन कराया जाएगा।
नाथद्वारा की संगीत शैली : वैष्णव कीर्तन परम्परा से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होंगे। रोजगार मूलक पाठ्यक्रम डिजाइन कर संचालित किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए स्थानीय कलाकारों, चित्रकारों, शिल्पियों, विद्वानों को बतौर अतिथि संकाय आमंत्रित भी किया जाएगा।
वैष्णव भक्ति परम्परा और वैदिक अध्ययन : महाप्रभुजी के व्यक्तित्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन दर्शन के लिए उनके योगदान को पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाएगा। महाप्रभु वल्लभाचार्य, गोसांई वि_लनाथ जी और अन्य परवर्ती आचार्यों-विद्वानों के साहित्य पर अकादमिक पाठ्यक्रम संचालित होंगे। महाप्रभु वल्लभाचार्य की 84 बैठकों की परंपरा में लिखे संस्कृत, बृज और हिंदी और गुजराती भाषा के समग्र साहित्य का अध्यापन होगा।
पुस्तकालय : भारतीय धर्म, दर्शन और भक्ति परंपरा के सबसे समृद्ध पुस्तकालय का विकास होगा। नाथद्वारा, कोटा, कांकरोली, गोकुल, कामा, सूरत आदि स्थानों पर रचित साहित्य का सरल भाषा में अनुवाद कर वर्चुअली प्रसारण किया जाएगा। देश-दुनिया के भारतविद्यानुरागी लोग पुष्टिमार्ग, वेदांत ब्रह्मसूत्र, स्तोत्रवल्लरी, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीमद्भागवत आदि भक्तिरसपीयूष पूरित पाठ्यग्रंथों का अकादमिक अनुशीलन करेंगे।

इमारत में होंगी ये सुविधाएं
प्रशासनिक भवन
अकादमिक भवन
विशाल सभागार
म्यूजियम
पुस्तकालय
स्टूडियो
अतिथि ग्रह, कोटेजेज
आवासीय परिसर
पुष्पवाटिका, उद्यान तथा जलाशय

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