Video : रमणीक स्थलों से खुलेंगे समृद्धि के द्वार

- जिला परिषद का अनूठा प्रयास
- 75 से अधिक पर्यटन स्थल चिन्हित

- राजस्थान पत्रिका के अभियान व खबरों के परिणाम आने लगे सामने

By: Rakesh Gandhi

Published: 30 Sep 2020, 06:04 AM IST

राजसमंद. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में फैली अरावली पर्वतमाला की गोद में इतनी अकूत रमणीय सम्पदा है, जिन्हें जिले का एक विशेष पर्यटन सर्किट बनाकर देसी-विदेशी पर्यटकों को रिझाया जा सकता है। ऐसे कई तालाब व मंदिर हैं जिन्हें 'पर्यटन स्पॉट' के तौर पर चिन्हित कर कुछ सुविधाएं जुटाकर उन्हें टूरिज्म मैप में सजाया जा सकता है। अब तक तो राजसमंद झील, श्रीनाथ जी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, कुंभलगढ़ किला, हल्दी घाटी जैसे प्रमुख स्थलों के कारण ही राजसमंद जिले को जाना जाता रहा है, लेकिन जल्द ही अब ग्रामीण पर्यटन के तौर पर भी राजसमंद जिले को खासतौर से पहचाना जाएगा। उल्लेखनीय है राजस्थान पत्रिका ने सात अगस्त के अंक में 'अरावली पहाडिय़ों की गोद में समाए हैं कई पर्यटन स्थल' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर अनछुए पर्यटन स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास करने का जिक्र किया था। इससे पहले भी करीब आठ माह पूर्व राजसमंद जिले में सौन्दर्यीकरण के विशेष प्रयास करने को एक लम्बा समाचार अभियान चलाया था। जिला परिषद ने इस कड़ी में अनूठा प्रयास कर जिले की सातों पंचायत समितियों में 75 से अधिक पर्यटन स्थलों को चिन्हित किया है।

जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल व जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निमिषा गुप्ता के नेतृत्व में हुए इस प्रयास में उन स्थानों को चिन्हित किया गया है जो या तो पहले से विकसित हैं, या फिर उन्हें थोड़े-बहुत प्रयास कर सुसज्जित किया जा सकता है। यहां गांव-गांव में तालाब या मंदिर क्षेत्र हैं, जिन्हें रमणीक स्थल के तौर पर विकसित कर पर्यटकों को आने को रिझाया जा सकता है। प्रदेश में संभवत: राजसमंद ही ऐसा जिला होगा, जहां के ग्रामीण क्षेत्र इतनी रमणीक सम्पदा से लकदक हो।

आर्थिक तौर पर समृद्ध होंगी ग्राम पंचायतें
जिन ग्राम पंचायतों में इस तरह के पर्यटन स्थल हैं, वहां पर्यटन गतिविधियां बढऩे से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वे ग्राम पंचायतें भी आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकेंगी। इससे वहां मूलभूत सुविधाओं के साथ ही पर्यटकों के लिहाज से अन्य आधुनिक सुविधाओं सुलभ करवाने के प्रयास संभव होंगे।

कोरोना काल में लिया जा सकता है लाभ
कोरोना काल में जब रोजगार-धंधे प्राय: ठप पड़े हैं और बड़ी संख्या में लोग अपने गांवों में ही हैं। ऐसे में यदि ग्राम पंचायत स्तर पर एकजुटता के साथ श्रमदान के जरिए प्रयास किए जाए तो गांव-गांव में चिन्हित इन पर्यटन स्थलों को संवारा या विकसित किया जा सकता है। इससे खाली बैठे लोगों को निकट भविष्य में काम मिलना भी संभव होगा। ये गांव नए आकार के सपने को साकार कर सकेंगे।

ये हैं राजसमंद जिले में ग्रामीण पर्यटन स्थल

आमेट पंचायत समिति
सरदारगढ़ में मनोहर सागर तालाब, देवली में काबरी महादेव मंदिर, झौर में गोवलिया पिकअप वैयर बर्ड वॉचिंग स्थल।

भीम पंचायत समिति
दिवेर में मेवा का मथारा, काछबली में गोरमघाट, बाघाना में भील बेरी।

देवगढ़ पंचायत समिति
आंजना में आंजनेश्वर महादेव मंदिर, गोरमा नाड़ी नवीनीकरण, दौलपुरा में सोपरी बांध, ईश्रमण्ड में आवरी माता मंदिर, चामुण्डा माता मंदिर, महादेव मंदिर, जीरण में टेगी मॉडल तालाब, औषधि उद्यान निर्माण, काकरोद में रातेला तालाब, कुंदवा में मॉडल तालाब कुंदवा, माद में पन्ना धाय स्मारक, मदारिया में महाराणा कुंभा स्मारक, मियाला में रामदेव मंदिर, नरदास का गुडा में भगवानपुरा पर्यटन स्थल।

खमनोर पंचायत समिति
बड़ाभाणुजा में करधर बावजी का मंदिर, करधर बावजी तालाब, काडों का गुडा तालाब, सेमल में कागमदारड़ा तालाब, भैंसाकमेड़ में भैंसाकमेड़ तालाब, मचीन्द में बाघेरी बांध, राणा पुंजा स्मारक स्थल, शिशोदा में मॉडल तालाब दड़वल, बिजनोल में बिजनोल तालाब, धायंला में मॉडल तालाब एवं गार्डन बस स्टेण्ड, कालीवास में शिवसागर मॉडल तालाब, नेड़च में मॉडल तालाब शिव मंदिर के पास, सलोदा में मॉडल तालाब खेड़ा की भागल, उपली ओडन में खेड़ामाता मंदिर, कछवाई माता मंदिर, कछवाई बाग, झालों की मदार में अम्बे पार्क, आशापुरा माता मंदिर, गुंजोल में भैरूजी बावजी का मंदिर, नन्दसमंद बांध, कोठारिया में चरागाह विकास कार्य, बागोल में खजुनिया मॉडल तालाब, इरिगेशन गार्डन, नन्दसमंद बांध, घोड़च में कुण्डेश्वर महादेव मंदिर, घाट एवं ऐनिकट, सगरूण में झर-झर महादेव मंदिर, तालाब अंगुर की भागल, देलवाड़ा में सार्वजनिक कुण्ड, काठिया मगरा पर ओदि (शिकारगाह), आडा मॉडल तालाब, प्राचीन जैन मंदिर, पालेरा तालाब, मॉडल तालाब, सायों का खेड़ा में चिकलवास डेम, फतेहपुर में बाघेरी नाका व्यू पॉइंट, फतेहपुरिया तालाब, उनवास में तीन पिपलिया का छापरा बड़लिया हिन्दुवा एनिकट निर्माण, सालोर में मॉडल तालाब, गांवगुडा में मॉडल तालाब निर्माण सिरोही की भागल, खमनोर में रक्ततलाई गार्डन, शाही बाग, माहप्रभु हरीरायजी की बैठक, हनुमान टेकरी, माना तालाब, मोलेला में चरागाह विकास कार्य रूपण माता, भरत तलाई खेल मैदान, सेमा में बनास नदी पुलिया, फुटिया तालाब, नमाना में मॉडल तालाब, नर्सरी स्थापना, बिलोता में ईटवा मॉडल तालाब, नेगडिय़ा में सौन्दर्यीकरण खेड़ामाता, मॉडल तालाब, लालमादड़ी में चरागाह विकास कार्य, उथनोल में उथनोल मॉडल तालाब, चारागाह विकास कार्य।

कुंभलगढ़ पंचायत समिति
तलादरी में हमेरपाल पाल, कांकरवा में प्राचीन जरगाजी का स्थान, गवार में कुंभलगढ़ किला एवं वन्य जीव अभयारण्य, वरदड़ा में परशुराम महादेव एवं वीरो का मठ, थुरावड़ में आमज माता मंदिर, गढ़बोर में चारभुजा एवं रोकडिय़ा हनुमान मंदिर, सेवन्त्री में रूपनारायण मंदिर एवं रामदरबार, लक्ष्मणझुला, केलवाड़ा में बायण माता मंदिर एवं प्राचीन जैन मंदिर, कुंभलगढ़ में लाखेला तालाब, इकोलॉजिकल नेशनल पार्क।

रेलमगरा पंचायत समिति
जीतावास में समेला महादेव, श्रीआंकडिय़ा भैरूनाथ मंदिर, पीपली अहिरान में बगड़ का नाड़ा तालाब, रेलमगरा में चावंडामाता मंदिर, कुरज में पंचफल, ताकिया तालाब, गिलुण्ड में आहड़ सभ्यता स्थल, पछमता में देवनारायण मंदिर, कोटड़ी में माताजी का खेड़ा, राजपुरा में सुरजबारी माता मंदिर, मेहन्दुरिया में अन्नपूर्णा माता मंदिर, सांसेरा में जलदेवी माता मंदिर, सादड़ी में भराई बांध, द्वारकाधीश मंदिर, गवारडी में कालिया दण्ड तालाब, चराणा में चराणा श्याम मंदिर, बनेडिय़ा में ढिल्ली का खेड़ा तालाब, बामनियाकलां में रूपसिंह महाराज मंदिर, चारभुजानाथ मंदिर, कन्याउपवन, चौकड़ी में मॉडल तालाब भुरवाड़ा।

राजसमन्द पंचायत समिति
श्री द्वारकाधीश मंदिर, राजसमंद झील, नोचौकी पाल, इरिगेशन गार्डन, भाणा में पैराग्लाइडिंग, पिपलांत्री में चरागाह विकास कार्य, मार्बल माईन्स, पुठोल में राणा पुंजा सर्कल, पिपलांत्री।

शीघ्र ही पर्यटन नक्शे पर आएंगे ये स्थान
हमारा प्रयास है कि उन ग्रामीण पर्यटन स्थलों को नक्शे पर लाया जाए, जो अब तक अछूते रहे हैं। इसके लिए हमने सभी पंचायत समितियों में सर्वे करवाकर स्थान चिन्हित कर लिए हैं। इससे जिले में पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही, इन पर्यटन स्थलों पर टूरिज्म बढऩे से ग्राम पंचायतों की आय भी बढ़ेगी। ग्राम पंचायतों की आर्थिक समृद्धि का रास्ता प्रशस्त होगा।
- निमिषा गुप्ता, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद

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