FOLLOWUP : नगरीय निकाय की मिलीभगत से शहरी इलाके में पनप रही अवैध वाटिकाएं

जिले में दर्जनों वाटिकाएं, पंजीकृत नाममात्र की

By: laxman singh

Published: 25 Apr 2018, 09:25 AM IST

राजसमंद. जिले में दर्जनों अवैध वाटिकाएं नियम-कायदों को ताक पर रखकर संचालित हो रही है। जिससे न केवल सरकार को राजस्व की हानि हो रही है बल्कि लोगों की जान के साथ भी खुला खिलवाड़ हो रहा है। अधिकतर वाटिकाओं का न तो पंजीयन है और न ही दुर्घटनाओं से निपटने के समुचित उपाए। ऐसे में जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर शक के दायरे में आती हैं। बात अगर राजसमंद शहर की करें तो यहां लाखों की कमाई करने वाली दर्जनभर से अधिक वाटिकाएं हैं लेकिन एक भी पंजीकृत नहीं है। जिसके चलते ये लोग नगर परिषद बिना कोई कर दिए अपना कारोबार चला रहे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल की नहीं है अनुमति
इन वाटिकाओं के संचालकों के पास प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की भी अनुमति नहीं है। जिससे यह मनमानी तरीके से गंदगी करते है, व्यर्थ गंदा पानी बहाते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।

फायर सेफ्टी के नहीं है इंतजाम
वाटिकाओं के संचालकों के पास फायर सेफ्टी के भी कोई इंतजाम नहीं है। यहां तक की अग्निशमन विभाग की ओर से भी कोई अनापत्ति-प्रमाण पत्र नहीं हैं। जिससे आमजन की सुरक्षा का भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। ज्ञात हो, पिछले वर्ष जयपुर के मैरिज गार्डनों में आग लग जाने से कई जाने चली गई थीं। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से आदेश जारी किया गया था कि, प्रदेश के सभी मैरिज गार्डन के संचालन से पहले फायर एनओसी लेनी अनिवार्य होगी। इसके बाद ही वाटिका का पंजीयन हो पाएगा। नगर परिषद के अनुसार पूर्व में आठ वाटिकाओं का पंजीयन किया गया था, लेकिन जब राज्य सरकार की ओर से नया आदेश जारी हुआ तो सभी पंजीयन रद्द कर दिए और बाद में कोई पंजीयन नहीं हुआ।

तीनों पालिका क्षेत्रों की स्थिति भी खराब
आमेट, देवगढ़ नगरीय निकाय क्षेत्रों में भी दर्जनों वाटिकाएं संचालित हैं। लेकिन पालिका से इनका भी पंजीयन नहीं है। यहां भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। हालांकि नाथद्वारा क्षेत्र में कुल १४ वाटिकाएं है। जिनमें से आठ पंजीकृत हैं। ऐसे में निकाय विभाग सीधे सवालों के घेरे में आता है कि बिना पंजीयन के इन वाटिकाओं का संचालन कैसे हो रहा है।

यह हैं नियम
पांच लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में मैरिज गार्डन कम से कम 10 हजार वर्ग फीट में होना चाहिए। मैरिज गार्डन के आगे का भाग 40 मीटर होना चाहिए। पार्किंग क्षेत्र गार्डन के कुल क्षेत्रफ ल का 40 प्रतिशत होगा। न्यूनतम ओपन एरिया पार्किंग की जगह के पश्चात 6 मीटर आगे और इतना ही साइड में होना चाहिए। जबकि जिले में संचालित अधिकतर मैरीज गार्डन इन नियमों के दायरे से बाहर हैं।

निर्देश देंगे...
शहर में जहां भी अवैध रूप से वाटिकाएं संचालित हैं। उन्हें चिह्नित करवाकर नियम की पालना के लिए नोटिस दिए जाएंगे। अभी इनके पास एनओसी नहीं है।
बृजेश रॉय, आयुक्त, नगरपरिषद राजसमंद

कार्रवाई करवाते है....
शहर में अवैध रूप से चल रही वाटिकाओं की जांच करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यशपाल सिंह, आयुक्त, नगरपालिका नाथद्वारा

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