VIDEO : सर्दी,गर्मी और बारिश के मौसम में भी खुले में चलती हैं कक्षाएं : 65 बालिकाओं को नहीं मिल पाया भवन

laxman singh

Publish: Feb, 15 2018 02:08:03 PM (IST)

Rajsamand, Rajasthan, India

राजसमंद जिले के -मचींद के बालिका प्राथमिक विद्यालय का मामला

राजसमंद/सेमा. कपकपाती सर्दी, झुलसाती गर्मी और बारिश में खुले गगन के तले पढ़ाई करती छात्राएं। यह बात आपको हैरान कर सकती है, लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी इसके प्रति जरा भी संवेदनशील नहीं हैं। मानो उन्हें इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो। अधिकारियों की इस घोर लापरवाही का दंश पिछले छह साल से मचींद के बालिका प्राथमिक विद्यालय की बालिकाओं को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल मई २०१२ में खमनोर क्षेत्र के मचींद में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्राथमिक बालिका स्कूल खोला। इसके भवन के लिए करीब १५ लाख रुपए की सर्व शिक्षा अभियान से स्वीकृति भी हो गई। लेकिन तब से आज तक भवन बनाने के लिए जगह नहीं मिलने से स्कूल का संचालन वहां के राउमावि स्कूल की छत पर खुले में हो रहा है।

मिली थी भूमि
ग्राम पंचायत ने ३ बीघा के राउमावि खेल मैदान में भवन बनाने की एनओसी जारी की थी। लेकिन उसके बाद जब प्रशासन ने राउमावि स्कूल प्रशासन से इसकी एनओसी मांगी तो उन्होंने जगह देने से साफ मनाकर दिया। उनका कहना था कि खेल मैदान की जगह देने से विद्यार्थियों के खेलने का स्थान समाप्त हो जाएगा। तब से आज तक जिम्मेदार दूसरी जगह नहीं तलाश पाए और मासूम छात्राओं को इसका दंश झेलना पड़ रहा है।

जान का भी खतरा
प्राथमिक बालिका स्कूल यहां के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की छत पर संचालित हो रहा है। यहां छत में बाउंड्रीवॉल नहीं होने से हर समय छात्राओं के गिरने का डर बना रहता है। जबकि यहां पढऩे वाली अधिकतर छात्राएं १० वर्ष से कम उम्र की हैं। इससे खतरा और भी बढ़ जाता है। छात्राएं खेलते-खेलते कभी भी नीचे गिर सकती है।

सांसद से भी लगाई गुहार
चार माह पूर्व क्षेत्रीय सांसद हरीओमसिंह राठौड़ द्वारा मचींद ग्राम पंचायत के अटल सेवा केन्द्र पर जन सुनवाई की गई। इस दौरान प्रधानाध्यापिका पुष्पा मीणा ने उनसे स्कूल के लिए भूमि आवंटन की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा लेकिन उसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

घट गया नामांकन
स्कूल की इमारत नहीं होने से अभिभावकों ने भी छात्राओं को अन्य स्कूलों में दाखिला दिलवा दिया। जिसका प्रमाण लगातार छात्राओं का नामांकन गिरना है। सन २०१५-१६ में इस विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक ९० छात्राएं अध्ययन करती थी वहीं अब यह संख्या घटकर ६५ रह गई है। हालांकि १ से ५ तक के स्कूल में भी यह संख्या आदर्श ही है। छात्राओं को पढ़ाने के लिए यहां प्रधानाध्यापिका सहित एक अन्य अध्यापक भी हैं।

एक कमरा वह भी टूटा
प्राथमिक बालिका विद्यालय जिस स्कूल की छत पर चलता है, उस स्कूल का एक ऊपर कमरा बना है, वह कमरा भी पूरी तरह से जर्जर है, नीचे की फर्स टूटी हुई हैं, जिससे अक्सर कीड़े-मकौड़े निकलते है। इसलिए बच्चे कभी वहां नहीं बैठ पाते, बारिश के दिनों में स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है।

आबादी में नहीं मिल रही भूमि...
हम लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आबादी क्षेत्र में स्कूल के लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। जैसे ही भूमि मिलेगी, तुरंत आवंटित की जाएगी।
वीरेंद्र जैन, विकास अधिकारी, खमनोर

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