लॉकडाउन ने मृत्यभोज जैसी कुरीति पर कसी लगाम

99 फीसदी मृत्युभोज हुए बंद

By: Aswani

Published: 10 Apr 2020, 08:01 AM IST

अश्वनी प्रतापसिंह

राजसमंद. कोरोना महामारी के बाद लॉक डाउन एवं प्रशासन की सक्रियता से इन दिनों मृत्युभोज जैसी सामाजिक बुराई पर कम से कम कुछ समय के लिए ही सही लेकिन अंकुश तो लगा है। ऐसी ही सक्रियता प्रशासन अन्य दिनों में भी दिखाए तो इस सामाजिक बुराई पर नियंत्रण किया जा सकता है। कुछ सामाजिक बुराइयों की रोकथाम के लिए तो पूरा प्रशासन लगा हुआ है परन्तु मृत्यु भोज जैसी सामाजिक बुराई की रोकथाम के लिए कानून तो बनाए गए लेकिन पालना नहीं हो रही थी। गौरतलब है कि मृत्युभोज की रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा 1960 में मृत्यु भोज निवारण अधिनियम पारित किया गया। जो पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू किया गया था।


ऐसे होती है कार्यवाही
शिकायत मिलने के बाद रसद अधिकारी, तहसीलदार व थाना अधिकारी के मार्फत संबंधित को नोटिस थमाया जाता हैै। इसके बाद पाबंध किया जाता है बावजूद इसके भोज होने पर मौके की फोटोग्राफी के बाद खाद्य सामग्री में नमक मिलाकर नष्ट किया जाता है तथा उपकरणों को जब्त किया जाता है। मिठाइयों को नीलाम कर राषि को सरकार के कोष में जमा कराया जाता है।


नहीं हो रही थी पालना
राजस्थान पंचायत एक्ट के तहत स्थापित किसी ग्राम पंचायत का सरपंच, पंच और पटवारी , तहसीलदार सक्षम मजिस्ट्रेट आदि को उनके क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर मृत्यु भोज होने पर सूचना की जानकारी मिलते ही कार्रवाई करनी होती है तथा कार्रवाई के अभाव में उनपर भी कार्रवाई का नियम है। बावजूद इसके अभीतक ऐसी कार्रवाई संज्ञान में नहीं आती रही हैं, लेकिन जबसे लॉकडाउन लगा है तबसे ऐसी कार्रवाई भी संज्ञान में आई हैं और करीब ९९ फीसदी मृत्युभोज निरस्त भी हुए हैं। जो हो रहे हैं उन पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। साथ ही मृत्युभोज में लोगों की संख्या भी नगण्य हो गई है।


अफीम के प्रचलन में भी कमी
किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर सांत्वना देने आने वाले व्यक्तियों को मनुहार के रूप में ग्रामीण क्षेत्रो में अफीम परोसी जाती है। जानकारी के अनुसार किसी किसी परिवार में तो 12 दिनों में 3 से 5 किलो तक अफीम खर्च हो जाती है। अफीम के सभी पात्र जाजम पर रखे जाते हैं। इससे जहां परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होता है वहीं युवाओं में भी अफीम के नशे की लत पड़ रही है। लेकिन जबसे लॉकडाउन हुआ है तबसे इसके प्रचलन में भी काफी कमी आई है।


शुरुआत में आए थे मामले...
लॉकडाउन के शुरुआत में कुछ मामले सामने आ रहे थे, जिन्हें रुकवाया गया था अब तो पूरी तरह से बंद हैं और लोग भी नहीं जा रहे।
राजेश गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राजसमंद

Aswani Reporting
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