रोकडिय़ा हनुमान धाम के महन्त स्वामी नारायणदास का निधन : हजारों लोगों की उपस्थिति में देह पंचतत्व में विलीन

laxman singh

Publish: Oct, 13 2017 09:52:12 (IST)

Rajsamand, Rajasthan, India
रोकडिय़ा हनुमान धाम के महन्त स्वामी नारायणदास का निधन : हजारों लोगों की उपस्थिति में देह पंचतत्व में विलीन

चारभुजा के बाजार रहे बंद, राम तीर्थ घाट पर सन्तों के सानिध्य में दी गई मुखाग्नि

चारभुजा. 57 वर्षों तक रोकडिय़ा हनुमान धाम पर धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले बाबा रोकडिय़ा हनुमान के महन्त स्वामी 1008 नारायणदास के गुरुवार को देवलोकगमन होने पर शुक्रवार को उनकी हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं की साक्षी में उनकी देह को संतों के सानिध्य में पंच तत्व में विलीन किया गया। इससे पूर्व गुरुवार को पूरी रात धाम पर हरि-कीर्तन व रामधुन चलती रही और भक्तजन बारी-बारी से महंत के अंतिम दर्शन करते रहे।


महन्त नारायणदासजी की देह को शुक्रवार प्रात: 5 बजे पंचामृत से स्नान व नव वस्त्र धारण कराकर माथे पर चन्दन का लेप व गले में पुष्प हार पहनाया गया। देह को चन्दन की पालकी बनाकर रथ में बिठाया गया। इसके बाद रोकडिय़ा हनुमान धाम से 7 बजे डोल यात्रा प्रारम्भ हुई। इसमें आगे-आगे बैण्डबाजो पर भजनों की धुनें बज रही थी। वहीं भक्त गुलाब के फूलों की वर्षा करते व गुलाल-अबीर उड़ाते हुए चल रहे थे। इस दौरान पूरे रास्ते में जगह-जगह संत के दर्शन करने के लिए महिलाएं व पुरुष हाथों में श्रीफल व फूल-मालाएं लेकर खड़े थे। डोल यात्रा सैवन्त्री रोड, डाकोतियों का दरवाजा, होली चौक, ब्राह्मणों का चौराहा, मीरा बाई चौक, बस स्टैण्ड होती हुई गोमती के उद्गम स्थल रामदरबार तीर्थ घाट पहुंची। इस दौरान करीब दस किलोमीटर लम्बे रास्ते में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती चली गई। रास्ते में पडऩे वाले गांवों आंवली की भागल, निचला घाटड़ा, वागुन्दा, कसार के लोगों ने भी संत के दर्शन किए। चारभुजा के साथ ही सैवन्त्री के लोगों में भी महंत के प्रति काफी लगाव था। इसके चलते सैवन्त्री के ग्रामीणों के आग्रह पर डोल यात्रा को सैवन्त्री रूपनारायण भी ले जाया गया।

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हजारों की साक्षी में दाह संस्कार
महन्त की इच्छा के अनुरूप राम दरबार के निकट चबूतरा बनाया गया। जिसे गुलाब के फूलों तथा कुमकुम, हल्दी से सजाया गया। सनातन वैदिक संस्थान के प.ं उमेश द्विवेदी के सानिध्य में ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोचार के साथ शुद्धिकरण किया गया। वहीं संत के उत्तराधिकारी मौनी रामदास से तर्पण व पिण्ड दान करवाया गया। संतों द्वारा रामनाम के जयकारे के साथ चन्दन की लकड़ी व नारीयल से उनके उत्तराधिकारी मौनी बाबा ने दोपहर एक बजे मुखाग्नि देकर नमन किया। इस दौरान मौजूद हजारों भक्तों ने संत को अंतिम नमन कर अग्नि की परिक्रमा की।


जन प्रिय व सेवा भावी थे महंत-माहेश्वरी
महंत को उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने श्रद्धा-सुमन अर्पित कर कहा कि महन्त सेवा भावी, जन प्रिय व धर्म निष्ठ संत थे। ऐसे विरले संत के देवलोक गमन होने से क्षेत्र को क्षति पहुंची है। इसके साथ ही कुम्भलगढ़ विधायक सुरेन्द्रसिंह राठौड़, सांसद हरिओम सिंह राठौड़, भीम विधायक हरिसिंह रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष भंवरलाल शर्मा, पूर्व जिला प्रमुख नंदलाल सिंघवी, कुम्भलगढ़ के पूर्व विधायक गणेशसिंह परमार, पूर्व प्रधान सत्यनारायण देवपुरा, सरपंच नाथूलाल गुर्जर, सैवन्त्री सरपंच विकास दवे, उप प्रधान नारायाण सिंह सोलंकी के अलावा विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्तीय उपाध्यक्ष फतेचन्द सामसुखा, गायत्री परिवार से घनश्याम पालीवाल, गिरिजा शंकर व भंवरलाल पालीवाल, जिला परिषद सदस्य ललित चोरडिया ने श्रद्धांजलि अर्पित की।


व्यवस्था में लगा भारी जाब्ता
पुलिस उप अधीक्षक चन्दनसिंह महेचा, केलवाड़ा सीआई सुमेरसिंह, आमेट थाना प्रभारी करणसिंह राव, चारभुजा थाना प्रभारी गिरधारीलाल मेनारिया, कुम्भलगढ़ उपखण्ड अधिकारी गोविन्द ंिसह रत्नु, तहसीलदार भूराराम देवपाल आदि के साथ ही सुरक्षा को लेकर भारी जाब्ता मौके पर तैनात रहा।


बंद रहा चारभुजा
महंत के देवलोकगमन पर शुक्रवार को शोक में धर्मनगरी चारभुजा के सभी बाजार पूरे दिन बंद रहे।
महंत के अंतिम संस्कार में संतो का समागम रहा। इसमें जडोल से सीतारामदास व संतदास, आमेट से प्रहलाददास व सीतारामदास, मनमोहनदास, कुंवारिया से बलरामदास, प्रेमदास, अमीरगढ़ से सागरदास, सैवन्त्री से लक्ष्मणदास के अलावा रूपनगर, जिलोला, देवड़ों का गुड़ा के संत मनोहरदास आदि भी मौजूद रहे।

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