ग्रामीण अंचलों में चिकित्सा के लिए मोबाइल वैन की जरूरत

पत्रिका फोरम
- लॉकडाउन के दौरान हालात को लेकर विधायक किरण माहेश्वरी से बातचीत

By: Rakesh Gandhi

Published: 18 Apr 2020, 07:34 PM IST

राजसमंद. कोरोना वायरस के संक्रमण से आमजन को बचाने के लिए लॉकडाउन बढ़ चुका है। हालांकि राजसमंद जिला देश के ऐसे जिलों में से है, जो ये वायरस पैर जमाना तो दूर, घुस तक नहीं पाया है। दूसरी ओर, लॉकडाउन से बेरोजगार हुए दिहाड़ी मजदूरों की सेवार्थ यहां भामाशाह, जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधि पूरे मनोयोग से सेवा में जुटे हैं। खासतौर से दिहाड़ी मजदूरों को भोजन आदि जुटाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी से शनिवार को पत्रिका समूह के समाचार सम्पादक राकेश गांधी की फेसबुक लाइव के जरिए विस्तृत बातचीत हुई। प्रस्तुत है प्रमुख अंश...

सवाल- हालात बहुत खराब हैं। लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। ऐसी स्थिति में एक जनप्रतिनिधि के तौर पर आप उनकी किस तरह मदद कर रहे हैं?
जवाब- वैश्विक महामारी को देखते हुए लोगों को एक अनुशासन को फोलो करना है और सभी को घर में ही रहना है। लोगों की बहुत दिक्कतें सामने आ रही है। हम उनसे जाकर मिलने का प्रयास कर रहे हैं। मैं पिछले कुछ दिनों से लगातार लोगों से मिल रही हूं। लोगों को बिजली-पानी, चिकित्सा व कृषि को लेकर जैसी कई दिक्कतें सामने आ रही है। कोशिश रहती है हर संभव उनका समाधान हो जाए। जरूरी होने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों से बात भी हो रही है।

सवाल- क्या आपने मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री कोष में राशि जमा करवाई है?
जवाब- बिल्कुल, हमने प्रधाममंत्री राहत कोष में एक माह का वेतन तथा मुख्यमंत्री कोष में भी योगदान भी दिया है। इसके अलावा विधायक कोष से 21 लाख रुपए की राशि विभिन्न कार्यों में खर्च की है। इसमें मास्क, भोजन पैकेट व अन्य सामग्री आदि शामिल हैं। साथ ही दानदाताओं से भी बराबर योगदान ले रहे हैं। हमारी विधानसभा में पंचायत वार भामाशाहों को भी शामिल किया है, जो निस्वार्थ भाव से अपना योगदान दे रहे हैं। रेलमगरा क्षेत्र में लोग अपने घरों से गेहूं गांवों में दे रहे हैं। एक तरह से लोगों ने स्वत:स्फूर्त सहयोग की भावना का इजहार किया है। मानव जीवन में जो संवेदनशीलता होती है, वो इस विषम काल में देखने को मिल रही है। लोग अपने आप से चलकर सेवा के लिए आगे आ रहे हैं।

सवाल- दिहाड़ी मजदूरों को राशन सामग्री व भोजन सामग्री तो मिल रही है, लेकिन आपको नहीं लगता कि इस तरह के वितरण के दौरान कहीं न कहीं अनियमितता की गुंजाइश रहती है?
जवाब- हां, ये संभव है। जरूरतमंदों की जो सूची बनी है, उसका विश्लेषण किया जाना चाहिए। ये सर्वे का विषय होना चाहिए कि वाकई सभी जरूरतमंदों को राहत पहुंच रही है या नहीं। इसके लिए प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। इसका सर्वे तरीके से होना चाहिए। अभी तक तो रेण्डम सर्वे हुआ है, जिसमें कमी रहने की गुंजाइश रहती है। विधानसभा वार इसका प्रोपर सर्वे होना चाहिए। पात्र लोगों के बारे में भी फिर से विचार करना चाहिए कि वास्तविकता में राहत पाने के पात्र कौन हैं? प्रशासन को औचक जांच करवानी चाहिए।

सवाल- दूसरे जिलों व राज्य से बाहर काम करने वाले कई मजदूर भी वापस लौटे हैं। संभव हैं उनका नाम जरूरतमंदों वालों की सूची में न हो। ऐसे में क्या उन्हें राहत सामग्री मिल रही है? क्या आपने इस संबंध में कोई कदम उठाया है? आपको नहीं लगता अभी 20-25 प्रतिशत लोग ऐसे होंगे, जिन्हें राहत नहीं मिल रही है?
जवाब- ये सही है जो सूची में है, उन्हें हम सभी चीजें दे रहे हैं। जबकि उन्हें भी देना चाहिए जो जरूरतमंद हैं, लेकिन सूची में नहीं हैं। हालांकि हमने लोगों से कहा है कि वे अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंदों की देखभाल करें। कई ऐसी भी शिकायतें भी आई हैं कुछ जगह काफी अनाज पड़ा होने के बाद भी वहां और अनाज पहुंच रहा है।


सवाल- राजसमंद में घर-घर दवा की आपूर्ति करने के लिए एक टीम बनी है। क्या गांवों में ऐसी टीम नहीं होनी चाहिए? नि:शुल्क दवा मिलना लगभग बंद हो चुकी है, क्योंकि लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे? बिना सरकारी पर्ची ये दवा मिलना भी मुश्किल है।
जवाब- प्रशासन को मोबाइल वैन चलानी चाहिए, जो विभिन्न स्थानों पर जाए और लोगों को चिकित्सा व दवा आदि सुलभ करवाएं। ये मोबाइल वैन गांव-गांव घूमे, ताकि लोगों को चिकित्सा व दवा आदि आसानी से सुलभ हो। इस वैन में चिकित्साकर्मी भी हों। नि:शुल्क मिलने वाली दवा आमजन तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था होनी ही चाहिए।

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
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