NEGLIGENCE: कागजों में दबी प्रधानमंत्री आवास योजना; कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

-डेढ़ साल में आवेदनों की छटनी कर पाई नगर परिषद
-कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

By: laxman singh

Published: 14 Nov 2017, 12:17 PM IST

राजसमंद. नगर परिषद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना जिम्मेदारों की अनेदखी का शिकार कागजों में दब कर रह गई है। यहां योजना के तहत डेढ़ साल में महज आवेदन फॉर्मों की छटनी का काम ही हो पाया है। ऐसे में कब गरीबों के आशियाने बनेंगे और कब वह उनमें रहेंगे, यह बड़ा सवाल है।

-डेढ़ साल में आवेदनों की छटनी कर पाई नगर परिषद
-कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 

यह है योजना
6 मई 2016 को यहां केंद्र सरकार द्वारा शहरी गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई। इस योजना में अल्प आयवर्ग के लोगों को आवास उपलब्ध करवाए जाने थे, लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष में नगर परिषद महज आवेदन लेकर छटनी ही कर पाई है।
यह हैं हकदार
इस योजना को चार वर्गों में विभाजित किया गया है। जिसमें प्रथम वर्ग के तहत कच्ची बस्तियों को पुनर्विकास करवाना है जिसके तहत परिषद भूमि उपलब्ध करवाकर आवास बनाएगी। वहीं द्वितीय वर्ग में सब्सीडी दिए जाने का प्रावधान है। तृतीय वर्ग में भवन निर्माण के लिए प्रार्थी को डेढ़ लाख रुपए की सहायता दी जाती है। वहीं चौथे वर्ग के तहत स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए सरकार अनुदान राशि देती है, लेकिन अभीतक योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
यह आए आवेदन
इस योजना के तहत नगर परिषद में ३०४७ आवेदन आए हैं। इसमें से परिषद द्वारा ७३४ आवेदनों को प्रथम चरण में रखा गया है।
काट रहे चक्कर
शहर के विभिन्न वार्डों से जरूरतमंद और गरीब परिवार अपने घर का सपना पूरा करने के लिए रोजाना नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारी उन्हें रोज टरका कर वापस लौटा देते हैं।
आवदकों की छटनी की जा रही है...
प्रधानमंत्री योजना के तहत ३०४७ फार्म जमा हुए हैं, हमने प्रथम चरण में ७३४ आवेदकों की सूची तैयार कर दी है। उनकों हम आगे भेजेंगे।
-एसएल चंगेरीवाल, सहायक अभियंता, नगरपरिषद

laxman singh Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned