टूटी शिक्षा की लय, अब पढ़ाई में नहीं लग रहा मन

-गणित जैसे कठिन पेपर बाकी, अभिभावकों को भी सता रहा डर
-परीक्षा परिणाम पर पड़ेगा असर

By: Aswani

Published: 06 Jun 2020, 06:31 PM IST

राजसमंद. कोविड-19 के लॉकडाउन ने विद्यार्थियों की परीक्षा को और कठिन कर दिया है। तीन माह घर पर बैठने के बाद उन्हें गणित जैसे विषय की परीक्षा देनी है, ऐसे में अब विद्यार्थी पढऩे के लिए कॉपी-किताबें लेकर तो बैठते लेकिन मन नहीं लगता, क्योंकि एक साल पढ़ाई कर जो ज्ञान अर्जित किया था वह आधा वे भूल चुके हैं और अब पूछने के लिए शिक्षक भी उनके पास नहीं है। वहीं बच्चों की पढ़ाई की चिंता अभिभावकों को भी सताने लगी है, उन्हें लगता है कि पढ़ाई की लय टूटने से विद्यार्थी परीक्षाओं में वह परिणाम नहीं दे सकेंगे, जितनी उन्होंने मेहनत की थी।


उहापोह में गुजरा समय
कोरोना वायरस का खतरा कितना है, और कैसे इससे निपटा जाएगा यह सरकार को भी नहीं पता था, ऐसे में आनन-फानन में २१ मार्च से राजस्थान सरकार ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन कर दिया और सभी तरह की परीक्षाएं आदि रोक दी गईं। पहला लॉकडाउन होने तक तो ठीक रहा, लोगों को यह उम्मीद भी अप्रेल माह में परीक्षाएं हो जाएंगी, लेकिन जब लॉकडाउन चरणबद्ध बढ़ता गया और पढ़ाई भी ऑनलाइन होनी शुरू हो गई तो विद्यार्थी, अभिभावक और यहां तक की शिक्षक भी उहापोह में थे कि अब परीक्षाएं होंगी या फिर विद्यार्थियों को अगली कक्षा में क्रमोन्नत कर दिया जाएगा। ऐसे में बच्चों की रुचि से किताबें धीरे-धीरे गायब हो गईं। साथ ही लॉकडाउन में जो भय का माहौल बना उसने बच्चों की शिक्षा को बुरी तरह से प्रभावित किया। दरअसल प्रदेश में पहलीबार ऐसा हुआ है कि बोर्ड परीक्षाओं में तीन माह का अंतराल आ गया हो। मार्च के मध्य में रोकी गई परीक्षाएं अब जून के मध्य में शुरू होंगी। यानि पूरे तीन महीनें बाद उनको परीक्षा के दौर से गुजरना होगा।

गणित का बड़ा संकट
लॉकडाउन के बाद १८ जून को १२वीं कक्षा का पहला पेपर गणित का होना है। विद्यार्थियों का कहना है कि अन्य पेपर तो हम अपने मन से पढ़ सकते हैं लेकिन गणित के सवाल समझाने के लिए शिक्षक जरूरी होता है। हमने जो एक साल पढ़ा वो आधा तो दिमाग से उतर गया है। ऑनलाइन पढ़ाई और स्कूल की पढ़ाई में काफी अंतर होता है। ऐसे में हमारे सामने सबसे बड़ा संकट गणित की परीक्षा को लेकर ही है।

लॉकडाउन के बाद बार-बार भ्रम की स्थिति बनी। 10वीं व 12वीं की परीक्षा को लेकर शुरू से एक स्पष्ट आदेश होता तो बच्चों के पढ़ाई का क्रम नहीं टूटता। दो माह से बच्चों ने पढऩा छोड़ दिया और अब परीक्षा करने से बच्चे तनाव में आ गए हैं।

-गिरवर सिंह सिसोदिया, अभिभावक

एक साल में जो पढ़ा था वह दो महीने की पढ़ाई बंद होने से सब भूल गए, गणित जैसे कठिन विषय में अब सवाल हल करने में दिक्कत आ रही हैं। छुटियां होने से टीचर भी बाहर चले गए। अब किसी के यहां ट्यूशन भी नहीं कर सकते।

ऋषभ सिरोया, विद्यार्थी कक्षा 10

गणित जैसे कठिन विषय की परीक्षा बाकी है, और लम्बा अंतराल होने से बच्चों के लिए समस्याएं तो होंगी। चूंकि बच्चों का पढ़ाई से संबंध भी छूट गया है।
-पारसमल जाट, परीक्षा प्रभारी, राउमावि सियाणा

समस्या तो सबको है...
परीक्षा करवाने के विभाग के आदेश हैं, समस्या तो होगी, क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। फिरभी विद्यार्थी पूरे मनोबल से परीक्षा दें, जो पढ़ा है उसका अध्ययन करते रहें, सफलता निश्चित मिलेगी।
-ओमशंकर श्रीमाली, डीईओ, (माध्यमिक) राजसमंद

Aswani Reporting
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