जन्मजात सेवाभावी है पन्नासिंह

- तीन दशक से इंसानों व जानवरों की हड्डियां जोडऩे का काम कर रहे

By: Rakesh Gandhi

Updated: 01 Mar 2020, 07:04 PM IST

राजसमंद. कुछ इंसानों में सेवाभाव जन्मजात होता है। पैसा उनके लिए मायने नहीं रखता। वे हर संभव प्रयास कर न केवल इंसानों को, बल्कि जानवरों तक की पीड़ा दूर करने का काम करते हैं। कुछ ऐसे ही हैं भीम पंचायत के गांव बरजाल निवासी पन्ना सिंह। जीवन के 8वें दशक में प्रवेश करने को हैं, लेकिन चेहरे पर हमेशा ऐसी ऊर्जा रहती है कि युवा भी मात खा जाए। पन्ना इसे ईश्वर का आशीर्वाद मानते हैं। हमेशा सक्रिय दिखाने देने वाले पन्नासिंह को ग्रामीण 'वैद्य जीÓ के नाम से भी जानते हैं।
77 वर्षीय पन्नासिंह पिछले तीस सालों से ग्रामीणों व जानवरों की हड्डी टूटने पर उन्हें जोडऩे का काम कर रहे हैं। वे कोई नीम-हकीम नहीं हैं, न ही वे झाड़-फूंक में विश्वास करते हैं। वे बिल्कुल आम चिकित्सकों की तरह सामान्य तरीके से ये उपचार करते हैं। इसके लिए गांव में सुलभ संसाधनों का उपयोग करते हैं। वे कहते हैं, 'मेरा काम उपचार करना है, ठीक तो ईश्वर करता है। मैं उनका सेवक हूं।Ó उनके उपचार का विश्वास इतना है कि केवल बरजाल ही नहीं, दूर-दूर गांव के लोग उन्हें वाहनों में ले जाते हैं।
हड्डी टूटने पर वे गोल वृक्ष की छाल का लेप और बांस की खपच्ची जैसी सामान्य सामग्री का उपयोग करते हैं, जो सामान्यत: हर कहीं सुलभ हो जाती है। गांव के गिरधारी सिंह रावत बताते हैं कि बरजाल ही नहीं, आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों का उन पर बहुत विश्वास है। वे किसी से कुछ पैसा नहीं लेते। सेवा ही उनका परम धर्म है। दूसरे गांवों के लोग किसी भी समय उन्हें आकर अपने वाहनों में ले जाते हैं और उपचार के बाद उनके घर छोड़ जाते हैं। वे कभी किसी को मना नहीं करते और चौबीस घंटे तैयार रहते हैं। केवल हड्डी ही नहीं, जनवरों के आफरा आने तक का उपचार वे आसानी सेे कर देते हैं। जानवरों के मामले में पशु चिकित्सों की तरह वे ये सारा काम करते हैं। गांव के युवा सरपंच सुरेश सिंह बताते हैं कि वे बचपन से पन्नासिंह को ये काम करते हुए देख रहे हैं। क्षेत्र में शराबबंदी आंदोलन के कर्णधार गिरधारी सिंह रावत बताते हैं कि वे नशे के सख्त खिलाफ हैं और उन्होंने तीन वर्ष पूर्व गांव में शराबबंदी आंदोलन में सहयोग किया था।
दिवेर में नियुक्त पशु चिकित्सक डा. सतीश बताते हैं कि पन्नासिंह बरसों से ये काम कर रहे हैं। वे काफी पारंगत हो चुके हैं। पशुओं के आफरा आदि आने में कई बार पशु मालिक चिकित्सालय नहीं पहुंच पाते। ऐेसे में उनकी सेवाएं काम आती है। छोटे-बड़े जोड़ टूटने पर वे सामान्य उपचार कर लेते हैं।

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