script बहू और बेटी में फर्क खत्म होने पर घर बनेगा स्वर्ग- संत ललितप्रभ | Patrika latest news Rajsamand, Rajsamand latest news | Patrika News

बहू और बेटी में फर्क खत्म होने पर घर बनेगा स्वर्ग- संत ललितप्रभ

locationराजसमंदPublished: Dec 19, 2023 10:39:44 pm

Submitted by:

jitendra paliwal

राष्ट्रसंत ललितप्रभ का राजसमंद के केलवा कस्बे में रात्रिकालीन प्रवचन, सुबह जोधपुर के लिए किया प्रस्थान

kelwa.jpg
राष्ट्रसंत ललितप्रभ ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी दौलत मन की शांति है। सबकुछ छोडक़र इसको पा लिया तो सौदा सस्ता हो जाएगा। जीवन में सबके उतार चढ़ाव आते हैं, बाकी उठापटक तो सबके जीवन में होती है, लेकिन इनके बीच-बीच जो व्यक्ति संतुलन बनाकर शांत मन का मालिक बना रहता है, वह जीवन की कड़ी जीत लेता है।
जागनाथ महादेव मंदिर परिसर में उन्होंने आओ सीखें जीवन जीने की कला विषयक प्रवचन में कहा कि जीवन देना व लेना ईश्वर के हाथ में है, उसे सही ढंग से जीना हमारे हाथ में है। उन्होंने बताया कि मन की शांति के सामने तो छप्पन भोग भी फीके हो जाते हैं। दुनिया का सबसे अमीर आदमी वही है, जिसका मन आनंद से भरा हुआ है।
संत ललितप्रभ ने कहा कि हमारी आदतें ही हमारा भविष्य तय करती हैं। कोई भी व्यक्ति अगर श्रेष्ठ जीवन का मालिक बनना चाहता है, हमारा जीवन अच्छा होगा या बुरा, यह हमारी आदतें ही तय करती है। जैसे होंठ फटने पर नाभि में तेल या घी की बूंद डाली जाती थी, वैसे ही अच्छे जीवन का मालिक बनने के लिए अच्छी आदतों का होना जरूरी है। दुनिया में एक ही व्यक्ति है, जो हमारे जीवन को बदल सकता है और वह हम खुद हैं।
रात्रिकालीन प्रवचन में उन्होंने कहा कि हमें अपनी आदतों के प्रति सावधान रहना चाहिए। अगर घर के अभिभावक बचपन से ही अच्छी आदतों का बीजारोपण करना शुरू कर दें तो वे आदतें बड़े होने पर हमारे जीवन का संस्कार बन जाती हैं। जैसा पाणी-वैसी वाणी, जैसा आहार-वैसा व्यवहार, जैसा अन्न-वैसा मन और जैसी संगत वैसी ही- रंगत जीवन में आती है। हमें संगति के प्रति सावधान रहना चाहिए, क्योंकि अच्छी संगत और अच्छी आदत हमारे जीवन को संवार देती है।
उन्होंने कहा कि हम गौड न भी बन पाएं, पर गुड़ तो बन ही सकते हैं। संत ने कहा कि हमें सबसे पहले दूसरों की कमियां निकालने की आदत को ठीक कर लेना चाहिए। अगर आपको एक में कमी नजर आए तो उससे बात कीजिए, पर हर एक में कमी नजर आए तो खुद से बात कीजिए। उन्होंने सावधान किया कि जब भी किसी में कमी नजर आए तो ध्यान रखिए कमियां आप में भी हैं और जबान दूसरों के पास भी है। उन्होंने दूसरों की मजाक उड़ाने की आदत को भी अनुचित बताया।
व्यसनों से दूर रहने की हिदायत
राष्ट्र-संत ने कहा कि गुटखा, तम्बाकू, शराब जैसी बुरी आदतों बचना चाहिए, क्योंकि ये तन, मन, धन तीनों को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि जैसा आहार वैसा व्यवहार, जैसा संग वैसा रंग, वैसे ही जैसी आदत वैसी किस्मत। हम नसीब को तो बदल नहीं सकते पर, नेचर बदल लें तो नसीब अपनेआप बदलना शुरू हो जाएगा
हुआ भावभरा स्वागत
राष्ट्रसंत ललित प्रभ, चंद्रप्रभ और डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागर के भिक्षु नगर, केलवा पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। भामाशाह नरेंद्र बोहरा, देवीलाल तेली, मुकेश कोठारी, बाबूलाल कोठारी, महेंद्र कोठारी अपेक्स, राजू भाई कोठारी, शंभूलाल सोनी, संजय पालीवाल, रमेश चपलोत समेत राजनगर, कांकरोली एवं उदयपुर से श्रावक-श्राविकाओं की विशेष उपस्थिति रही। राष्ट्रसंतों ने जोधपुर की ओर मंगल प्रस्थान किया।

ट्रेंडिंग वीडियो