Police Control Room को Abhay Command Center में बदलने का सपना रह गया ख्वाब

Police Control Room को Abhay Command Center में बदलने का सपना रह गया ख्वाब

Laxman Singh Rathore | Publish: Aug, 08 2019 09:52:25 PM (IST) Rajsamand, Rajsamand, Rajasthan, India

सूचना प्रौद्योगिकी और नगरपरिषद की खींचतान में दांव पर जनता की सुरक्षा

Police Control Room to Abhay Command Center convert rajsamand

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

शहर के चप्पे-चप्पे की लाइव निगरानी के लिए Rajsamand District Police control room को Abhay Command Center (अभय कमांड केन्द्र) में बदलने का ख्याल अब ख्वाब बनकर रह गया है। अभय कमांड का भवन बनकर तैयार हो गया, मगर शहर में भूमिगत केबल डालने का कार्य नगरपरिषद ने रूकवा दिया। सीसीटीवी पोल, कैमरे व केबल बिछाने के नक्शे के आधार पर नगर परिषद ने सर्वे करवाकर करीब 46 लाख रुपए जमा कराने का डिमांड नोट जारी कर दिया। इस पर सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की कंपनी राजकॉम इन्फो सर्विस लिमिटेड द्वारा 100 मीटर पर एक खड्डा खोद कर एचडीडी मशीन से आंतरिक केबल डालने हवाला देते हुए डिमांड नोट घटाने की मांग की, जिस पर नगर परिषद द्वारा दोबारा मूल्यांकन करवाकर पूर्ववत एस्टीमेट को सही ठहराते हुए 46 लाख रुपए जमा कराने का दोबारा मांग पत्र भेज दिया। उसके बाद न तो सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा डिमांड राशि जमा करवाई और न ही केबल बिछाने का कार्य शुरू हो पाया है। इसका खमियाजा शहर की जनता और पुलिस को भुगतना पड़ रहा है।

नए CCTV कैमरे के चक्कर में पुराने भी बंद
नगरपरिषद द्वारा करीब 150 कैमरे पहले से राजसमंद शहर में लगा रखे थे, जिसके जरिये पुलिस निगरानी रखे हुए थी। अभय कमांड प्रोजेक्ट आते ही कई जगह से पुराने कैमरे हटा दिए या बंद करवा दिए। फिर नए कैमरे लग ही नहीं पाए, जिससे बेहतर करने के प्रयास में हालात और ज्यादा बिगड़ गए। इस वजह से शहरी सुरक्षा व्यवस्था खतरे में पड़ गई और अपराध निरकुंश होता चला गया।

यह है अभय कमांड योजना
राजसमंद शहर में 500 सीसीटीवी कैमरे लगाकर पुरानी कलक्ट्री में अभय कमांड भवन बनाया है, जहां 24 घंटे पुलिसकर्मी बड़े एलसीडी के माध्यम से हर एक कैमरे से चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे। शहर के किसी भी क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि दिखेगी, चोरी, चकारी, मारपीट, यातायात बाधित होते देख अभय कमांड पर तैनात जवान तत्काल सूचना संबंधित चौकी, थाना व ड्रेगन को देंगे, ताकि त्वरित कार्रवाई हो सकें। तय समयावधि में पुलिस नहीं पहुंचेगी, तो जवान व पुलिस अफसरों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए अभय कमांड सेंटर के भवन में कंट्रोल रूम में चार डेस्क बनाई गई है। वीडियो कैमरा रिकॉर्डिंग, कॉल रिकॉर्डिंग, यातायात नियंत्रण व नियंत्रण, आपात स्थिति में आहत को तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध करवाना आदि सुविधाएं है।

विभागों में खींचतान, चलता रहा पत्राचार
राजसमंद शहर में भूमिगत केबल बिछाने के लिए रोड कटिंग पर होने वाली क्षति के एवज में नगरपरिषद द्वारा 16 जनवरी 19 को 46 लाख 7 हजार 404 रुपए मांग पत्र जारी किया। इस पर सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की राजकॉम इन्फो सर्विसेज लिमिटेड ने 17 अपे्रल 19 को पत्र जारी कर बताया कि ज्यादातर केबल एचडीडी मशीन डालेंगे, जिससे करीब 100 मीटर की दूरी पर एक एक खड्डा होगा। इस तरह पूरी सडक़ नहीं खुदेगी। जहां मशीन का जाना संभव नहीं होगा, उसी जगह पर खुली सडक़ को खोदकर केबल डालेंगे। इसलिए 46 लाख का डिमांड नोट बहुत ज्यादा है। नगरपरिषद आयुक्त द्वारा 8 मई 19 को वापस भेजे जवाब में बताया कि तकनीकी कार्मिक द्वारा पुन: मूल्यांकन किया, जिसमें रोड कटिंग का खर्च यथावत है और मांग पत्र की राशि 46 लाख रुपए जल्द जमा करावें।

पत्रिका व्यू : शहरी सुरक्षा का जिम्मा किसका ?
शहर में लोगों को मूलभुत सुविधा मुहैया कराने का जिम्मा नगर निकाय का है। बढ़ते अपराध व असुरक्षा के हालात पर नगरपरिषद ने पहले डेढ़ सौ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगवा पुलिस को कमान सौंपी, जो सराहनीय प्रयास था। समय के साथ यह सुरक्षा अपर्याप्त होने पर सिस्टम को अभय कमांड के रूप में अपगे्रड के प्रयास हुए। इसमें 500 कैमरे लगाने प्रस्तावित है, ताकि चोर- उचक्कों पर नजर रखी जा सकें। इसका कार्य शुरू हुआ, मगर इस बार नगरपरिषद ने रोड कटिंग के मरम्मत पेटे करीब 46 लाख का मांग पत्र जारी कर कार्य रूकवा दिया। निकाय का मांग पत्र जायज है, मगर 1 वर्ष से यह कार्य अटका पड़ा है। जन सुरक्षा के अहम मुद्दे पर निकाय की असंवेदनशीलता आश्चर्य चकित करती है। एक तरफ निकाय ने सुरक्षा के लिए खुद कैमरे खरीद पुलिस को दिए थे और अब सुरक्षा प्रणाली मजबूत बनाने के कार्य में बाधक बन गई है। क्या नगर परिषद् को जनसुरक्षा से कोई वास्ता नहीं है? आए दिन शहर की सडक़ें खुदती है, पैसा लेकर भी नगर निकाय समय पर मरम्मत नहीं करवाती। तकनीकी कारण जो भी रहे हो यह तो अभियंता या एजेंसी ही जाने, मगर जन सुरक्षा नगरपरिषद की भी अहम जिम्मेदारी है। शहर में शांति व सुरक्षा व्यवस्था के कार्य में निकाय को दिलचस्पी दिखाकर शीघ्र अनुमति देनी चाहिए, ताकि अभय कमांड प्रोजेक्ट शुरू हो और वर्षभर में घटित चोरी, नकबजनी, लूट, हत्या सरीखी संगीन वारदातों में बदमाशों को पकडऩे में सहायक सिद्ध हो सकें।

कार्य अधूरा, कैसे चले केंद्र
अभय कमांड का कार्य डीओआईटी द्वारा करवाया जा रहा है। फाइबर केबल बिछाने पर रोड कटिंग के एवज में नगरपरिषद ने मांग पत्र जारी किया, मगर सूचना संचार प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राशि जमा नहीं करवाई। इसके लिए नगरपरिषद आयुक्त व डीओआईटी उप निदेशक से भी बातचीत की, मगर सफल नहीं हो पाए। इसी वजह से अभय कमांड प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया।
राजेश गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजसमंद

अभय कमांड का कार्य अधूरा
अभय कमांड सेंटर का भवन तैयार है। सिस्टम सेट कर दिया, मगर शहर में ऑप्टीकल फाइबर केबल बिछाने का कार्य नगरपरिषद द्वारा रूकवा दिया। रोड कटिंग की एवज में 46 लाख रुपए जमा कराने का नोटिस दिया, जिसे सरकार को भिजवा दिया। सरकार से बजट मिलने पर नगरपरिषद को भुगतान होगा।
हिम्मतमल कीर, उप निदेशक सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग राजसमंद

दोबारा मूल्यांकन, डिमांड सही
अभय कमांड प्रोजेक्ट के नक्शे से दोबारा मूल्यांकन करवाया, जिससे करीब 46 लाख खर्च है। उक्त राशि जमा होने पर अनुमति देने को तैयार है।
जनार्दन शर्मा, आयुक्त नगरपरिषद राजसमंद

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