scriptRajasthan Samachar : वन विभाग की चाल में फंसा पैंथर, मेमने का शिकार करने के लालच में पिंजरे में कैद हो गया ‘शिकारी’ | Rajasthan Samachar: Panther trapped in the forest department's trick, 'hunter' got trapped in the cage in greed of hunting lamb | Patrika News
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Rajasthan Samachar : वन विभाग की चाल में फंसा पैंथर, मेमने का शिकार करने के लालच में पिंजरे में कैद हो गया ‘शिकारी’

शिकारी पैंथर की हलचल से लोगों में खौफ बढ़ा रहा था। इस पर ग्रामीणों मांग के बाद वनकर्मियों ने झालों की मदार में वाळा कहे जाने वाले प्राकृतिक नाले में गुरुवार शाम को ही पिंजरा लगाया था। इस पर गुरुवार देर रात को पैंथर पिंजरे में कैद हो गया।

राजसमंदJun 22, 2024 / 05:07 pm

जमील खान

Rajsamand News : खमनोर. ब्लॉक के झालों की मदार पंचायत इलाके में जंगल में शिकार पानी की कमी के कारण पैंथर की हलचल पिछले सप्ताहभर से बस्ती के आसपास तक काफी बढ़ गई थी। लोग देर-सवेर खेत-खलिहानों और गांव के सीमांत रास्तों पर निकलने में डर महसूस कर रहे थे। लोगों की मांग पर वन विभाग ने बीती शाम को ही पैंथर के ट्रेकिंग रूट पर पिंजरा लगाया। पिंजरे में बंद मेमने का शिकार करने के लालच में रात को वयस्क नर पैंथर उसमें कैद हो गया। झालों की मदार गांव में पैंथर पिछले कुछ दिनों से शिकार-पानी की तलाश में जंगल से निकलकर बस्ती के आसपास दस्तक दे रहा था।
शिकारी पैंथर की हलचल से लोगों में खौफ बढ़ा रहा था। इस पर ग्रामीणों मांग के बाद वनकर्मियों ने झालों की मदार में वाळा कहे जाने वाले प्राकृतिक नाले में गुरुवार शाम को ही पिंजरा लगाया था। इस पर गुरुवार देर रात को पैंथर पिंजरे में कैद हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि झालों की मदार व आसपास के 10 किलोमीटर में फैले इलाकों में कई पैंथर मौजूद हैं, मगर पिछले कुछ दिनों से एक-दो पैंथर की आवाजाही झालों की मदार में बस्ती के इर्द-गिर्द तक बढ़ गई थी।
झालों की मदार में जंगल की ओर से आशापुरा माता मंदिर की पहाड़ी की तलहटी में होकर गुजर रहे प्राकृतिक नाले में और इसी रास्ते बस्ती के आसपास तक पैंथर की मौजूदगी से लोगों की परेशानी बढ़ गई। लोग शाम ढलने व अंधेरा होने के बाद इलाके की सड़कों से गुजरने में भी डर महसूस कर रहे थे। कई लोगों ने पैंथर की मौजूदगी आंखों देखी बताई। इसके बाद वन विभाग ने पिंजरा लगाने का फैसला किया।
दो दिन पहले ही यहां पिंजरा लगाया गया और शाम ढलने पर पिंजरे के एक हिस्से में पैंथर को ललचाने के लिए मेमना (बकरी का बच्चा) रखा गया। रात को शिकार पर निकले पैंथर ने पिंजरे में मेमना देखा तो वह पिंजरे में फंस गया। पिंजरे में कैद हो चुके पैंथर ने बाहर निकलने की खूब कोशिश की। ऐसे में पैंथर की दहाड़ें सुनकर सुबह लोग इकठ्ठा हो गए। सैकड़ों की तादात में लोग पैंथर को देखने मौके पर जमा हो गए।
पैंथर लोगों को देख भड़क रहा था और वह कभी पंजे तो कभी नुकीलें दांतों से पिंजरे को काटने का असफल प्रयास कर रहा था। लोगों ने वन विभाग को सूचना दी, जिस पर गश्ती दल की गाड़ी और वनकर्मी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से पिंजरे को गाड़ी में लेकर राजसमंद रवाना हो गए। पिंजरे से निकलने के प्रयास में पैंथर को हल्की-फुल्की चोटें आईं, जिसका प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया। पैंथर के पकड़े जाने से लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।
बछड़ी को दबोचा, पत्थर मारे तो भाग गया
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सप्ताह आशापुरा माता मंदिर के पास शंकरलाल लोहार के बाड़े में बंधी गाय की बछड़ी पर रात को पैंथर ने हमला कर दिया। शंकरलाल व उसका परिवार भी पास में ही घर में सो रहा था। बछड़ी के जोर-जोर से रंभाने की आवाज सुनकर परिवार के लोग जागे और देखा तो बाड़े में पैंथर दिखाई दिया। उन्होंने पत्थर फेंके, जिससे वह जंगल की ओर भाग गया। शंकरलाल अपनी घायल बछड़ी को पशु चिकित्सालय लेकर गया और उसका इलाज करवाया।

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