ठग रही बीमा कम्पनियां, नियमों में बदलाव हो

फसलों का समय पर नहीं मिलता मुआवजा
ऋण माफी में भी किसानों के साथ हुआ छलावा

राजसमंद/पीपली आचार्यान. बीमा कम्पनियां बीमा प्रत्येक खेत का करती हैं, लेकिन जब मुआवजा देने की बारी आती है तो वह ब्लॉक स्तरीय खराबे का आंकलन करते हैं। ये तो किसानों के साथ सीधे ठगी है। सरकार को नियमों में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि किसानों की स्थिति में सुधार के लिए केवल कागजी काम होते हैं जमीनी हकीकत में किसान की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। यह विचार बुधवार को किसानों ने आगामी बजट पर राजस्थान पत्रिका के सामने व्यक्त किए। पीपली अहिरान के किसान लोभचंद, नानालाला, गेहरीलाल, रमेश, उदयलाल, प्रवीण जोशी, देवीलाल अहीर, परशुराम सालवी, सुरेशचंद अहीर, भंवरलाल लोहार, देवीलाल मालवीय रतनलाल अहीर की मिली जुली प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि सरकार ने पिछले बजट में ऋण माफी की घोषणा की, इसमें सिर्फ चुनी बैंकों के ही ऋण माफ किए गए। जबकि केंद्रीयकृत बैंकों का लोन माफ नहीं किया गया। माफी के बाद किसानों को उनकी जरुरत के अनुसार ऋण भी नहीं दिया जा रहा। जिससे किसान को खाद, बीच के लिए भटकना पड़ता है। सरकार किसानों को बीज, दवा में जो अनुदान देती है वह सीधे किसान के खाते में दिया जाए तो किसानों को इसका पूरा लाभ मिल पाएगा। नए बजट में ऐसे प्रावधान किए जाने चाहिए जिससे बीमा कम्पनियों की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सके। जब बीमा खेत का हो रहा है उसी के आधार पर किसान को मुआवजा मिलना चाहिए। आवश्यक नहीं है कि मौसम की मार से पूरा क्षेत्र प्रभावित हो। Rajasthan Upcoming budget 2020


तारबंदी का अनुदान बढ़े
मेघा खेड़ा के किसान रतनलाल अहीर, दिनेश अहीर, शंकरलाल, शंकर सालवी, माधवलाल अहीर व बडुलिया के श्रीलाल कुमावत, प्रेमा खेड़ा के रतनलाल, कुंवारिया के किसनलाल, भगवंतङ्क्षसह चुंडावत ने कहा कि आगामी बजट में तारबंदी के लिए किसानों का अनुदान बढ़ाया जाना चाहिए। क्योंकि आवारा मवेशी, रोजड़े फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, अनुदान राशि कम होने से किसान तारबंदी नहीं करवा पाता है। ऐसे में पहले तो मौसम की मार और बाद में मवेशियों और रोजड़े किसान की कमर तोड़ देते हैं।


खेत कमाई का साधन बनें Rajasthan Upcoming budget 2020
महिला कृषक लक्ष्मी, पायल लोहार, कंचन पुरोहित, पुष्पा वैष्णव, नौसर गाडरी, बग्गूबाई गाडरी आदि ने कहा कि खेतों से अगर किसान को आय होगी तभी तो हमारी खेती करने में रुचि जागेगी। ऐसे में खेती में आय के साधन बढ़ाने पर काम किया जाना चाहिए। किसानों को मुआवजा उचित नुकसान के अनुसार दिया जाना चाहिए। क्योंकि अभी खराबा होता है २० हजार का तो सरकार मुआवजा देती है २०० रुपए ऐसे में किसान की स्थिति में कैसे सुधार होगा।

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Aswani Reporting
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