नेताओं के भी अपने-अपने दावेदार!

राजसमंद उपचुनाव : आगे टिकटार्थी, पर्दे के पीछे कद्दावर नेताओं की भी जोर आजमाइश

By: jitendra paliwal

Published: 20 Feb 2021, 11:35 AM IST

राजसमंद. राजनीति में बड़ा नेता बनना है तो बड़े नेता का हाथ भी सिर पर चाहिए ही। कौन, किसका कितना करीबी, खास है और किसको आगे बढ़ाना है, यह काफी-कुछ टिकट की लड़ाई और जीत से भी तय होता है। राजसमंद में चूंकि उपचुनाव की सरगर्मियां चरम पर हैं, लिहाजा दावेदारों और उनके 'राजनीतिक आकाओंÓ को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं आम हैं। आम लोग भाजपा-कांग्रेस के बड़े नेताओं और खेमेबाजी के कौने से भी दावेदारों को देख रहे हैं।
भाजपा में इस वक्त करीब 8 प्रमुख कार्यकर्ता व पदाधिकारी दावेदारी जता रहे हैं, वहीं कांग्रेस में थोड़ी खामोशी छाई हुई है। कांग्रेस से जुड़े या कांग्रेस के सम्भावित दावेदारों में जिनका नाम चर्चाओं में है, उनकी तादाद भी तीन से ज्यादा ही है। चाहे कांग्रेस हो, भाजपा या अन्य कोई पार्टी, बड़े नेता जातिगत आधार पर भी अपनी-अपनी पसंद के दावेदारों के लिए 'ऊपर तक लॉबिंगÓ से परहेज नहीं करते हैं। अपनी पसंद के कार्यकर्ता को टिकट के लिए जोरआजमाइश चल रही है। हर कोई अपनी-अपनी ताकत लगा रहा है।

निर्विवाद तौर पर मेवाड़ में भाजपा के सबसे बड़े नेता गुलाबचंद कटारिया, राजसमंद में सांसद दीया कुमारी का सबसे ज्यादा प्रभाव माना जा रहा है। इस बीच यहां की दिग्गज नेता किरण माहेश्वरी के निधन के बाद पार्टी में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर बैठे बड़े नेताओं में अब भी उनके खेमे की दावेदारी को तवज्जो मिल रही है। कांग्रेस में भी स्थानीय स्तर पर व प्रदेश में कई खेमे हैं, लेकिन वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच मोटे तौर पर कोई राजनीतिक खींचतान नहीं होने से कांग्रेस में टिकट का फैसला ज्यादा आसानी से होगा, ऐसा माना जा रहा है।

भाजपा के टिकटार्थी
इन्हें कटारिया के समर्थन की आस : प्रमोद सामर राजनगर मूल के हैं। उदयपुर में अर्से से कटारिया के साथ राजनीति में सक्रिय हैं। उनके विश्वस्त माने जाते हैं। दूसरे मार्बल कारोबारी महेन्द्र कोठारी हैं। कटारिया की प्राथमिकताओं और पसंद के मुताबिक इन्हें भी दावेदार माना जा रहा है। तीसरे दावेदार राजसमंद के पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष अशोक रांका भी हैं। हालांकि उनके नाम की ज्यादा चर्चा नहीं है।
ये दीया के भरोसे : पूर्व सांसद हरिओम सिंह राठौड़ के पुत्र कर्णवीर सिंह प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। हरिओम कटारिया के काफी नजदीकी व राजसमंद में उनके सबसे भरोसेमंद माने जाते थे। अब कर्णवीर के लिए हरिओम सिंह गुट व सांसद दीया कुमारी का खेमा जोर लगा रहा है। तत्कालीन सांसद राठौड़ के निधन क बाद हरिओम गुट का एक तरह से दीया कुमारी के खेमे में विलय हो गया। ऐसे में यह गुट पूरी तरह कर्णवीर के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है।
ये किरण खेमे से : दिवंगत किरण माहेश्वरी के गुट के स्थानीय नेता अब किरण की बेटी दीप्ति को मैदान में सक्रिय कर चुके हैं। चूंकि किरण की प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा में अच्छी पकड़ थी, ऐसे में ऊपर के नेताओं का भी साथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि राज्य में वसुंधरा राजे व भाजपा के मौजूदा प्रभावी नेताओं की खेमेबाजी में दीप्ति का दावा फंस सकता है।
इनके कईयों पर दांव : दावेदारों में शामिल भाजयुमो जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, गणेश पालीवाल, मार्बल कारोबारी मान सिंह बारहठ व दिनेश बड़ाला यूं तो किरण गुट के माने जाते हैं, लेकिन बदलती परिस्थितियों में इन्होंने कटारिया, दीया कुमारी व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया से भी सम्पर्क साधा है। इसके अलावा हरिओम गुट के नंदलाल सिंघवी भी पुराने कटारिया के भरोसे टिकट की नैया पार लगने की उम्मीद पाले बैठे हैं।

कांग्रेस में ये हैं दावेदार
अशोक गहलोत : पहले वैभव गहलोत का नाम खूब उछला, लेकिन अब उनके नाम की चर्चाएं थमती दिख रही हैं।
सीपी जोशी : वह संवैधानिक पद पर हैं, लेकिन कांग्रेस में अब भी उनका खासा प्रभाव है। राजसमंद उपचुनाव में उनकी पसंद को पार्टी दरकिनार नहीं कर सकती है। मार्बल कारोबारी महेश प्रताप सिंह व तनसुख बोहरा और पूर्व सभापति आशा पालीवाल को उनके प्रभाव का फायदा मिलने की आस है।
ये भी कतार में : पूर्व जिला प्रमुख नारायण सिंह भाटी दूसरी बार टिकट मिलने की उम्मीद में हैं। वे समन्वित राजनीति कर रहे हैं। गहलोत व सीपी दोनों से सम्बंध साधे हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर का फीडबैक ही उनका टिकट के लिए प्रदर्शन तय करेगा। इसके अलावा दिनेश बाबेल, शांतिलाल कोठारी, भगवत सिंह गुर्जर और कुछ नाम भी चर्चाओं में हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक आकाओं के जरिये दम लगा रखा है।

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