जिले में कहर ढा रहा कोरोना और अटक रही जांचें

लैब नहीं होने से दिन पर दिन बढ़ रहा जांच का संकट
औसत तीन दिन तक रिपोर्ट का करना पड़ रहा इंतजार
1500 से अधिक रिपोट्र्स अटकी

By: Aswani

Published: 31 Jul 2020, 09:59 PM IST

राजसमंद. जिले में इस समय औसत १५ कोरोना के नए मामले रोजाना आ रहे हैं। एक माह पहले यह दर करीब ४ थी। वहीं मर्ज बढऩे के साथ ही चिकित्सा विभाग ने जांचों का दायरा भी बढ़ा दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों की ट्रेसिंग हो सके और उनका उपचार हो सके, लेकिन जांचों का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है वैसे-वैसे उदयपुर लैब में भार बढऩे से रिपोर्ट आने का सिलसिला कमजोर होता जा रहा है। आलम यह है कि अब सर्वाधिक १५०० से ऊपर जांच रिपोट्र्स उदयपुर में पेंडिंग हैं और रोजाना पेंडिंग का यह आकड़ा घटने की बजाए बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बहुत आवश्यक है कि अब राजसमंद में सरकारी जांच लैब हो, तभी इस समस्या से निजात मिल सकता है। हालांकि बीच में इस बात की चर्चा भी चली कि शीघ्र ही यहां जांच लैब होगी, लेकिन मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।


बढ़ता जा रहा अंतराल
शुरुआती दिनों में जांच रिपोर्ट ८ से १२ घंटे के मध्य आती थी, फिर ये समय दो दिन हो गया, लेकिन अब उदयपुर में लगातार रिपोर्टें फंसती जा रही हैं, जिसके चलते करीब १५०० लोग जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं। राजसमंद में ४८-४८ घंटे बाद भी रिपोर्टंे नहीं आ पा रही हैं। दरअसल कोरोना का खौफ जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जांचों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है, लेकिन राजसमंद की जांच रिपोर्टें उदयपुर से आने के कारण न केवल यहां अपर्याप्त सैम्पलिंग हो रही है, बल्कि जो हो रही है उसकी भी समय पर रिपोर्ट नहीं आती। उदयपुर में प्राथमिकता से वहां के मामले लिए जाते हैं, ऐसे में राजसमंद सहित अन्य जिलों के सैम्पलों की बारी नहीं आ पाती। जबकि जिले में औसत ३०० जांचे ही हो रही हैं, बावजूद इसके रिपोर्ट औसत २५० की ही रोजाना आ पाती है। जिसके चलते रोजाना जांच रिपोट्र्स की पेंडिंग बढ़ती जा रही है।


कोरोना ने पकड़ा जोर
अप्रेल, मई और जून की तुलना में जुलाई में कोरोना ने जोर पकड़ा है, इस महीने अभी तक औसत १५ मरीज रोजाना सामने आए हैं। ऐसे में इन मरीजों के सम्पर्क में आने वाले संदिग्धों और बाहर से आने वाले प्रवासियों की सैम्पलिंग रोजाना बढ़ जाती है। सैम्पल लेते ही संदिग्ध के मन में कई सारे ख्याल आने लगते हैं और वह मानसिक प्रताडि़त होता है। साथ ही जो पॉजिटिव होते हैं उनके सम्पर्क के लोगों की टे्रसिंग में काफी देरी हो जाती है, जिससे कई मरीज बढ़ जाते हैं। इन दिनों भीम, नाथद्वारा और राजसमंद और आमेट ब्लॉक में मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है।


निजी लैब खुल पर नहीं मिला फायदा
जिले में संचालित एक मेडिकल कॉलेज में गत दिनों कोरोना जांच के लिए एक निजी लैब को मंजूरी भी मिली। तब लोगों को लगा कि शायद अब जांच रिपोट्र्स अब यहां से आने लगेंगी, जिससे १२ घंटे में कोरोना के परिणाम सामने आ जाएंगे। लेकिन उद्घाटन के बाद पता चला कि यहां सिर्फ निजी जांचे ही होंगी। यदि यहां कोई जांच करवाएगा तो उसे करीब २२०० रुपए का भुगतान करना होगा। ऐसे में राजसमंद की समस्या जस की तस रह गई। लैब खुलने के बाद भी आम आदमी को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा।


95 दिन में 617 मामले
राजसमंद जिले में २१ मार्च को लॉकडाउन लगा था। २५ अपे्रल को यहां एक कोरोना का पॉजिटिव मामला सामने आया। उसके बाद एक-एककर मामले बढ़े, मई के मध्य में संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई और जून में फिर मामले कुछ कम हो गए, लेकिन जुलाई में कोरोना का खतरा काफी बढ़ गया। जिसके चलते पिछले ९५ दिनों में यहां सवा छह सौ मरीज हो गए हैं।

Aswani Reporting
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