वन्यजीव आंकलन में भी दिखा लॉकडाउन का असर, अधिक दिखे पैंथर

-10 से 30 फीसदी ज्यादा नजर आए वन्यजीव
-भालुओं की संख्या में कमी
-5 जून को हुआ था वन्यजीव आंकलन
-चौथे साल भी नजर नहीं आया चीतल

By: Aswani

Published: 22 Jun 2020, 05:10 PM IST

राजसमंद. लॉकडाउन के दौरान शांत हुए वातावरण का असर वन्यजीव आंकलन में नजर आया है। पांच जून को हुए इस आंकलन में गत पांच वर्षों के मुकाबले शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के वन्यजीव अधिक देखे गए। इसमें पैंथर, सांभार, सियार सहित विभिन्न प्रजाति हैं। हालांकि भालुओं की संख्या में कुछ कमी देखी गई है। साथ ही जंगलों में इसबार भी चीतल का कुनबा नहीं देखा गया। चीतल लगातार चार सालों की वन्यजीव गणना में कुंभलगढ़ अभयारण्य में नजर नहीं आया।


चार वर्ष से नहीं दिखे चीतल
वन्यजीवों की गणना को भले ही विभाग पूरी तरह से सही नहीं मानता हो और यही वजह है कि अब वन्यजीव गणना को आंकलन का नाम दे दिया गया है। लेकिन कुछ भी इस दौरान उनका नजर न आना उनकी संख्या में आई कमी को स्पष्ट करता है। वर्ष २०१७ की वन्यजीव गणना में कुंभलगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में २२ चीतल नजर आए थे, इससे पूर्व २०१६ में ८ और २०१५ में 6 चीतल नजर आए थे, लेकिन उसके बाद से एक भी चीतल गणकों को गणना के दौरान नहीं दिखा। वहीं रावली टाडगढ़ में पहले से ही इनकी कमी रही है। पिछले पांच वर्षों में वह नजर नहीं आए हैं। गौरतलब है कि चीतल की त्वचा का रंग हल्का लाल, भूरे रंग का होता है और उसमें सफेद धब्बे होते हैं। पेट और अंदरुनी टांगों का रंग सफेद होता है। चीतल के सींग, जो कि अमूमन तीन शाखाओं में घुमावदार होते हैं। चीतल बाघ, पैंथर का प्रिय शिकार होता है।

पैंथर की संख्या बढ़ी
इसबार लॉकडाउन के तहत शांत हुए वातावरण के चलते जंगलों में वन्यजीवों की चहल कदमी बढ़ी है। जिसका असर पांच जून को हुए वन्यजीव आंकलन में नजर आता है। आंकलन के दौरान कुंभलगढ़ और रावली टाडगढ़ के जंगलों से पैंथरों की संख्या में गत पांच वर्षों के मुकाबले इजाफा हुआ है।

भालुओं की संख्या में कमी
इसबार वन्यजीव आंकलन में गतवर्ष के मुकाबले भालुओं की संख्या में कुछ कमी देखी गई है। हालांकि इसबार भी बादल छाए रहने से गणकों को वन्यजीवों को पहचानने में समस्याएं हुई थीं। और भालू काले रंग का होता है, ऐसे में भालू जबतक नजदीक नहीं आता तबतक उसे साफ नहीं देखा जा सकता।

Aswani Reporting
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