रिपोर्ट 'रामजाने'... और इलाज खुद के ही भरोसे!

खमनोर ब्लॉक में पसरी अव्यवस्थाएं: 3-3 दिन तक अस्पताल में ही पड़े रहते सैंपल, 5-7 दिन में आ रही रिपोर्ट, बीमारों को समय पर न दवा मिल रही, न कोई पूछ रहा खैरियत

By: jitendra paliwal

Published: 04 May 2021, 12:26 PM IST

गिरीश पालीवाल @ खमनोर (राजसमंद). कहने को तो कोरोना से जंग लड़ी जा रही है, लेकिन हैल्थ सिस्टम खुद जंग खाए बैठा है। ब्लॉक मुख्यालय के सीएचसी पर कोरोना सैंपलिंग के हालात ये हैं कि लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों के लिए गए नमूने दो से तीन दिन तक सीएचसी पर ही पड़े रह हैं। सैंपल कलेक्शन की रिपोर्ट दूसरे और तीसरे दिन ऑनलाइन की जा रही है। जबकि सैंपल देने वाले लक्षणों से ग्रसित और बिना लक्षणों वाले मरीज अपने पॉजिटिव या निगेटिव होने के बारे में जानने को रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और आलम ये है 5-7 दिन तक रिपोर्ट ही नहीं आ रही है

खमनोर कस्बे में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना की सैंपलिंग, ऑनलाइन रजिस्टे्रशन व रिपोर्टिंग के काम में तीन कार्मिकों को लगा रखा है, लेकिन एक कार्मिक पिछले दस दिनों से अवकाश पर है। एक कार्मिक सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक सीएचसी पर सैंपलिंग का काम कर रहा है। उसके बाद फील्ड में नरेगा साइटों और पॉजिटिव आने वालों की कांटेक्ट हिस्ट्री में आए लोगों की सैंपलिंग के लिए दौड़ रहा है। जबकि नरेगा साइट का भी समय एक बजे तक ही है। ऐसे में एक ही समय में एक ही कार्मिक दोहरे मार्चे पर जिम्मेदारियों से जूझ रहा है। दूसरी ओर सैंपलों को नाम, पते, मोबाइल नंबर सहित ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने वाला एक ही कम्प्यूटर ऑपरेटर होने से दिनभर में कलेक्ट होने वाले सभी सैंपल समय पर ऑनलाइन नहीं हो पा रहे है। एक ऑपरेटर दिनभर में अधिकतम 50-60 सैंपल ही ऑनलाइन दर्ज कर पा रहा है, जबकि सप्ताह में कभी-कभार सैंपलिंग का आंकड़ा डेढ़ सौ से भी पार जा रहा है। ऐसे में दो और तीन दिन तक सैंपल ऑनलाइन नहीं हो पा रहे हैं। नमूनों की जांच में देरी, रिपोर्ट भी देरी से आने तक मरीजों के गफलत में रहने और फिर वक्त पर इलाज शुरू नहीं होने पर मरीज के गंभीर स्थिति में पहुंचने का भी खतरा हो सकता है।

मरीजों को धूप में खड़ा रहना पड़ रहा
सैंपलिंग के लिए कस्बे और आसपास के गांवों से आ रहे मरीजों को अपनी बारी के इंतजार में धूप में खड़े रहना पड़ रहा है। सीएचसी पर आ रहे मरीजों को अपनी बारी आने तक कुछ देर बैठने के लिए भी छांव नहीं मिल रही है। बुखार, जुकाम, खांसी व बदन दर्द से पीडि़त से परेशान मरीजों को काफी देर तक पैरों पर खड़ा रहना पड़ रहा है। मरीजों के बीच दूरी और बाकी एहतियातों की भी पालना नहीं हो पा रही है। सैंपल कलेक्शन खिड़की गली में होने से 'पॉजिटिव-निगेटिवÓ एक ही लाइन में खड़े रखे जा रहे हैं।

कहीं महंगी ना पड़े ये लापरवाही
सैंपलिंग के मामले में सबसे ज्यादा उदासीनता देखी जा रही है और कार्मिकों की कमी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। विभाग की ये लापरवाही कोरोना से दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हालातों को और गंभीर बना सकती है, क्यों कि सैंपलिंग देने वालों को लेकर भी कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। सैंपल देने वाला कोई संदिग्ध मरीज यदि घर से बाहर भी आ-जा रहा है तो उस पर निगरानी नहीं की जा रही है। ऐसा ही हाल पॉजिटिव आने वालों के मामले में भी है। कई पॉजिटिव मरीजों से बातचीत में सामने आया है कि विभागीय अधिकारी और कार्मिक संक्रमण को रोकने को लेकर जो व्यवस्थाएं और सिस्टम में चुस्ती होनी चाहिए वह कहीं नहीं दिखाई दे रही है। लोग पिछले साल आई कोरोना की पहली लहर को रोकने के लिए क्वारेंटीन सेंटरों, कोविड सेंटरों, घर-घर सर्वे, सैंपलिंग, दवाओं आदि के प्रयासों को बेहतर मान रहे हैं

पसोपेश में मरीज, क्या करें-क्या ना
पसोपेश में मरीज न तो कोरोना का इलाज समय पर ले पा रहे हैं और न विभाग रिपोर्ट आने तक या उसके बाद उनकी खैरियत पूछ रहा है। कई मरीजों ने तो कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी विभागी की ओर से खैरियत नहीं पूछने की शिकायत की है। कई मरीजों को दवाएं भी देर से मिलीं। अधिकांश मरीज होम आइसोलेशन में हैं और अपनी सजगता से ही रिपोर्ट आने से पहले इलाज लेकर गंभीर होने से बचने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

तीन दिन के सैंपल एक साथ भेजे
खमनोर सीएचसी द्वारा पिछले तीन दिनों में एकत्र सैंपल पड़े रहने का मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने पर सोमवार को सभी सैंपल आनन-फानन में ऑनलाइन किए और फिर देर शाम करीब साढ़े आठ बजे एक साथ नाथद्वारा लैब में जांच के लिए भेजे गए। 1 मई को 193, 2 मई को 20 व 3 मई को 67 सैंपल एकत्र हुए थे। बामनहेड़ा ग्राम पंचायत से एकत्र सैंपल में भी ऐसी ही लापरवाही सामने आई थी। बामनहेड़ा से 30 अप्रेल को लिए गए 87 सैंपल तीन दिन तक खमनोर सीएचसी में ही पड़े रहे, जिन्हें रविवार को दर्ज कर नाथद्वारा लैब में भेजे।

मैन पॉवर नहीं, घटानी पड़ी सैंपलिंग
कार्मिकों की कमी के कारण मजबूरी में सैंपलिंग घटानी पड़ गई है। पिछले दो दिनों यानि 2 व 3 मई को सिर्फ सीएचसी पर आने वाले संदिग्धों की ही सैंपलिंग हो पाई, जबकि नरेगा साइटों पर श्रमिकों से एवं फिल्ड में मरीजों के सैंपल लेने का काम दो दिन से ठप पड़ा है। सोमवार को ब्लॉक की बागोल ग्राम पंचायत में नरेगा की सैंपलिंग के लिए टीम को जाना था, मगर इसी खामी के कारण नहीं टीम नहीं जा पाई। अधिकारी व्यवस्थाएं सुधारने की बात कह रहे हैं।

एक्टिव केस: 467
खमनोर ब्लॉक में इस समय कुल 467 कोरोना के एक्टिव केस हैं। सोमवार को आई रिपोर्ट के अनुसार 237 सैंपल में से 35 लोग संक्रमित मिल हैं। राजसमन्द के बाद खमनोर ब्लॉक में कोरोना मरीजों में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिल रही है।

व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए हैं
सैंपल देने वालों की तादात में अचानक इजाफा होने से कलेक्शन का लोड बढ़ गया है। अतिरिक्त स्टाफ लगवाकर सीएचसी की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए हैं। नरेगा श्रमिकों की सैंपलिंग के लिए अलग से टीम बनाई जाएगी।
डॉ. खुशवंत जैन, बीसीएमओ, खमनोर

स्टाफ की कमी के कारण सैंपलिंग और रिपोर्टिंग में समस्या आई है। सीएचसी पर सैंपल लेने, लैब में भिजवाने सहित सभी प्रकार की व्यवस्था में सुधार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. संजय जारवाल, सीएचसी प्रभारी

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