Video - घाटा खाकर व्यवसाय करने को मजबूर

शृंखला - लॉकडाउन - ये है गांव के हाल
- सब्जी उत्पादकों के समक्ष खड़ी हुई समस्या

By: Rakesh Gandhi

Published: 23 Apr 2020, 05:09 PM IST

योगेश श्रीमाली
कुंवारिया. क्षेत्र में छह माह पूर्व जब हरी सब्जियों के भाव आसमान छूने लगे थे, दो किसानों ने सोचा कि इस बार क्यों न हरी सब्जियों की पैदावार बढ़ा दी जाए। पर उन्हें कहां पता था कि कोरोना नाम की महामारी उनकी मेहनत पर पानी फेर देगी। लॉकडाउन के चलते इन दिनों हालात ये है कि मांग न होने से सब्जियों का उठान कम हो गया है और दाम भी औंधे मुंह गिर चुके हैं।
कुंवारिया निवासी किशनलाल कीर ने बताया कि कुछ माह पहले अच्छे भावों को देखते हुए खेत में लोकी, तुरई, ककड़ी, बैंगन आदि सब्जियों की पैदावार शुरू करने की मानसिकता बनाई तथा परिवार वालों ने भी पूरा सहयोग किया। नतीजा ये रहा खेतों में बड़े पैमाने पर सब्जियां तैयार हो गई। पर जिस उम्मीद से ये सब किया, सबकुछ उल्टा हो गया। लॉकडाउन के कारण इन सब्जियों के भाव इतने औंधे मुंह गिर चुके हैं। हालत इतनी पतली हो चुकी है कि इन धरती पुत्रों को सब्जियों की फसल की लागत वसूल नहीं हो पा रही। ऐसे में किसान कौडिय़ों के दाम पर अपनी फसल बेचने को विवश हैं।
सब्जी विक्रेता किशनलाल, रामलाल, लक्ष्मणलाल, मांगीलाल आदि ने बताया कि सब्जियों के दाम हरे चारे के बराबर होने लगे हैं। एक बीगा खेत में सब्जी की फसल के लिए पूरे परिवार की मेहनत के अलावा 30 से 40000 खर्च हो चुका है, लेकिन वर्तमान में प्रतिदिन सब्जियों से एक हजार रुपए तक भी नहीं मिल रहे। ऐसे में सब्जियों का उत्पादन घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
गलवा गांव में सब्जी का उत्पादन कर कुंवारिया में बेचने के लिए आने वाले युवा किसान अर्जुनलाल सालवी व किशनलाल सालवी ने बताया कि बड़ी मेहनत व विपरीत मौसम में सब्जियों की फसल को तैयार किया, लेकिन वर्तमान में भाव काफी नीचे आ गए हैं। ऐसे में गलवा गांव से सब्जियां लेकर कुंवारिया लाकर बेचना महंगा पड़ रहा है। कुल मिलाकर लॉकडाउन ने इन किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। किसान औने-पौने दामों पर भी सब्जियां इसलिए बेच रहे हैं ताकि अगली फसल के लिए राशि जुटा सके और सब्जियां भी खराब न हो।

Rakesh Gandhi
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned