श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर नाथद्वारा में तोप और कांकरोली-चारभुजा में 21 बंदूको से दी सलामी

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर नाथद्वारा में तोप और कांकरोली-चारभुजा में 21 बंदूको से दी सलामी

Laxman Singh Rathore | Publish: Sep, 04 2018 12:40:03 PM (IST) Rajsamand, Rajasthan, India

श्रीनाथजी, श्री द्वारकाधीश व चारभुजानाथ में विविध अनुष्ठान

राजसमंद. कृष्णजन्माष्टमी का पर्व सोमवार को जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आधी रात को जिले के प्रमुख कृष्ण मंदिर श्रीनाथजी, द्वारकाधीश व चारभुजा पर जन्मोत्सव की बधाई गूंज उठी। मंदिरों में तोप, व बंदूकों से सलामी देकर भगवान कृष्ण के आगमन की खुशी मनाईगई। पुष्टिमार्ग तृतीय पीठ प्रन्यास प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान कृष्ण का जन्म दिवस बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर प्रभु को मंगला के दर्शनों के उपरांत पंचामृत स्नान करवाया गया, प्रभु को दूध, दही, घी, शहद, शक्कर व जल से पंचामृत स्नान करवाया गया। बाद में शृंगार के दर्शनों में प्रभु के मस्तक पर श्वेत बड़े साज की कूले जिस पर तेरा चंद्रिका का सादा जोड़, केसरी डोरिया का चाकदार वाघा, लाल अतलस की सूथन, लाल कटी को पटका, हीरा, पन्ना, मानक के आभरण, 3 जोड़ी का लाल सूत्र, हरिपाठ के ठाड़े वस्त्र धराए गए। वहीं जन्माष्टमी के उपलक्ष में शृंगार में प्रभु के मस्तक पर तिलक धराया गया बाद में राजभोग के दर्शन में द्वारकेश गार्ड वह द्वारकेश बैंड वि_ल विलास बाग से परेड करते हुए द्वारकाधीश मंदिर पहुंचे। यहां गोवर्धन पूजा चौक में परेड द्वारा सलामी दी गई, रात्रि 10 बजे जागरण के दर्शन खोले, जो 11.45 बजे तक चलते रहे। ठीक 12.15 बजे प्रभु कृष्ण का जन्म हुआ, जैसे ही जन्म के दर्शन खुले, वैसे ही द्वारकेश गार्ड ने बंदूकों की सलामी के साथ प्रभु का स्वागत किया। वहीं भक्तजन नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारे लगाने लगे। इन दर्शनों को करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु द्वारकाधीश मंदिर पहुंचे।

चारभुजा : सलामी के साथ खुले पट तो गूंजे जयकारें
चारभुजा. धर्मनगरी स्थित चारभुजानाथ के मंदिर में सोमवार को जन्माष्टमी पर रात सवा बारह बजे तोप की सलामी के साथ पट खुले। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ..., के जयकारे के साथ ठाकुरजी के दर्शन किए। पर्व को लेकर मंदिर पर आकर्षक डेकोरेशन किया गया है। जन्माष्टमी पर चारभुजा मंदिर में सुबह से दर्शनार्थियों की कतारें लगी रही। शाम को संध्या आरती के बाद डेढ़ घन्टा दर्शन बन्द रहे तथा 9.45 बजे से 10.30 बजे तक दर्शन खुले रहे। पर्व को लेकर मंदिर में केलंों व आम्र पत्तों से बांधनवार कर सजाया गया। पुजारियों ने हरजस के गायन व स्तवन किए। इस दौरान मंदिर के बाहर कृष्ण जन्मोत्सव की इन्तजार मे श्रद्धालु श्रद्धाभाव से खड़े रहे। इसके बाद मध्य रात्रि ठीक 12.15 बजे देवस्थान विभाग के सिपाही ने तोप दागी व सायरन बजाया गया, जिसके साथ ही मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव के दर्शन खुल गए।इन दर्शनों में कृष्णलला को चांदी के पालने में झुलाया गया। बाल प्रतिमा के समक्ष चांदी की गायों व बछड़ो ंको भी धराया गया। जन्मोत्सव पर पुजारियों ने बधावे भी गाए। पंचामृत व पंजरी का प्रसाद बांटा गया। दर्शन रात्रि 12.30 बजे बन्द हुए।

नाथद्वारा : तोप से 21 बार दी सलामी
नाथद्वारा. पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ विश्व प्रसिद्ध प्रभु श्रीनाथजी की नगरी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार अपार श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस दौरान मंगला के दर्शन में श्रीजी बावा को पंचामृत से स्नान कराया गया। वहीं, रात्रि को १२ बजे २१ तोपों की सलामी दी गई। आराध्य प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में सोमवार प्रात: पौने ५ बजे मंगला की झांकी के दर्शन खुले, जिसके बाद तिलकायत राकेश महाराज के द्वारा श्रीजी बावा की आरती उतारी। इसके बाद श्रीजी बावा को पंचामृत स्नान कराने के लिए तिलकायत ने बावा के श्रीभाल पर कुमकुम का तिलक किया, तत्पश्चात् उनके पुत्र विशाल बावा के साथ ठाकुरजी को स्नान द्वारा कराया गया। इसी प्रकार निधि स्वरूप लाड़ले लालन को भी पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके पश्चात् प्रभु को चन्दन आंवला एवं फुलेल सुगन्धित तेल से अभ्यंग स्नान भी कराया गया। मंदिर के पंड्या डॉ. परेश नागर के द्वारा वर्ष पत्र भी पढ़ा गया। लगभग ढाई घंटे से भी अधिक समय तक चले पंचामृत स्नान के दर्शन में अपार जनसैलाब भी दर्शन को उमड़ा।

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