बागवानों के रहते जमीन बंजर, वैष्णवों के गोद लेते ही हुई उपजाऊ

बागवानों के रहते जमीन बंजर, वैष्णवों के गोद लेते ही हुई उपजाऊ

Laxman Singh Rathore | Updated: 20 May 2019, 12:12:49 PM (IST) Rajsamand, Rajsamand, Rajasthan, India

श्रीनाथजी मंदिर के उद्यान विभाग की नाकामियत आई सामने, सैकड़ों के स्टाफ पर लाखों खर्च, फिर भी उपज मामूली

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

श्रीनाथजी मंदिर मंडल के उद्यान विभाग में बागवान, कृषि विशेषज्ञ, अधीक्षक से लेकर सैकड़ों की तादाद में कामगार होने के बावजूद बाग में समुचित खेती नहीं हो पा रही है। उजड़ते उद्यानों पर चिंता जताते हुए विशाल बावा की पहल पर वैष्णवों ने चार उद्यान गोद लिए, तो उन्हीं बागों में हरी घास और फूलों की पैदावार होने लगी है। इसके साथ ही उद्यान विभाग की नाकामियत खुलकर सामने आ गई। फिर भी बेपरवाह बागवान व कामगारों के विरुद्ध मंदिर मंडल द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

मंदिर के उद्यान विभाग के अफसर, कार्मिकों की अनदेखी के चलते भरपूर पानी व ऊपजाऊ मिट्टी होने के बावजूद बागों में पैदावार न के बराबर रह गई है। विभाग में कृषि विशेषज्ञ, अधीक्षक, जमादार, मुनीम, हैड बागवान, बागवान, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के साथ किसानों की लंबी फौज नियुक्त है, जिनके वेतन पर मंदिर मंडल द्वारा लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी दिनोंदिन बागों की उपज घटती जा रही है। उजड़ते उद्यानों की दशा सुधारने के लिए विशाल बावा की प्रेरणा से मुम्बई व गुजरात के वैष्णवों ने बाग के कुछ हिस्से को गोद लेकर खेती शुरू की है। मंदिर के 12 बाघ होने के बावजूद हरी घास, सब्जी, फल, फूल आदि बाजार से खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे उद्यान विभाग की कार्यशैली सामने आ गई।

निचली ओडन बाग में उगाए फूल
निचली ओडन स्थित बाग में वैष्णवों ने गोद लेकर विभिन्न प्रजाति के फूलों की खेती शुरू की। बाग में फूलों का उत्पादन कर श्रीनाथजी की सेवा में नि:शुल्क भेजी जा रही है। खेती का सारा खर्च वैष्णव ही वहन कर रहे हैं।

चलने-फिरने में अक्षम बागवान
निचली ओडन में बागवान शारीरिक रूप से भी अक्षम है, जो चलने- फिरने में भी अक्षम है। कामगारों ने बताया कि बागवान को प्रतिदिन बाइक पर घर से परिजन छोडक़र जाते हैं, जो दिनभर खाट पर बैठे रहते हैं और शाम को परिजन बाइक लेकर आते हैं व घर ले जाते हैं। इससे पूरे मंदिर मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गोद में बेतूकी शर्तो से वैष्णव भी नाराज
बाग का कुछ हिस्सा गोद लेकर हरी घास, फल, सब्जी उगाने के लिए कई वैष्णव तैयार है, मगर श्रीनाथजी मंदिर मंडल की बेतूकी शर्तों की वजह से कई वैष्णव आगे नहीं आ रहे हैं। नाथुवास गौशाला के पास वन विहारी बाग को वैष्णव परेश भाई ने गोद लिया। इजरायली टैक्नोलॉजी हाइड्रोपॉनिक्स द्वारा ग्रीन हाउस बनाकर हरी घास पैदा करने वाले थे, जिसका विशाल बावा द्वारा भूमि पूजन कर श्रीगणेश किया, मगर मंदिर मंडल बेतूकी शर्तों की वजह से वैष्णव ने कार्य करने से मना कर दिया। फिर परेश भाई ने नाथद्वारा में गणेश नगर स्थित पीयूष शर्मा के खाली भूखंड में उक्त प्रोजेक्ट स्थापित कर हरी घास उगाई और गायों को नियमित भेजी जा रही है। इसी तरह निचली ओडन बाग के मुखियाजी की बाडी में वैष्णव मनोज मोदी को गोद दिया। मोदी द्वारा हरी घास, सब्जी व फलों का उत्पादन शुरू किया। बाद में मंदिर मंडल की तथाकथित शर्तों व कारणों से मनोज मनोदी ने कार्य करने से इनकार कर दिया।

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