MEWAR HISTORY : नेताओं ने मेवाड़ इतिहास की गाथाओं का गुणगान करते हुए कहा कि राजाओं ने किले बनवाए, संरक्षण हमने किया

राठौड़ ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चित्तौडग़ढ़ के 10 किमी दायरे में खनन रुकवाने हम सुप्रीम कोर्ट तक लड़े।

By: laxman singh

Updated: 15 Jan 2018, 03:04 PM IST

देवगढ़. महाराणा कुंभा की 601 वीं जयंती पर देवगढ़ के समीप मदारिया-माल्यावास में महाराणा कुंभा जन्मभूमि सेवा समिति की ओर से आयोजित मेवाड़ महाकुंभ में हजारों की तादाद में लोग पहुंचे। पूरे मेवाड़ से लोग दुपहिया-चौपहिया वाहनों में बैठकर आए। समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह उदयपुर से हेलीकॉप्टर से पौने दो बजे सभास्थल के पास बने हेलीपेड पर उतरे, जहां उन्हें गार्डऑफ ऑनर दिया गया। यहां से वह माल्यावास स्थित चामुंडा माता के मंदिर पहुंचे, जहां दर्शन किए तथा वहां कुम्भा की जन्मस्थली को नमन किया। बाद में काफिले के साथ सभास्थल पहुंचे। अतिथियों ने महाराणा कुंभा के छायाचित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित कर नमन किया। समारोह में राजनाथ सिंह ने महाराणा कुम्भा के व्यक्तित्व-कृतित्व को बार-बार उल्लेखित किया और कहा कि वह एक साम्राज्य के ही नहीं थे, बल्कि एक महान संस्कृति संस्थापक थे। संगीत, कला, साहित्य और स्थापत्य कला में उनकी गहरी रुचि थी, लेकिन कम लोग जानते हैं कि वेद-उपनिषद का भी उन्होंने गहन अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि राजाओं ने युद्ध लड़े, वे शक्ति प्रदर्शन की प्रतियोगिताएं रही। जीतने के बाद आक्रमणकारियों को क्षमा देने की परम्परा इस धरती की रही है। पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गौरी को कितनी बार क्षमादान दिया, इससे आप परिचित हैं। मगर नीयत का खेल देखिए। भारत के पराक्रम की अभिव्यक्ति किसी राज्य की धरती पर अगर हुई, तो वह राजस्थान है। उन्होंने कहा कि सिंध से सोमनाथ तक आने में विदेश आक्रमणकारियों को साढ़े 300 वर्ष लग गए। वह इस वजह से कि राजस्थान में बप्पा रावल जैसे शासक थे। अनेक राजाओं के महान पराक्रम की वजह से यह सम्भव हुआ।

राजाओं ने किले बनवाए, संरक्षण हमने किया- राठौड़
पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि लोग इतिहास की जिस विभूति को भुला चुके, उसे आयोजन समिति जनस्मृतियों में लेकर आई। उन्होंने कहा कि मेवाड़ की माटी में मान, मर्यादा, त्याग-तपस्या छुपी हुई है। कुम्भा द्वारा बनाए कुम्भलगढ़, चित्तौडग़ढ़, अचलगढ़ किलों को अद्भुत बताया और कहा कि इन विरासतों का निर्माण महाराणाओं ने किया, लेकिन उनके संरक्षण की जिम्मेदारी हमारी सरकार ने निभाई। राठौड़ ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चित्तौडग़ढ़ के 10 किमी दायरे में खनन रुकवाने हम सुप्रीम कोर्ट तक लड़े। पूर्ववर्ती सरकार ने बंदरों की वजह से किले को नुकसान पहुंचने का दावा किया, जो हास्यास्पद है। इतिहास को पुनर्जीवित करने का कार्य हमारी सरकार ने किया है।उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने कहा कि भैंरोसिंह शेखावत सरकार से लेकर वर्तमान सरकार तक ने राजस्थान की ऐतिहासिक भूमियों और वीरांगनाओं, महापुरुषों के यादगार स्थलों को संभाला और उन्हें संवारा। भाजपा सरकारों ने इतिहास को जीवित रखने का प्रयास किया है। धरोहर संरक्षण प्राधिकरण अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत ने राजस्थान के वीर योद्धाओं, वीरांगनाओं से जुड़े महत्वपूर्णस्थलों की ऐतिहासिक जानकारी दी तथा उनके विकास की राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र किया।

साहित्य, कला और शौर्य में राणा कुम्भा का अपूर्व योगदान
सांसद हरिओम सिंह राठौड़ ने कहा कि महाराणा कुम्भा को हमने अब तक भुलाए रखा, आज उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा रही है इतना बड़ा आयोजन करके। राणा कुम्भा का साहित्य, कला और शौर्य में अपूर्व योगदान रहा है। समारोह को मगरा विकास बोर्डअध्यक्ष हरिसिंह रावत तथा कुम्भलगढ़ विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़ ने भी सम्बोधित किया। मंच पर चित्तौडग़ढ़ सांसद सी.पी जोशी, ब्यावर विधायक शंकर सिंह रावत, देवगढ़ पूर्व राजघराने से रावत वीरभद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष भंवरलाल शर्मा सहित कई लोग उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति अध्यक्ष नारायणलाल उपाध्याय ने किया। हेलीपेड पर करणी सेना प्रमुख लोकेन्द्र सिंह कालवी, संभागीय आयुक्त भवानी सिंह देथा, जिला कलक्टर पीसी बेरवाल, जिला प्रमुख प्रवेश सालवी, केसाराम चौधरी, सभापति सुरेश पालीवाल आदि ने स्वागत किया।

हम कुम्भा को भूल गए, इन्होंने याद दिलाया : कटारिया
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि हमारी सरकार ने हरेक महापुरुष, इतिहास पुरुष के भव्य स्मारक बनवाए, लेकिन महाराणा कुम्भा को भूल गए। कुम्भा की जन्मस्थली का ध्यान नहीं रहा। आयोजक समिति का शुक्रिया कि उस महान विभूति को हमें याद दिलाया। राज्य सरकार इस स्थान की भव्य रचना करेगी। आगामी बजट में इसकी घोषणा कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जब भी भाजपा की सरकार आई, ऐतिहासिक स्थलों को संवारा-विकसित किया गया। यह क्रम 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल से शुरू हुआ। ऐसा नहीं होता, तो नई पीढ़ी भूल जाती कि चावंड, गोगुन्दा, हल्दीघाटी क्या है। सरकार ने हमारी विरासत को फिर से जगाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राजपूतों का इतिहास महलों का सुख भोगने के लिए नहीं था, तलवारें लेकर दुश्मनों से दो-दो हाथ करने के लिए था। हमारे बच्चों को भी मेवाड़ का इतिहास पढ़ाना होगा।ं

laxman singh Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned