रामपाल का परिवार हो रहा पाई-पाई को 'मोहताज'

दो किडनी खराब होने से परिवार की स्थिति बिगड़ी, सप्ताह में दो बार हो रही डायलिसिस, परिवार की जिम्मेदारी उस पर, दोनों किडनी खराब होने के कारण सप्ताह में दो बार डायलिलिस कराने के लिए उदयपुर जाना पड़ता है

By: jitendra paliwal

Published: 13 Sep 2021, 07:00 PM IST

राजसमंद. कभी कैटरिंग का काम तो कभी खुली मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाला रामपाल आचार्य (३८) बीमारी के चलते पाई-पाई को मोहताज हो गया है। दोनों किडनी खराब होने के कारण सप्ताह में दो बार डायलिलिस कराने के लिए उदयपुर जाना पड़ता है। उन्हें दवाइयां तो सरकारी अस्पताल से मिल जाती है, लेकिन उसके अलावा अन्य दवाइयों और घर का खर्च चलाने के लिए वह दूसरों के आगे हाथ फैलाने को मजबूर हैं।
शहर के किसान मोहल्ला नया अखाड़ा निवासी रामपाल आचार्य पिछले १७ साल से किराए के मकान में रहते हैं। आचार्य ने बताया कि उन्हें दो साल पहले रक्तचाप बढऩे की शिकायत हुई थी। उसका उपचार लेने के बाद दोनों किडऩी खराब हो गई। पिछले एक साल से आर.के.राजकीय जिला चिकित्सालय और उदयपुर में उसका उपचार जारी है। घर में कमाने वाला अकेला होने के कारण अब उसके परिवार का लालन-पालन करना मुश्किल हो गया है। पत्नी छोटा-मोटा काम करती है, लेकिन वह भी नाकाफी साबित हो रहा है। उसके दो छोटे बच्चे है जो तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ते हैं। पारिवारिक स्थिति खराब होने के कारण अब उन्हें आगे पढ़ाना भी मुश्किल हो गया है। रामपाल ने बताया कि उसे सिर्फ राशन में दो रुपए किलो गेहूं मिलने के अलावा किसी प्रकार की सहायता भी नहीं मिल रही है।
७ से ८ हजार रुपए दवाइयों का खर्चा
रामपाल ने बताया कि डायलिसिस आदि की दवाइयां तो सरकरी अस्पताल से मिल जाती है। उन्होंने बताया कि पहले ९८ किलोग्राम वजन था, लेकिन अब बमुश्किल ४५ किलो रह गया है। डायलिसिस के बाद विटामिन सहित अन्य दवाइयां और उदयपुर आने-जाने का खर्चा सहित महीने में ७-८ हजार रुपए खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा घर खर्च अलग से है। अब तक जनसहयोग से काम चल रहा था, लेकिन अब वह भी मुश्किल हो गया है।
एक साल से नहीं लिया किराया
वह वर्तमान में रोशन खटीक के मकान में किराए पर रह रहा है। उन्हें भी एक साल पहले किडनी खराब होने की जानकारी होने पर उन्होंने किराया तक लेना बंद कर दिया है। पिछले एक साल से किराया नहीं ले रहे हैं और सहयोग कर रहे हैं।
परिवार की चिंता
रामलाल आचार्य को परिवार की चिंता सता रही है। उनका कहना है कि मेरे बाद इन परिवार का क्या होगा। उनके पास सिर छुपाने के लिए छत तक नहीं है और न ही कोई सरकारी सहायता मिल रही है। इसके कारण उसकी स्थिति और खराब होती जा रही है। किडऩी ट्रांसप्लांट का भी ११ लाख रुपए खर्च बताया है।

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