Video : मेहनत की तो खिल उठा बंजर भूमि में उद्यान

ग्रामीण जनप्रतिनिधि का नवाचार
--------------------------------
- सतत् देखभाल से पंच फल उद्यान बना आकर्षण का केंद्र
- फलों से लकदक होने लगे हैं पौधे
- पूरे जिले के लिए मॉडल बना कुरज का पंच फल उद्यान
- कई लोगों ने किया इस उद्यान का अवलोकन

By: Rakesh Gandhi

Published: 07 Sep 2020, 02:06 PM IST

योगेश श्रीमाली

कुंवारिया। राजसमंद जिले में कूरज कस्बे से खंडेल जाने वाले मार्ग के किनारे स्थित चरागाह की पथरीली और बंजर भूमि पर कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यहां पर कभी फलदायक पौधों का उद्यान विकसित हो सकता है। ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने कुछ अलग हटकर कार्य करने की ऐसी ठानी की कड़ी मेहनत एवं सतत् देखभाल से कभी चरागाह की बंजर भूमि से मात्र जहां चारा उगता था, वहां आज फलदार पौधों फल नजर आ रहे हैं।

कूरज ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच अनिल चौधरी ने वर्ष 2016 में चित्तौड़गढ़ जिले में पंच फल वृक्षारोपण कार्य का अवलोकन किया, जो कि सर्वप्रथम महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। कार्य की उपयोगिता से प्रेरित होकर पूर्व सरपंच चौधरी ने स्वयं की ग्राम पंचायत में अनुपयोगी पड़ी पड़त चरागाह भूमि पर पंच फल उद्यान विकसित करने का मानस बनाया। उन्होंने अपनी कार्ययोजना को ग्राम सभा में पूरे विस्तार से बताया, जिस पर ग्राम सभा में समस्त वार्ड पंच एवं कूरज कस्बे के प्रबुद्ध लोगों के द्वारा उक्त कार्य को ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में अनुमोदित कर वार्षिक कार्य योजना में सम्मिलित करते हुए कार्य स्वीकृत कराने का निर्णय किया गया।

पंचायत समिति रेलमगरा द्वारा उक्त कार्य को विस्तृत तकमीना तैयार कर कार्यक्रम समन्वयक एवं जिला कलक्टर राजसमंद को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए भिजवाया गया। जिला प्रशासन द्वारा स्वीकृति मिलने पर ग्राम पंचायत कूरज में खंडेल मार्ग पर स्थित चरागाह की भूमि पर 8 हेक्टेयर क्षेत्रफल में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत कार्य प्रारंभ किया गया। कार्य को जब प्रारंभ किया गया तो किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इतनी अधिक उसर, पथरीली एवं बंजर भूमि पर कभी फलदार पौधों के द्वारा धरती मां को हरियाली की चादर ओढ़ाई जा सकेगी।

ग्राम पंचायत के युवा सरपंच चौधरी ने वर्ष 2016 में महात्मा गांधी नरेगा योजना में श्रमिकों के मस्टररोल जारी कर पौधारोपण के लिए करीब दो हजार गड्ढे खुदवाए। इनमें अनार, पपीता, बेर, नींबू, अमरुद, केले, आंवला जैसे फलदार पौधे लगाए गए। साथ ही परिसर के चारों ओर तारबंदी कराई गई, ताकि मवेशी पंच फल उद्यान के पौधों को नुकसान ना पहुंचाए। ग्राम पंचायत के द्वारा निजी आय से कार्य स्थल पर पौधों को पानी की सुविधा के लिए नलकूप खुदवाया गया। पौधों की सुरक्षा निराई गुड़ाई एवं पानी पिलाने के लिए एक व्यक्ति को नियमित रूप से रखा गया। वर्तमान में पेड़ बन चुके इन फलदार पौधों पर फल आना प्रारंभ हो गया है। साथ ही आने वाले दो-तीन वर्ष के बाद इन पौधों से पर्याप्त फल प्राप्त होने लग जाएंगे। इस परिसंपत्ति सृजन से ग्राम पंचायत को लंबे समय तक निजी आय बढ़ेगी, साथ ही पौधारोपण से पर्यावरण संरक्षण का कार्य की बखूबी पूरा किया गया।

शुरुआत में रही समस्या..
पथरीली उसर एवं बंजर भूमि में पौधे कैसे वृद्धि करें, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल था, लेकिन कार्य योजना कुछ इस प्रकार से बनाई गई कि प्रत्येक पौधे के लिए एक बड़ा खड्डा तैयार किया गया। साथ ही प्रत्येक खड्डे में उपजाऊ मिट्टी एवं खाद का मिश्रण डाला गया। उसके बाद फलदार पौधे लगाए गए। फलदार पौधों की लगातार निराई गुडाई, खरपतवार को निकालने एवं कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया। साथ ही मौसम के अनुरूप इन पौधों की विशेष देखभाल की गई। उसी का परिणाम है कि पौधे वर्तमान समय तक जीवित भी है एवं फल देने लायक स्थिति में भी पहुंच गए हैं।

उद्यान को देखने पहुंच रहे हैं ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि...
कूरज ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित पंच फल उद्यान के फलने फूलने की जैसे-जैसे जानकारी लोगों तक पहुंच रही है, वैसे-वैसे ही जिले एवं जिले के बाहर के काफी संख्या में ग्रामीण एवं ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि कूरज पहुंचकर पंच फल उद्यान का अवलोकन कर रहे हैं। कई ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि तो कूरज के पूर्व सरपंच से पंच फल उद्यान की देखभाल करने की तकनीकी पर भी विस्तार से जानकारी ले रहे हैं।

इस पंच फल उद्यान से ग्राम पंचायत का मान बढ़ा
ग्राम पंचायत क्षेत्र में पर्यावरण से जुड़ा हुआ कुछ अलग कार्य करने की मंशा थी। ऐसे में चित्तौड़गढ़ में पंच फल उद्यान का अवलोकन किया तो मन में ऐसी भावना हुई की नवाचार करते हुए अपनी ग्राम पंचायत कूरज में भी कुछ विशेष किया जाए। इस परिकल्पना को पूरा करने में ग्राम पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधियों, गांव के प्रबुद्ध जनों व प्रशासन के अधिकारियों ने भी पूरा सहयोग किया। उसी का परिणाम है कि कूरज में पंच फल उद्यान फल फूल रहा है। वर्तमान में फलते फूलते पंच फल उद्यान की स्थिति को देखकर हृदय को असीम आनंद की अनुभूति होती है।
- अनिल चौधरी, पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत कूरज

साकार हुई कल्पना
पूर्व ग्राम पंचायत ने जो कार्य कराया है उससे पर्यावरण के साथ पंच फल उद्यान की कल्पना साकार हुई है। वर्तमान ग्राम पंचायत का पूरा प्रयास रहेगा कि पंच पल उद्यान पूरे जिले के लिए मॉडल उद्यान के रूप में अपनी पहचान बनाए।
- देउ चौधरी, सरपंच ग्राम पंचायत कूरज

सतत् देखभाल से संभव हुआ
ग्राम पंचायत के द्वारा नवाचार करते हुए पंच फल उद्यान को विकसित किया है जो वर्तमान में पौधे फल देने लायक बन गए हैं ।यहां पर किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इस प्रकार का उद्यान विकसित हो सकता है ।ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों की सतत देखभाल से ही यह संभव हुआ है। कूरज का पंच फल उद्यान पूरे जिले के लिए एक मॉडल बन कर उभरा है। यह उद्यान कूरज के लिए गर्व का विषय है।
- सुनील पाराशर, युवा सामाजिक कार्यकर्ता

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned