scriptप्रत्येक दो साल में नामांकन के आधार पर होनी थी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा, नहीं हुई, बीते नौ साल | Patrika News
राजसमंद

प्रत्येक दो साल में नामांकन के आधार पर होनी थी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा, नहीं हुई, बीते नौ साल

शिक्षा विभाग की कार्यशैली भी गजब की है। नौ साल बीत गए लेकिन स्टाफिंग पैटर्न को लेकर अभी तक गंभीर नहीं है। ऐसे में विभाग सरकारी स्कूलों में 2015 के नामांकन के आधार पर ही शिक्षक नियुक्त कर रहे हैं।

राजसमंदJun 14, 2024 / 10:53 am

Madhusudan Sharma

Education department bikaner

Education department bikaner

मधुसूदन शर्मा

राजसमंद. शिक्षा विभाग की कार्यशैली भी गजब की है। नौ साल बीत गए लेकिन स्टाफिंग पैटर्न को लेकर अभी तक गंभीर नहीं है। ऐसे में विभाग सरकारी स्कूलों में 2015 के नामांकन के आधार पर ही शिक्षक नियुक्त कर रहे हैं। ऐसे में विभाग स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा करना ही भूल गया है। जानकारी के अनुसार 2015 में स्टाफिंग पैर्टन के बिन्दू 5.4 पर गौर किया जाए तो प्रत्येक दो वर्ष में स्टाफिंग पैर्टन की समीक्षा की जानी है और नामांकन के आधार पर पदों का पुन निर्धारण करने का प्रावधान तय किया गया है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों का रेशो भी गड़बड़ा गया है। प्रदेश में कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भरमार है। वहीं प्रदेश के कई सकूल ऐसे हैं जहां पर शिक्षकों का टोटा है। प्रदेश में सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं, लेकिन विभाग की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

क्रमोन्नत स्कूलों में नहीं स्टाफ

जानकारी के अनुसार प्रदेश की सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। यही नहीं कांग्रेस के शासन में क्रमोन्नत किए गए स्कूलों में भी अभी तक स्टाफ नहीं लगाया जा सका है। यही नहीं दो वर्ष से विभिन्न संवर्गों में विभागीय पदोन्नतियां नहीं हो सकी है। न ही सीधी भर्ती हुई है। इधर प्रारंभिक शिक्षा विभाग में प्रथम, द्वितीय लेवल और माध्यमिक बोर्ड में किसी भी वर्ग की डीपीसी नहीं हुई है। ऐसे में बच्चे निजी स्कूलों की ओर पलायन कर रहे हैं।

नामांकन घटकर 80 लाख पर आया

शिक्षा विभाग ने 2015 में माध्यमिक बोर्ड और प्रारंभिक शिक्षा में स्टाफिंग पैर्टन लागू किया था। प्रारंभिक शिक्षा में स्टाफिंग पैटर्न लागू होने के बाद तीन बार समीक्षा की जा चुकी है। लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग पैटर्न को लागू कर भूल गई है। लेकिन माध्यमिक बोर्ड में एक बार भी स्टाफिंग पैर्टन की समीक्षा नहीं हो पाई है। इसमें समीक्षा का 2024 में भी इंतजार है। वहीं, 2015 में प्रदेश की सरकारी स्कूलों में नामांकन 40 लाख था। 2022 में बढक़र ये 99 लाख पहुंचा। लेकिन अब घटकर नामांकन वापस 80 लाख पर आ गया।

क्या कहता है बिंदु संख्या 6.2

राजस्थान सरकार के शिक्षा (ग्रुप-१) विभाग की ओर से ३० अप्र्रेल २०१५ को जारी किए आदेश के बिंदु संख्या ६.२ पर नजर डाले तो उसमें स्पष्ट किया गया है कि इन विद्यालयों में तृतीय वर्ष से कक्षा ११ व १२ में नामांकन ८० से अधिक होने पर अनिवार्य विषय(अंग्रेजी व हिंदी) के वरिष्ठ अध्यापक के स्थान पर व्याख्याता के पद दिए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

इनका कहना है

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में 2015 को लागू किए गए स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं की गई है। 2015 के बाद स्कूलों के नामांकन में बदलाव हुआ है। नए पदों का सृजन नहीं किया। 2013 के बाद क्रमोन्नत स्कूलों में अनिवार्य विषयों हिन्दी व अंग्रेजी के व्याख्याता पदों की स्वकृति की जाए। ताकि विद्यार्थियों को भाषा विषयों के अध्ययन में फायदा हो सके। सभी स्कूलों में नए सिरे से नामांकन अनुसार पदों का निर्धारण किया जाना चाहिए।

बसन्त कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा

Hindi News/ Rajsamand / प्रत्येक दो साल में नामांकन के आधार पर होनी थी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा, नहीं हुई, बीते नौ साल

ट्रेंडिंग वीडियो