मकर संक्रांति आज, सूर्य होंगे उत्तरायण, खूब करें दान-पुण्य

संक्रांति पर रहेगा शुभ पंचग्रही संयोग, बढ़ेगा पर्व का महत्व, पर्व का पुण्यकाल 12 घंटे का रहेगा

By: jitendra paliwal

Published: 14 Jan 2021, 10:22 AM IST

राजसमंद. मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार को कोरोनाकाल में सादगीपूर्वक मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होंगे और धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पर्व का पुण्यकाल 12 घंटे का रहेगा।
पं. भरत खण्डेलवाल ने बताया कि सुबह 8:10 बजे सूर्य देव अपने पुत्र शनि की मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यह सूर्यदेव के उत्तरायण का महापर्व होगा। प्रात:कालीन संक्रांति प्रवेश के कारण प्रवेश समय 8:10 से 6 घंटे 24 मिनट पहले एवं बाद में पुण्यकाल रहेगा। ऐसे में प्रात: ब्रह्म मुहूर्त से दिन में 2 बजकर 34 मिनट तक पुण्यकाल रहेगा। इसमें तीर्थस्नान, दान-पुण्य किया जा सकेगा।

तारा अस्त : गुरु ग्रह 18 जनवरी 21 से 14 फरवरी 21 तक अस्त रहेगा तथा 15 फरवरी 21 से 18 अप्रेल 21 तक शुक्र ग्रह अस्त रहेगा।
सूर्य के पास आने पर ग्रस्त हो जाते हैं। अस्त ग्रह का नैसर्गिक फल क्षीण हो जाते हैं, कमजोर हो जाते हैं

कौन सा ग्रह, कितने डिग्री निकट आने पर अस्त होता है, जानें

चन्द्रमा-12 डिग्री आने पर अस्त (अमावस्या को)
मंगल- 7 डिग्री निकट आने पर अस्त
बुध- 11 डिग्री निकट आने पर अस्त
गुरु- 11 डिग्री निकट आने पर अस्त
शुक्र- 7 डिग्री निकट आने पर अस्त
शनि- 15 डिग्री निकटआने पर अस्त।
राहु-केतु छाया ग्रह होने से ये अस्त नहीं होते हैं। ये सूर्य को ग्रसित करते हैं।

संक्रांति पर्व पर 13 वस्तुओं का दान क्यों?
पृथ्वी के 23:30 डिग्री झुकाव एवं प्रतिवर्ष गति में वृद्धि से यह मकर संक्रांति आगे खिसक रही है। आज से तीन शताब्दी पूर्व 13 जनवरी को मकर संक्रांति हुआ करती थी। हमारे अधिकांश व्रत, तीज, त्योहारों के यम-नियम 3 सदी पूर्व के हैं। अत: उस समय 13 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने से 13 वस्तुओं के दान का प्रावधान किया गया। यह परंपरा आज भी चल रही है।

तारा अस्त के दौरान यह कार्य नहीं होंगे
- मुंडन (झड़ूल्या)
- उपनयन (जनेऊ)
- देव प्रतिष्ठा (स्थानीय देवता को छोड़कर)
- वैदिक रीति से विवाह
- नवीन गृह निर्माण एवं प्रवेश के मुहूर्त।

शेष समस्त निम्न कार्य होंगे
सामूहिक विवाह, गंधर्व विवाह, प्रेम विवाह, आना- गोना, पुनर्विवाह, प्रसूता एवं जन्म मुहूर्त, कच्चा-पक्का दस्तूर (सगाई), व्यापार-व्यवसाय, दुकान, गोदाम, फैक्ट्री, वाहन, कुआं, बोरिंग, जीर्ण गृह-प्रवेश, बाड़ा, बाउंड्री नींव मुहूर्त, ग्रह शांति, निवास, पगड़ी दस्तूर, पद ग्रहण, कृषि मुहूर्त, वाहन-रत्न-धातु-क्रय-विक्रय, तीर्थ यात्रा, कुंभ स्नान, तीर्थ-स्नान, पूर्वज एवं लोकदेवता स्थापना, फसल संबंधी कार्य किए जा सकेंगे।

बनेंगे पकवान, खेलेंगे सितोलिया
घरों में गुड़-तिल के लडï्डू और तिल के विविध व्यंजनों के साथ ही खीच व कई तरह के पकवान बनाने की गृहिणियों ने तैयारी कर ली है। घर की छतों पर ही सितोलिया खेलने व पतंग उड़ाने का भी युवाओं व बच्चों में उत्साह है।

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