दो पग चलकर ठिठक गया हमारा बर्ड फेयर

दो पग चलकर ठिठक गया हमारा बर्ड फेयर
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Mukesh Kumar Sharma | Publish: Feb, 09 2016 11:37:00 PM (IST) Rajsamand, Rajasthan, India

प्रकृति से हमारा ताल-मेल जोडऩे में पक्षियों की क्या भूमिका है? पक्षी हमारे जीवन के लिए कितने अहम हैं और


राजसमंद।प्रकृति से हमारा ताल-मेल जोडऩे में पक्षियों की क्या भूमिका है? पक्षी हमारे जीवन के लिए कितने अहम हैं और हमारे बीच उनका रहना क्यों आवश्यक है? राजसमंद में कौन-कौन से पक्षी हैं, और कौन-कौन से प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। जैसी महत्वपूर्ण जानकारी बच्चों और आमजन को देने के मकसद से वर्ष 2014 में निर्वमान डीएफओ कुमार स्वामी गुप्ता ने झील किनारे बर्ड फेयर शुरू किया लेकिन इस वर्ष वर्तमान अधिकारियों द्वारा बर्ड फेयर में रुचि नहीं लेने के कारण आयोजन ने दम तोड़ दी। वर्तमान अधिकारियों का कहना है कि यहां इतने पक्षी नहीं है कि बर्ड फेयर करवाया जाए। हमने संभाग स्तर का बर्ड फेयर उदयपुर में करवा दिया है।

यहां रहती है चहचहाट

राजसमंद झील, नन्दसमंद, चिकलवास, राज्यावास तालाब, सांसेरा तालाब, राघव सागर तालाब, भीम तालाब, सिहाड़ तालाब, कुंभलगढ़ के लाखेला व पिछले दो वर्षों से झौर क्षेत्र के गोवलिया पिकअप वियर पर देसी सहित विदेशी पक्षियों की चहचहाट रहती है।

यह नहीं आए थे नजर

झील में पहले फ्लेमिंगो, पेलिकन, कस्टर्डगिल, भारतीय सारस, कंरजा, सुराख सहित अनेक पक्षी नजर आते थे, लेकिन दो वर्ष में हुए बर्ड फेयर में यह पक्षी नजर नहीं आए, माना जा रहा है कि यह धीरे-धीरे से विलुप्त हो गए हैं।

ये पक्षी दिखे थे

राजसमंद में वर्ष 2014 व 15 में हुए बर्ड फेयर में कौमन कूट,  कौमन पोचार्ड, रिवर्टन, गेडवाल, स्पाट विल, गौड़ विट, पन-कौआ, गजपांव, जलमोर, खंजन,जल मुर्गी, किंगफीसर, डबचिक,  पिनटेल आदि।

बर्ड फेयर से अनजान हैं साहब!

वन्यजीव अभयरण्य के वर्तमान डीएफओ का कहना है कि राजसमंद में कोई बर्डफेयर भी वनविभाग द्वारा करवाया गया है। इसकी उन्हे जानकारी नहीं है। और न ही उनके पास ऐसी कोई फाइल है जिससे यह पते चले कि यहां दो वर्ष यह आयोजन हुआ था। जबकि निर्वतमान डीएफओ कुमार स्वामी गुप्ता का कहना है कि यह आयोजन वनविभाग ने ही करवाया था और फेयर की बाकायदे फाइल भी बनी थी।

हमने उदयपुर में करवा दिया...

 हमने बर्डफेयर उदयपुर में करवा दिया है, यहां मुझे इतने पक्षी भी नहीं दिखते कि ऐसा आयोजन हो। और दो वर्ष वनविभाग ने यहां ऐसा आयोजन करवाया है मुझे जानकारी नहीं है। क्योंकि मुझे तो यहां ऐसी कोई फाइल नहीं मिली, जिससे यह पते चले कि यहां बर्डफेयर भी हुआ था। फिरभी मैं पता करवाता हूं।डॉ. रामलाल विश्नोई, डीफओ, वन्यजीव अभयारण्य कुंभलगढ़

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