'हमारी कौन सोचेगा'

- निजी शिक्षण संस्थाओं की गुहार
- सरकार से विशेष आर्थिक अनुदान की मांग
- मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला कलक्टर को सौंपा
- ज्ञापन में कहा, कई स्कूल बंद होने के कगार पर
- कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट

By: Rakesh Gandhi

Updated: 11 Jul 2020, 10:36 AM IST

राजसमंद. जिले में निजी शिक्षण संस्थाओं के समवाय शिक्षाकुल सेवा संस्थान ने निजी विद्यालयों के अस्तित्व को बचाने एवं उन्हें संकट से उबारने के लिए राज्य सरकार से निजी विद्यालयों के लिए विशेष आर्थिक अनुदान की घोषणा करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को सौंपे ज्ञापन में शिक्षाकुल संस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कर्णावट ने कहा कि यदि राज्य सरकार ऐसा नहीं करती है तो अधिकांश निजी विद्यालय बंद हो जाएंगे और प्रदेश के लाखों विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। कोविड-19 से निजी शिक्षण संस्थान सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। राज्य में हुई शिक्षा क्रांति में निजी विद्यालयों का अपूर्व योगदान है। प्रदेश में 35000 से अधिक निजी विद्यालय है, जिनमें अस्सी लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और करीब सात लाख से अधिक अध्यापक एवं कर्मचारी कार्यरत हैं। कोरोना महामारी काल में सरकार एवं समाज ने निजी विद्यालयों के लोककर्मियों को अपने हाल पर छोड़ दिया, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है व कर्मचारियों की रोजी-रोटी बंद हो गई। ज्ञापन में ये भी बताया कि विगत तीन माह से वेतन अदेय है और अभिभावक फीस नहीं देने पर अडिग है।

कर्णावट ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि विगत 15 मार्च से राज्य सरकार ने फीस को स्थगित कर दिया है। इसका प्रभाव यह पड़ा कि जिन अभिभावकों की शैक्षणिक सत्र 2019-20 की दिसम्बर 2019 से मार्च 2020 तक फीस बकाया थी, वह भी आना बंद हो गई। विगत छह माह से फीस नहीं आने से निजी विद्यालय आर्थिक आपात स्थिति के चलते बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। संकुल ने आग्रह किया कि निजी विद्यालयों के अस्तित्व को बचाने एवं उन्हें संकट से उबारने के लिए राज्य सरकार उनके लिए विशेष आर्थिक अनुदान की घोषणा करें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो निजी विद्यालयों के लाखों शिक्षक-कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे और उनके परिवारों की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। उन्होंने ये भी बताया कि ऐसे कई निजी विद्यालय हैं, जिन्हें भवन, बस आदि के ऋण का भुगतान बैंकों को चुकाना है, जो अप्रेल माह से रुका हुआ है। ऐसे में बकाया ऋण पर ब्याज माफ करने का निर्णय कर राहत प्रदान करें। उन्होंने कहा कि राजकीय स्कूल भी कोविड-19 संकट के चलते बंद हैं, लेकिन उनके कर्मचारियों को राज्य सरकार वेतन दे रही है, तो क्या निजी विद्यालयों के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार नहीं है? इस संबंध में सरकार को भी सोचना चाहिए।

ज्ञापन में उन्होंने नि:शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अन्तर्गत निजी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों यों के नियमों में हाल ही में किए गए परिवर्तन-संशोधन को निरस्त करने का आग्रह किया। साथ ही कोविड-19 के कारण जब तक शिक्षण संस्थान बंद रहे, तब तक के समूचे काल का निजी विद्यालयों के सभी व्यय, वेतन, ऋण इत्यादि राज्य सरकार अपने कोष से भुगतान करने का आग्रह किया।

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned