बाराती बन कर आए थे और बंदी बन कर रह गए

( Jharkhand News ) बारात के लिए निमंत्रण में जाने के लिए मनुहार और उसके बाद बाराती बनने का अलग ही लुत्फ है। लेकिन रामगढ़ में बारात में आए करीब 70 बारातियों के लिए ( Wedding party stuck ) बारात का आनंद लेना तो दूर रहा उल्टे मुसीबत ( Lock down ) गले पड़ गई। ( Wedding party in problem ) बाराती लॉक डाउन में पिछले 40 दिनों से फंसे हुए हैं और घर जाने के लिए प्रशासन से अनुमति मांग रहे है।

By: Yogendra Yogi

Published: 29 Apr 2020, 03:42 PM IST

रामगढ़(झारखंड)रवि सिन्हा: ( Jharkhand News ) बारात के लिए निमंत्रण में जाने के लिए मनुहार और उसके बाद बाराती बनने का अलग ही लुत्फ है। लेकिन रामगढ़ में बारात में आए करीब 70 बारातियों के लिए ( Wedding party stuck ) बारात का आनंद लेना तो दूर रहा उल्टे मुसीबत ( Lock down ) गले पड़ गई। मुसीबत यह कि ( Wedding party in problem ) आए तो थे बाराती बन कर और बन गए एक तरह से बंदी। हुआ दरअसल यह कि पड़ोसी राज्य से छत्तीसगढ़ और ओडि़शा से बाराती रामगढ़ जिले के अरगड्ढा में 19 मार्च को आए थे। इनकी विदाई 24 मार्च को होनी थी। इस बीच 22 मार्च को लॉक डाउन लागू होने से सभी बाराती वहीं फंस कर रह गए। बाराती लॉक डाउन में पिछले 40 दिनों से फंसे हुए हैं और वापस अपने घर जाने के लिए प्रशासन से अनुमति की मांग कर रहे है।

वधु पक्ष ने हाथ खड़े किए
वधु पक्ष ने एक-दो दिन तो इन बारातियों की खूब खातिरदारी करी पर उसके बाद हाथ खड़े कर दिए। अब संकट बारातियों के सामने आ गया। स्वादिष्ट व्यंजन तो दूर खाने के भी लाले पड़ गए। परिवार और बच्चों याद सताए वो अलग। रामगढ़ भाजपा के जिला महामंत्री रंजीत पांडेय ने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले जयदेव जगदल्ला के घर शादी थी जिसमें छत्तीसगढ़ और ओडि़शा से बाराती आये थे और लॉक डाउन के शुरू होने से लेकर आज तक सभी वहीं पर रुके हुए हैं। पहले घर वालों के द्वारा भोजन की व्यवस्था हुई । फिर जिला प्रशासन के द्वारा दाल भात केंद्र से भी उनको जोड़ा गया । लेकिन बीच में राशन के अभाव के कारण दाल भात केंद्र बंद हो गया है और पुन: इस संदर्भ में लोगों ने उपायुक्त को जानकारी दी तो उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीएसआर के तहत सीसीएल को भोजन की व्यवस्था करने का आदेश दिया है ।

प्रशासन के मेहमान बने
इन अब ये बाराती अकेले वधु पक्ष के न होकर जिला प्रशासन के मेहमान बन गए हैं। इन बारातियों में कई महिलाएं भी शामिल हैं। जिन्होंने लॉक डाउन को सही बताते हुए प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना भी की , लेकिन अपने घर परिवार और छोटे-छोटे बच्चों को याद करते हुए रोने भी लगी। बारातियों के भोजन की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। जिसमें लड़की पक्ष के सदस्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों तथा स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग मिल रहा है। उपायुक्त संदीप सिंह ने बताया कि पूरे जिले में प्रशासन की ओर से 240 जगहों पर कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की गई है, जिसके जरिए रोजाना करीब 14 से 15 हजार लोगों को हम लोग राशन दे रहे हैं।

लॉक डाउन से फंस गए
गौरतलब है कि अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली मोनिका और राकेश की शादी 22 मार्च को होना तय था जिस में शामिल होने के लिए उनके रिश्तेदार छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा से 19 मार्च को ही रामगढ़ के अरगड्डा पहुंच गए थे। 22 मार्च को जनता कफ्र्यू लगने के कारण शादी की तिथि 23 मार्च रखी गई थी और तय समय के अनुसार शादी हुई तथा सुबह 24 मार्च को विदाई होनी थी। तभी पहले झारखंड सरकार और बाद में केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई। प्रशासन को जानकारी मिली थी कि अरगड्डा में एक बारात आई और लॉक डाउन के वजह से फंस गई जिसमें करीब 70 से 80 लोग हैं, उनको पहले एक दाल भात केंद्र के साथ टैग किया गया था। 27 मार्च से सीसीएल को यह जिम्मेदारी दी है कि सीएसआर के तहत पूरी लॉक डाउन के अवधि में तीनों समय का भोजन इन बारातियों को उपलब्ध कराए।

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