वज्रपात से मौत, जीवित होने की आस में गोबर से ढका

(Jharkhand News ) अंधविश्वास (blind faith ) की भी इंतहा है। आदिवासी बाहुल्य (Tribal belt ) राज्य झारखंड में अंधविश्वासों का खूब बोलबाला है। गिद्दी क्षेत्र के किता गंझू की शाम खेत में काम करने के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। आनन-फानन में परिजनों व गांव वालों ने मृत युवक को गोबर से ढक कर उपचार करने की कोशिश में घंटों तक लगे रहे।

By: Yogendra Yogi

Published: 23 Jul 2020, 10:15 PM IST

रामगढ़ (झारखंड): (Jharkhand News ) अंधविश्वास (blind faith ) की भी इंतहा है। आदिवासी बाहुल्य (Tribal belt ) राज्य झारखंड में अंधविश्वासों का खूब बोलबाला है। विशेषतौर पर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में लाचार लोगों के पास अंधविश्वास दूर करने का कोई तरीका है। इसी तरह के एक अंधविश्वास का मामला रामगढ़ के गिद्दी क्षेत्र में सामने आया है। गिद्दी क्षेत्र के होन्हेंमोढ़ा पंचायत के कुर्रा निवासी किता गंझू (42) का सोमवार की शाम खेत में काम करने के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। आनन-फानन में परिजनों व गांव वालों ने मृत युवक को गोबर से ढक कर उपचार करने की कोशिश में घंटों तक लगे रहे। जानकारी के अनुसार किता गंझु व उसकी बहु अपने खेत में काम कर रहे थें।

गोबर से ढक दिया
इसी बीच तेज बारिश होने लगी। किता गंझू पानी से बचने के लिए खेत के बगल में एक महुआ के पेड़ के नीचे छिपने चला गया। इसी बीच वज्रपात हो गया। इससे वह चपेट में आ गया। जबकि उसकी बहु कुछ दूर पर होने के कारण बाल-बाल बच गई। युवक के वज्रपात की चपेट में आने के बाद वह मुच्र्छित हो कर गिर गया। आनन-फानन में घटनास्थल पहुंचे परिजनों ने उसे वहां से उठाकर घरेलु उपचार के लिए गोबर से ढक दिया। बाद में स्थानीय चिकित्सक ने जांच कर युवक के मौत होने की पुष्टि की।

पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम
किता की मौत होने की जानकारी मिलने के बाद उसकी पत्नी, बच्चे व परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सूचना मिलते हीं गिद्दी थाना प्रभारी विजय कुमार सिंह वहां पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी। ग्रामीण ने डाड़ी अंचलाधिकारी से आपदा राहत कोष से मृतक के आश्रितों को चार लाख मुआवजा देने की मांग की है। गौरतलब है कि पिछले दिनों कोरोना को देवी का रूप मान कर उसकी पूजा-अर्चना करने का मामला भी झारखंड और बिहार के कुछ इलाकों में हो चुका है। इन क्षेत्रों में कोरोना वायरस को देवी का रूप मानते हुए उसकी मनौती के लिए स्नान करने के बाद पूजा की गई थी।

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