यदि बिदियां को एम्बुलेंस मिल जाती तो तीन बच्चों से मां का साया नहीं हटता

(Jharkhand News ) रामगढ़-रांची सीमा पर स्थित बुढ़मू गांव में गरीबी और पैसे तंगी से फिर एक जिंदगी ( Mother lost battle of life ) हार गई, बेबस तीन बच्चियों ( Three duaghters story ) के सर से माँ का साया उठ ( Government system ) गया। तीन बच्चियों की माँ बिंदिया देवी (35 वर्ष) की मौत सरकारी सहायता के अभाव में हो गई। इसके साथ ही तीन बच्चियां अनाथ हो गयी।

By: Yogendra Yogi

Updated: 27 May 2020, 08:22 PM IST

रामगढ़(झारखंड)रवि सिन्हा: (Jharkhand News ) रामगढ़-रांची सीमा पर स्थित बुढ़मू गांव में गरीबी और पैसे तंगी से फिर एक जिंदगी ( Mother lost battle of life ) हार गई, बेबस तीन बच्चियों ( Three duaghters story ) के सर से माँ का साया उठ ( Government system ) गया। तीन बच्चियों की माँ बिंदिया देवी (35 वर्ष) की मौत सरकारी सहायता के अभाव में हो गई। इसके साथ ही तीन बच्चियां अनाथ हो गयी। आखिर इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन। एक बड़ा सवाल- विचलित कर रहा है कि आखिर इस बेबस महिला का इलाज समय पर क्यों नही हो सका, क्या सरकारी तंत्र गरीबो के प्रति संवेदनशील है। क्यों जिम्मेदार लोग अपने जिम्मेवारियों से भागते नजर आते है।

नही मिला सरकारी सहायता
बिंदिया देवी की मौत का जिम्मेदार सरकारी तंत्र है। समय पर अगर बिंदिया देवी को अस्पताल में भर्ती कराया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उचित इलाज के अभाव में बिंदिया देवी की जान चली गई। बिंदिया देवी बुढ़मू प्रखंड क्षेत्र के ओझासाड़म पंचायत अंतर्गत तारे महुवा गांव की रहने वाली थी, जो अपने पति अगनु गंझू के साथ मजदूरी का काम करती थी, कोरोना बन्दी के पूर्व बिंदिया अपने पति के साथ ठाकुरगांव में एक ईंट भ_े में काम करती थी।

ईट भट्टे पर मजदूरी
इस दौरान वह गर्भवती थी, ईट भट्टा में कार्य करने के दौरान ही बिंदिया देवी की डिलीवरी हुई थी जिसमे उसके बच्चे की मृत्यु हो गई। इस दौरान भी बिंदिया देवी का समुचित इलाज नही हो सका इसका प्रमुख कारण लॉक डाउन से उत्पन्न स्थिति थी। स्थिति बिगड़ता देख उसके पति अगनु गंझू उसे घर ले लाया। घर पर उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। महिला की स्थिति काफी दयनीय थी, परिजनों द्वारा उसे लेकर 21 मई को बुढ़मू सीएचसी इलाज हेतु लाया गया था परंतु डॉक्टरों ने उसे दवा देकर घर भेज दिया गया।

एम्बुलेंस नही मिली
जबकि उसकी उचित इलाज कराया जाना था। यहां डॉक्टरों की लापरवाही सामने आ रही है। अगर बुढ़मू सीएचसी में उचित इलाज संभव नही था तो रिम्स रेफर कर देना चाहिए था। महिला की जान तो बच जाती। दूसरी ओर मामले पर सीएचसी प्रभारी डॉक्टर संतोष कुमार का कहना है कि 21 मई को बुढ़मू सीएचसी में समुचित इलाज किया गया था। इस दौरान समाजसेवी गौतम यादव द्वारा एम्बुलेंस व्यवस्था करने और रिम्स पहुँचाने का भरसक प्रयास किया। परन्तु ना ही एम्बुलेंस की व्यवस्था हो पाई और ना ही इलाज हो सका और वह दुनिया छोड़कर चली गयी।

मौत के बाद भेजी मदद
आखिरकार तीन बच्चो सहित पांच परिवार के साथ किसी प्रकार लॉक डाउन का पालन करते करते बिंदिया देवी जान गवां बैठी। मौत की सूचना पर प्रखंड मुख्यालय बुढ़मू से पहुंची अंचलाधिकारी मधुश्री मिश्रा द्वारा तत्काल 1000 एवं 10 किलो चावल उसके परिवार को दिया गया। बताया गया परिवार में ना ही आधार कार्ड और ना राशन कार्ड है, यहाँ तक की रहने के लिए अपना घर भी नही है ना ही पीने की स्वच्छ पानी की व्यवस्था है । पानी के लिए कुए पर आश्रित है, सूचना मिलते ही पहुँची जिला उपाध्यक्ष पार्वती देवी ने कहा कि इलाज के अभाव में मौत हुई है तो इसकी जांच होनी चाहिए। पार्वती देवी ने परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि हम सभी आपके साथ है। क्रिया क्रम के लिए आश्रित परिवार को एक क्विंटल चावल देते हुए, हरसंभव मदद की बात कहीं।

सहायता के दावे
प्रखंड विकास पदाधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि परिवार को सहायता उपलब्ध करायी जा रही है, आगे भीसरकारी सहायता जारी रहेगी। वहीं अंचलाधिकारी मधुश्री मिश्रा ने कहा कि उन्हें एक घण्टे पहले ही उसकी वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली थी, वह सीएचसी प्रभारी के साथ बात कर एम्बुलेंस व्यवस्था के माध्यम से सदर भिजवाने के लिए तैयारी कर ही रही थी कि उनकी मौत की सूचना आई, जो काफी दु:खद है अगर सूचना दो दिन पहले मिल जाती तो वह समय रहते इलाज के लिए समुचित व्यवस्था करा देती।

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