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‘आजम खान और अब्दुल्ला को आजीवन कारावास की सजा दिलाने की थी कोशिश’ पूर्व मंत्री नवेद मियां बोले- न्याय पालिका ने इंसाफ किया

Azam Khan and Abdullah Two PAN Card Case Update: आजम खान और अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड मामले में पूर्व मंत्री नवेद मियां का बड़ा बयान सामने आया है। जानिए, उन्होंने क्या कहा?

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आजम खान केस अपडेट | Image - FB/@AbdullahAzamKhan

Azam Khan and Abdullah Two PAN Card Case Update: दो पैन कार्ड मामले में समाजवादी पार्टी नेता आजम खानऔर उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा बढ़ाए जाने के फैसले के बाद पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नवेद मियां शुरू से ही इस मामले में सख्त कार्रवाई और कड़ी सजा की मांग करते रहे थे। उन्होंने न सिर्फ स्थानीय अदालत में अपनी बात रखी थी, बल्कि मामले को लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाजा भी खटखटाया था।

सबसे पहले उठाया था अब्दुल्ला की उम्र का मुद्दा

बताया जाता है कि अब्दुल्ला आजम की उम्र और दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा सबसे पहले नवेद मियां की ओर से ही उठाया गया था। बाद में यही मामला दो पैन कार्ड और फर्जी दस्तावेजों के विवाद तक पहुंचा। जब अदालत में सजा बढ़ाने को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई तो नवेद मियां ने खुद को भी इस मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी।

उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि इस मामले में उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए, क्योंकि शुरुआत से उन्होंने ही इस मुद्दे को उठाया था। हाईकोर्ट ने उनकी दलील को स्वीकार करते हुए स्थानीय अदालत को उनका पक्ष सुनने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद दाखिल किया था रिवीजन

हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद नवेद मियां ने स्थानीय सेशन कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया। इसमें उन्होंने आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा बढ़ाने की मांग का समर्थन किया। शनिवार को जब अदालत ने सात साल की सजा बढ़ाकर दस साल कर दी, तो नवेद मियां ने फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत ने निष्पक्ष तरीके से इंसाफ किया है।

अभियोजन पक्ष ने भी मांगी थी कड़ी सजा

मामले में सरकारी पक्ष की ओर से भी सजा बढ़ाने को लेकर जोरदार पैरवी की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि अभियोजन पक्ष चाहता था कि दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा मिले। उन्होंने बताया कि अदालत ने उनकी अपील को स्वीकार किया और जुर्माने की राशि भी बढ़ाई गई। वहीं, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी राकेश कुमार मौर्य ने कहा कि निचली अदालत ने अपनी सीमित शक्तियों के तहत अधिकतम सात साल की सजा सुनाई थी, जबकि आईपीसी की धारा 467 के तहत यह अपराध आजीवन कारावास तक से दंडनीय है। इसी आधार पर सजा बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया था।

नवेद मियां के वकील ने फैसले को बताया न्यायपूर्ण

नवेद मियां की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता संदीप कुमार सक्सेना ने निजी चैनल से बातचीत में कहा कि उनकी ओर से दाखिल रिवीजन में भी सजा बढ़ाने की मांग की गई थी। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है और वे न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं। वहीं, आजम खान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नासिर सुल्तान का कहना है कि अभी फैसले की प्रति नहीं मिली है। आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।