रामपुर के नवाब खानदान की संपत्ति बंटवारे में बिट्रिश की 'चब कंपनी' आई आड़े, जॉर्ज चतुर्थ भी सुर्खियों में

Highlights

. नवाब के खानदान की संपत्ति बंटवारे की चल रही प्रक्रिया . स्ट्रांग रूम को तोड़ने के लिए अधिकारियों को करनी पड़ रही कड़ी मशक्कत
. नवाब खानदान के हथियारों की जा रही गिनती

 

 

रामपुर। इनदिनों रामपुर के नवाब के खानदान की संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन स्ट्रांग रूम न टूटने की वजह से बंटवारा नहीं हो पा रहा है। करीब 45 साल की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी नवाब रजा अली खां की संपत्ति का बंटवारा शरीयत के अनुसार करने के आदेश दिए थे। बंटवारे को लेकर नवाब खानदान के परिवार के लोगों में विवाद 1974 में शुरू हुआ था। फिलहाल नवाब खानदान के हथियारों की गिनती की जा रही हैं।

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बंटवारे के दौरान चब कंपनी फिर से सुर्खियों में है। संपत्ति बंटवारे को लेकर चब कंपनी के 200 साल पुराने तालों को तोड़ने के लिए अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि ताला बनाने वाली चब कंपनी की स्थापना एक ऐतिहासिक घटना है। इंग्लैंड के पोट्रसमाउथ डॉकयार्ड में 1817 में चोरी हुई थी। इसकी गूंज बिट्रिश सरकार तक पहुंची और उन्होंने ताला बनवाने की प्रतियोगिता कराई। दरअसल, डॉकयार्ड मेंं चोरी के लिए चोरों ने दूसरी चाबी का प्रयोग किया था। प्रतियोगिता में जहाजों पर काम करने वाले जेरेमिया चब ने भाई चार्ल्स के साथ मिलकर डिटेक्टर ताले बनाए। साथ ही उन्हें पेटेंट भी कराया। इन्होंने 4 लीवर का ताला बनाया और यह गलत चॉबी लगने पर नहीं खुलता था। गलत चाबी लगाने के बाद फिर से नई ही होती थी।

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महज तीन साल बाद ही चब भाईयों ने 1820 में खुद की कंपनी चब की शुरूआत की। उनकी ताला—चाबी की खासियत के चलते 1823 में जॉर्ज चतुर्थ ने उन्हें पुरस्कारित कर सम्मानित किया। चंब कंपनी में बने हुए ताले अति सुरक्षित माने गए थे। दोनों भाईयों ने 1835 में पहली चब तिजोरी बनाई। यह कंपनी 17 देशों में फैली और यह 1984 से 1992 तक चब रेकल इलेक्ट्रॉनिक में शामिल रही। बाद में 1997 में इसे विलियम होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी ने खरीद लिया।

virendra sharma Desk/Reporting
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