Rampur: राज्‍य महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष ने एकाउंटेंट के सामने जोड़े हाथ- देखें Video

Highlights

  • Uttar Pradesh Rajya Mahila Ayog की उपाध्यक्ष पहुंचीं Rampur
  • Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya का किया निरीक्षण
  • Sushma Singh ने वार्डन और BSA से जताई नाराजगी

रामपुर। जनपद के कस्तूरबा गांधी स्‍कूल (Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya) में राज्‍य महिला आयोग (Uttar Pradesh Rajya Mahila Ayog) की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह (Sushma Singh) ने मंगलवार को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सुषमा सिंह ने यहां पर छात्राएं ठंडे पानी से नहाती हैं। स्कूल ड्रेस और खाने के बर्तन भी वे खुद साफ करती हैं।

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ये खामियां मिलीं

बच्चों के टॉयलेट में भी कोई साबुन या लिक्विड का इंतजाम नहीं है। इसके अलावा लाइट की व्‍यवस्‍था भी सही नहीं मिली। इस बीच महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष एकाउंटेंट को फटकार लगाते हुए उसके सामने हाथ जोड़ती दिखीं। जबकि एकाउंटेंट भी रोन लगी। मंगलवार शाम को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह रामपुर (Rampur) पहुंचीं। वहां उन्‍होंने पहाड़ी गेट पर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का निरीक्षण किया। वहां उन्‍हें कई खामियां मिलीं। उनका कहना है कि स्‍कूल में बच्‍चों को मिलने वाला भोजन भी उतना अच्छा नहीं है, जितने बिल बनाकर उनको एकाउंटेंट ने दिखाए हैं। इन खामियों को लेकर वह रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसको जल्‍द ही शासन और डीएम (DM) को भेजा जाएगा। इस बीच उन्‍होंने वार्डन सुमति चौहान को फटकार भी लगाई। वहीं, इसको लेकर बीएसए (BSA) ऐश्वर्या लक्ष्मी से भी नाराजगी व्यक्त की गई।

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एकाउंटेंट ने बताई मजबूरी

विद्यालय में सुषमा सिंह ने देखा कि छात्राओं के लिहाफ और गद्दे काफी गंदे थे। चादरें भी धुली हुई नहीं थीं। स्कूल में लगने वाली क्लास को खाली कराकर वहां पर किचन का समान रख दिया गया था। बच्चों को दूसरी क्‍लास में पढ़ाया जा रहा था। इसको लेकर उन्‍होंने एकाउंटेंट की भी क्‍लास लगाई। एकाउंटेंट बाला ने बताया कि वे चंदा करके इस विद्यालय को चलाते हैं। इसके बावजूद उनको फटकार लगाई है। यहां मेड नहीं है तो बर्तन किससे साफ कराएं। बच्चों की ड्रेस कौन धोएगा, कोई बताने वाला नहीं है। इसकी रिपोर्ट बनाकर उन्‍होंने कई बार संबंधित अफसरों के यहां भेजा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

आग बुझाने के यंत्र का कोई फायदा नहीं

वहीं, जब पत्रिका ने छात्राओं के कक्ष का जायजा लिया तो पता चला कि वहां पर आग बुझाने के यंत्र का कोई फायदा नहीं है। इनको न तो वार्डन चलाना जानते हैं और न ही छात्राओं को इस बारे में कुछ पता है।

sharad asthana
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