योगी सरकार ने आजम खान को दिया एक और झटका, लोकतंत्र सेनानी पेंशन पर लगाई रोक

Highlights

- मीसा बंदी सेनानियों की सूची से कटा सांसद आजम खान का नाम
- सपा सांसद आजम खां को अब नहीं मिलेगी पेंशन राशि
- धोखाधड़ी के मामले में एक साल से जेल में हैं सपा सांसद

By: lokesh verma

Published: 25 Feb 2021, 11:07 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
रामपुर. सीतापुर की जिला जेल में बंद सांसद आजम खान (Azam Khan) को अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) ने एक और झटका दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों की सूची से सपा सांसद आजम खान का नाम काट दिया है। सूची से नाम कटने के बाद अब आजम खान को हर माह बीस हजार रुपए मिलने वाली पेंशन भी खत्म कर दी गई है। सरकार ने मौजूदा तिमाही के पेंशन धारकों की लिस्ट प्रशासन को भेजी है। बता दें कि सपा सरकार ने आपातकाल के दौरान जेल गए मीसा बंदियों के लिए 2005 में पेंशन योजना की शुरुआत की थी। उस समय आजम खान समेत जिले के 37 लोगों को पेंशन धारक के रूप में चिन्हित किया गया था।

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जिलाधिकारी ने बताया कि आजम खान के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होने के कारण सरकार के स्तर पर यह निर्णय लिया गया है। पेंशन योजना के तहत पूर्व में दस हजार और फिर 15 हजार रुपए प्रति माह तक पेंशन दी जा रही थी। प्रदेश में भाजपा सरकार आते ही इस राशि को बढ़ाकर बीस हजार रुपए कर दिया गया था। यह पेंशन सांसद आजम खान समेत अन्य 37 लोगों को दी जा रही थी, लेकिन अब आजम खान की पेंशन बंद हो गई है। हाल ही में योगी सरकार की तरफ से जिला प्रशासन को भेजी गई सूची में सपा सांसद का नाम नहीं है। जबकि एक अन्य नाम निधन के कारण काटा गया है। सरकार की लिस्ट के आधार पर अब 35 लोगों की पेंशन दी जाएगी। बता दें कि सपा सांसद आजम खान धोखाधड़ी समेत लगभग सौ मामलों में इन दिनों सीतापुर जेल में बंद हैं।

500 रुपए से बढ़कर 20 हजार रुपए पहुंची पेंशन राशि

दरअसल, 2005 में आपातकाल के समय जेल भेजे गए मीसा बंदियों के लिए तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने इस पेंशन योजना की शुरुआत की थी। शुरुआत में धारकों को पांच सौ रुपए हर माह दिए जाते थे। अगले वर्ष ही इसे बढ़ाकर एक हजार रुपए कर दिया गया। जबकि 2007 में मायावती सरकार ने पेंशन योजना को रोक दिया। इसके बाद जब 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो पेंशन की राशि तीन हजार रुपए कर दी गई। इसके एक वर्ष बाद बढ़ाकर छह हजार और फिर 10 हजार और फिर 15 हजार रुपए की गई। वर्तमान में पेंशन की राशि के रूप में 20 हजार रुपए दिए जाते हैं।

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