रांची:बाबूलाल मरांडी पर न्यायाधीकरण के अवमानना का आरोप

रांची:बाबूलाल मरांडी पर न्यायाधीकरण के अवमानना का आरोप

Prateek Saini | Publish: Jul, 13 2018 09:47:09 PM (IST) Ranchi, Jharkhand, India

बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता ने कहा कि दल-बदल मामले की सुनवाई से इस मसले का कुछ लेना-देना नहीं है, यह सिर्फ इस बात की कोशिश है कि किसी तरह से मामले की सुनवाई को कुछ महीने के टाला जाए...

रवि सिन्हा की रिपोर्ट...

(रांची): झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के छह विधायकों के दल-बदल मामले में शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष की खुली इजलास में सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान दल-बदल के आरोपित विधायकों की ओर से एक आवेदन देकर बाबूलाल मरांडी पर न्यायाधीकरण के अवमानना और सुनवाई को प्रभावित करने का आरोप लगाया।


इन विधायकों के अधिवक्ताओं की ओर से अदालत से गुहार लगाई गई कि पहले अवमानना मामले पर बाबूलाल मरांडी को नोटिस जारी किया जाए, उसके बाद ही दल-बदल मामले में आगे की सुनवाई और बहस हो। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया और दल-बदल मामले में आज पहली बहस में बाबूलाल मरांडी की ओर से उनके अधिवक्ता ने पक्ष रखा। हालांकि स्पीकर ने विधायकों की ओर से दिये गए आवेदन पर बाबूलाल मरांडी को सुनवाई की अगली तिथि के पहले जवाब देने का निर्देश दिया। सुनवाई की अगली तिथि 27जुलाई निर्धारित की गयी है।


स्पीकर की खुली इजलास में सुनवाई के दौरान दल-बदल मामले में आरोपी विधायक नवीन जायसवाल,कृषि मंत्री रणधीर सिंह, विधायक जानकी प्रसाद यादव, विधायक गणेश गंझू भी उपस्थित थे। इन विधायकों के अधिवक्ता ने बताया कि जब स्पीकर के ट्रिब्यूनल में मामले पर सुनवाई चल रही है, तो फिर जानबूझ कर सुनवाई को प्रभावित करने और स्कैंडलाइजेशन व सनसनी फैलने के लिए राज्यपाल को जाकर बाबूलाल मरांडी ने ज्ञापन सोंपा, यह विधानसभा के अध्यक्ष के विशेषाधिकार का भी हनन का मामला बनता है और अवमानना मामले में दोषी पाए जाने पर छह महीने की सजा हो सकती है।


दूसरी तरफ बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता ने कहा कि दल-बदल मामले की सुनवाई से इस मसले का कुछ लेना-देना नहीं है, यह सिर्फ इस बात की कोशिश है कि किसी तरह से मामले की सुनवाई को कुछ महीने के टाला जाए। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी की ओर से ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया है या राज्यपाल को ऐसा कोई ज्ञापन नहीं सौंपा गया है, जिससे न्यायाधीकरण या किसी अदालत की अवमानना होती है, उन्होंने अपने लोकतांत्रिक अधिकार के तहत राज्यपाल के समक्ष अपनी बात को रखने का काम किया है।


स्पीकर के आदेश पर बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता ने दल-बदल मामले में पहली बहस के दौरान अपनी बातों को रखते हुए बताया कि 12 फरवरी 2018 को सभी अखबारों में यह खबर छपी कि नई दिल्ली में मुख्यमंत्री रघुवर दास की उपस्थिति में झाविमो के छह विधायकों रणधीर सिंह, अमर बाउरी, नवीन जायसवाल, गणेश गंझू, आलोक चौरसिया और जानकी प्रसाद यादव ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, वहीं इन विधायकों की ओर से भी भाजपा में शामिल होने लेकर इसी तरह का बयान आया। यह बात कहीं नहीं आई कि झाविमो का विलय भाजपा में हुआ है।

 

उन्होंने यह भी बताया कि एक दल के विलय को लेकर जो प्रक्रिया है, उसमें केंद्रीय कार्यसमिति के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरुरी है और बाद में दो-तिहाई विधायकों की सहमति लेनी जरूरी है,लेकिन यहां यह प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। इससे पहले इन विधायकों द्वारा चुनाव के दौरान भाजपा के खिलाफ ही बयान देकर चुनाव लड़ा गया। विधानसभा अध्यक्ष ने क्वालिटी बहस की जरुरत पर बल दिया और सुनवाई की अगली तिथि 27 जुलाई तय की है। उन्होंने बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता को अगली तिथि में बहस पूरी कर लेने को कहा।

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