झारखंड में पहले चरण के तहत इस दिन होंगे चुनाव,केंद्रीय राज्य मंत्री व दो विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर

भाजपा के दो सांसद भी कड़े मुकाबले में फंसे...

 

By: Prateek

Updated: 26 Apr 2019, 04:14 PM IST

(रांची): भारत निर्वाचन आयोग के चौथे और झारखंड में पहले चरण के लोकसभा चुनाव के सिलसिले में पलामू, लोहरदगा और चतरा संसदीय क्षेत्रों में 29 अप्रैल को मतदान होगा। चुनावी महासमर के महामुकाबले की चुनावी रणभूमि तैयार हो चुकी है प्रशासनिक महकमा तथा चुनाव आयोग भी तैयार है। इस चरण के चुनाव में केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत, कांग्रेस के दो विधायक सुखदेव भगत और मनोज कुमार यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है, जबकि भाजपा के दो सांसद बीडी राम और सुनील सिंह भी कड़े मुकाबले में फंसे है।


लोहरदगा में चौथे चरण के लोकसभा चुनाव को लेकर 29 अप्रैल को मतदान होगा। लोहरदगा , गुमला और रांची ज़िले में फैले इस संसदीय क्षेत्र में बारह लाख से ज़्यादा वोटर प्रत्याशियों के भाग्य विधाता बनेंगें, जिनमें महिलाओं की संख्या तकरीबन पांच लाख बेरान्वे हज़ार के आसपास है। लोहरदगा संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा सीट मांडर, सिसई, गुमला, विशुनपुर और लोहरदगा पड़ते हैं। मांडर रांची जिले में पड़ता है। वहीं सिसई, गुमला और विशुनपुर सीट गुमला जिले में है। लोहरदगा के दंगल में कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर होती रही है। यहां के चुनावी रणक्षेत्र में कांग्रेस ने सात बार विजय पताका लहराई है वहीं पांच बार भाजपा ने विपक्षी पार्टियों को पटखनी दी है। मौजूदा समय में केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत लोहरदगा के सांसद हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में कांग्रेस के रामेश्वर उरांव को शिकस्त दी। इस बार भाजपा ने एक बार फिर अपने निवर्तमान सांसद पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट थमाया है। महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई है यहां से पार्टी विधायक सुखदेव भगत ताल ठोंक रहे है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के बाशिंदों की समस्या वही हैं जो आमतौर पर देश के अन्य जनजातीय क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं। विकास की दौड़ में यह इलाका कुछ सुस्त दिखाई पड़ता है। मूलभूत सुविधाओं की बात हो या कनेक्टिविटी की यह इलाका कुछ नेग्लेक्टेड नज़र आता है। इलाके के पिछड़ेपन की वजह जो भी लेकिन जनजातीय बहुल लोहरदगा संसदीय क्षेत्र की जनता ने विकास की उम्मीद नहीं छोड़ी है और इस बार भी चुनावी समर के योद्धाओं से उन्हें काफी उम्मीदें हैं।


पलामू में पसंद की सरकार चुनने के लिए 29 अप्रैल को संसदीय क्षेत्र के तकरीबन साढ़े अठारह लाख मतदाता ईवीएम का बटन दबाएंगे। बिहार से सटा यह इलाका राजनीतिक रूप से काफी धनी है और वोटर काफी जागरूक हैं। वर्ष 1957 से लेकर 2014 तक इस लोकसभा क्षेत्र से भाजपा, कांग्रेस और राजद ने बारी बारी से कब्ज़ा जमाया। साल 2009 में झामुमो ने भी यहां जीत का पताका लहराया। सत्रहवीं लोकसभा के गठन के लिए हो रहे चुनावी समर में एक बार फिर भाजपा के निवर्तमान सांसद और राज्य के पूर्व डीजीपी बी डी राम भाग्य आज़मा रहे हैं जबकि महागठबंधन में यह सीट राजद के खाते में गई है जहां से राजद उम्मीदवार घूरन राम चुनावी मैदान में हैं। यहां से अन्य पार्टियां भी चुनावी रणक्षेत्र में अपना दमखम दिखने को तैयार हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस लोकसभा क्षेत्र में डाल्टनगंज , छतरपुर , भवनाथपुर , विश्रामपुर , गढ़वा और हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र पड़ते हैं। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक पलामू ज़िले की लगभग नवासी फीसदी जनता ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जबकि 10 प्रतिशत शहरी आबादी है। यहां के तकरीबन अठारह लाख मतदाताओं में से लगभग साढ़े आठ लाख महिला वोटर हैं। पलामू संसदीय क्षेत्र में विकास की अभी काफी गुंजाइश है और यहां के लोगों को अपने प्रतिनिधि से काफी उम्मीदें हैं।


चतरा संसदीय क्षेत्र में भी 29 अप्रैल को मतदान होगा। यहां पर लगभग चौदह लाख के आसपास वोटर हैं जिनमें महिला मतदाताओं की तादाद लगभग साढ़े छह लाख है। चतरा के निवर्तमान सांसद भाजपा के सुनील सिंह हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के धीरज साहू को पराजित किया था। वर्ष 1999 और 2004 में यहां राजद ने जीत का पताका लहराया था। इस बार राजद ने चतरा से सुभाष यादव को प्रत्याशी बनाया है हालांकि उसे महागठबंधन में केवल पलामू सीट दी गई थी। महागठबंधन में चतरा की सीट कांग्रेस के खाते में गई है और यहां से पार्टी के उमीदवार मनोज यादव भाग्य आज़मा रहे हैं। चतरा संसदीय क्षेत्र चतरा, लातेहार और पलामू ज़िले के कुछ हिस्सों में फैला है। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत चतरा , सिमरिया , लातेहार , पांकी और मनिका विधानसभा क्षेत्र पड़ते हैं। चतरा संसदीय क्षेत्र में भी चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा जिसमें संसदीय क्षेत्र के लगभग चौदह लाख मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करेंगें। इस रणक्षेत्र से जनता किस भाग्यशाली उमीदवार को दिल्ली के लिए अपना प्रतनिधि चुनेगी इसका खुलासा मतगणना के दिन 23 मई को होगा मगर इतना तय है की चतरा का समर चटपटा और दिलचस्प ज़रूर होगा। वोटरों की बात की जाए तो उन्होंने वोटिंग का मन तो बना लिया है लेकिन अबतक पत्ते नहीं खोलें हैं।

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Prateek Desk
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