झारखंड: बच्चों का सपना बना हकीकत, मिशन ओलंपिक 2024 की तैयारी शुरू

झारखंड: बच्चों का सपना बना हकीकत, मिशन ओलंपिक 2024 की तैयारी शुरू

Prateek Saini | Publish: Sep, 08 2018 08:24:12 PM (IST) Ranchi, Jharkhand, India

केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कोल इंडिया के संयुक्त प्रयास से गठित जेएसएसपीएस ने साल 2024 में पेरिस में और 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में पदक हासिल करने को लेकर छोटे स्तर से एक बहुत बड़े प्रयास की शुरूआत की है...

(पत्रिका ब्यूरो,रांची): हर बच्चे की कल्पना होती है कि उन्हें पढ़ाई के साथ खेलने के लिए आवश्यक संसाधन और एक मैदान मिलें। जिन्दगी में यह सपना कुछ बच्चों के लिए हकीकत बन पाता है, लेकिन झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएसपीएस) ने सुदूरवर्ती पहाड़ी और दूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे बच्चों के लिए भी इस सपनों को साकार करने का काम किया है, जिनके अभिभावक या परिजन खेल के लिए अत्याधिक महंगे उपकरण तो दूर की बात है, ठीक तरीके से अपने बच्चों के लिए दो शाम के लिए भोजन तथा कपड़े भी उपलब्ध नहीं करा पाते थे।


केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कोल इंडिया के संयुक्त प्रयास से गठित जेएसएसपीएस ने साल 2024 में पेरिस में और 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में पदक हासिल करने को लेकर छोटे स्तर से एक बहुत बड़े प्रयास की शुरूआत की है। जेएसएसपीएस पूरी ईमानदारी के साथ अपने इस प्रयास में जुटा है। राजधानी रांची के खेलगांव में स्थित आधारभूत सुविधा के बेहतर उपयोग को लेकर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना और विभिन्न खेलों के लिए खेल अकादमी गठन को लेकर 17 मई 2015 को एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया।


जेएसएसपीएस की ओर से राज्य के विभिन्न हिस्सों से चयन कर 8 से 12 वर्ष के बच्चों का विभिन्न खेल अकादमी में नामांकन कराया गया है। इन बच्चों के रहने, खाने-पीने की समुचित सुविधा के अलावा पढ़ाई की भी व्यवस्था की गयी है। जेएसएसपीएस के खेलगांव स्थित एकलव्य आश्रम में रहने वाले इन बच्चों ने कुछ ही महीनों के प्रयास से राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न स्पर्द्धाओं में 181 मेडल और स्टेट लेबल पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में 189 पदक हासिल किए। इस खेल अकादमी में करीब 1400 बच्चों को मिशन 2024 ओलंपिक के लिए प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है, जिसमें से 50 फीसदी बच्चे झारखंड राज्य के होंगे। अभी विभिन्न अकादमी में लगन व मेहनत कर रहे लगभग 400 बच्चे का एक ही सपना है- ओलंपिक पदक।

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