बिहार से सटे चतरा में राजद को जीत की उम्मीद

चतरा में धार्मिक और पौराणिक महत्त्व के कई धरोहर हैं। इतिहासकार 1857 में आज़ादी की लडाई में बैटल ऑफ़ चतरा की चर्चा ज़रूर करतें हैं। चतरा विधानसभा क्षेत्र के 1952 में अस्तित्व में आने के बाद पहली बार स्वतंत्रता सेनानी सुखलाल सिंह यहाँ के विधायक बने थे। समय बदला और राजनीतिक इतिहास भी बदला। वर्ष 2000 में भाजपा के सत्यानंद भोक्ता ने राजद के जनार्दन पासवान को करीब साढ़े छह हजार मतों से पराजित किया था।

By: Navneet Sharma

Published: 27 Nov 2019, 08:18 PM IST

रांची. झारखंड का प्रवेश द्वार चतरा रांची से लगभग नब्बे मील दूर है। इस जिले में प्रसिद्ध भद्रकाली और माँ कौलेश्वरी मंदिर हैं जहां काफी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धर्म और आस्था के साथ यहां का काफी गौरवशाली इतिहास भी रहा है। पर्यटन की असीम संभावनाओं वाले इस क्षेत्र में अनेकों जलप्रपात हैं। सन 1805 -1806 में महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय का भी यहाँ आगमन हुआ था।

चतरा में धार्मिक और पौराणिक महत्त्व के कई धरोहर हैं। इतिहासकार 1857 में आज़ादी की लडाई में बैटल ऑफ़ चतरा की चर्चा ज़रूर करतें हैं। चतरा विधानसभा क्षेत्र के 1952 में अस्तित्व में आने के बाद पहली बार स्वतंत्रता सेनानी सुखलाल सिंह यहाँ के विधायक बने थे। समय बदला और राजनीतिक इतिहास भी बदला। वर्ष 2000 में भाजपा के सत्यानंद भोक्ता ने राजद के जनार्दन पासवान को करीब साढ़े छह हजार मतों से पराजित किया था। झारखंड बनने के बाद साल 2005 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ, इसमें भाजपा के सत्यानंद भोक्ता एक बार फिर विजयी हुए। वर्ष 2009 के चुनाव में राजद के जनार्दन पासवान यहाँ से चुने गये।

साल 2014 के चुनाव में भाजपा के जयप्रकाश सिंह भोक्ता ने जेवीएम के सत्यानंद भोक्ता को पराजित किया। साल 2019 में भी चुनावी रणभूमि में संग्राम छिड़ा है। चतरा विधानसभा सीट पर कुल 3 लाख 72 हजार 433 मतदाता हैं इनमें से 1 लाख 95 हजार 90 पुरुष जबकि 1 लाख 77 हजार 341 महिला मतदाता हैं। इस बार पहली बार 9 हजार 9 सौ नये मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल भी करेंगे।
लोकसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा का दामन थामने वाले पूर्व विधायक जनार्दन पासवान राजद छोड़ कर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर सत्यानंद भोक्ता झाविमो छोड़ राजद से इस चुनावी दंगल में ताल ठोंक रहे हैं। झाविमो ने तिलेश्वर राम को चतरा से चुनावी मैदान में उतारा है। एक बार फिर बैटल फॉर चतरा की भूमि तैयार है और तीस नवम्बर को पहले चरण में इलाके की जनता ईवीएम का बटन दबाकर इस महासंग्राम के योद्धा का चुनाव करेगी।

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